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- Sangrur News The Council Owed Rs 25 Crore 8 Crore Debt Increased To 14 Crore No Hope Of Development
कौंसिल पर 25 करोड़ की देनदारी, 8 करोड़ कर्ज बढ़कर ~14 करोड़ हुआ, विकास की उम्मीद नहीं
कर्ज और देनदारी में डूबी नगर कौंसिल से शहर के विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती है। हालात ऐसे हैं कि नगर कौंसिल के पास जितनी आमदन है, उससे अधिक खर्च हो रहा है। इसके चलते नगर कौंसिल न सिर्फ कर्ज में डूब गई है बल्कि देनदारियों की सूची भी बढ़ती जा रही है।
नगर कौंसिल कमेटी अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकी है, बावजूद इसके हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। नतीजतन शहर के कई हिस्सों में विकास नहीं हुआ। कौंसिल का 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने जा रहा है। नगर कौंसिल कमेटी 9 मार्च को भंग की जा चुकी है। ऐसे में अगर नगर कौंसिल की वित्तीय हालत पर गौर किया जाए तो कौंसिल द्वारा 6 वर्ष पहले 15 जनवरी 2014 को नगर सुधार ट्रस्ट से लिया गया 8 करोड़ रुपए का कर्ज भी चुकाया नहीं जा सका है। कौंसिल ने यह कर्ज शहर के विकास के लिए उठाया था। कमेटी अपने दूसरे कार्यकाल में इस राशि को चुकाने की कोई योजना तक तैयार नहीं कर पाई ऐसे में 8 करोड़ कर्ज की राशि ब्याज के साथ 14 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है। नगर कौंसिल को यह राशि 10 छमाही किस्तों में चुकाई जानी थी। इस पर 12 प्रतिशत ब्याज तय किया गया था। कौंसिल एक भी किश्त नगर सुधार ट्रस्ट को नहीं भर सकी है। जिस कारण अब ट्रस्ट की नगर कौंसिल की पुरानी फायर ब्रिगेड वाली जमीन पर नजर है। जिससे ट्रस्ट अपने लोन की राशि को रिकवर करना चाहती है।
कई मोहल्लों में नहीं मिली बुनियादी सुविधाएं
कौंसिल की आर्थिक हालत से साफ है कि शहर के कई इलाकों के लोग आज भी गलियां, नालियां, स्ट्रीट लाइटों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। राम नगर बस्ती, सुंदर बस्ती, घुमियार बस्ती, बाजीगर बस्ती, बगूआना, अजीत नगर आदि में स्ट्रीट लाइटों सहित अन्य सुविधाओं का बुरा हाल है।
कौंसिल ने कर्ज की एक भी किस्त नहीं दी : चेयरमैन
कौंसिल ने 6 वर्ष में कर्ज की एक भी किस्त जमा नहीं करवाई। नगर सुधार ट्रस्ट 14 करोड़ की रिकवरी के लिए फायर ब्रिगेड की जमीन ट्रस्ट को देने के लिए कई पत्र लिख चुकी है। अब निकाय विभाग के डायरेक्टर के पास जा रहे हैं।
-नरेश गाबा, चेयरमैन, नगर सुधार ट्रस्ट
आय कम रह जाती है, वैट पूरा नहीं मिलता : ढिल्लो
नगर कौंसिल के निवर्तमान प्रधान रिपुदमन ढिल्लाें ने कहा कि हमारी हल साल अामदनी कम रह जाती है। सरकार से भी पूरा वैट भी नहीं मिलता। कभी तो अाता ही नहीं। अन्य स्रोतों से भी अामदनी कम रहती है। खर्च फिक्स हैं।
वैट और सेल ऑफ लैंड कौंसिल की आमदन के मुख्य स्रोत
नगर कौंसिल की पिछले वर्षों में पेश किए गए बजट पर नजर दौड़ाई जाए तो नगर कौंसिल के पास वैट और सेल ऑफ लैंड से मुख्य आमदन होती है परंतु दोनों से कभी पूरा पैसा नगर कौंसिल को नहीं मिला है। कौंसिल को वैट से करीब 10 करोड़, सेल ऑफ लैंड से 10 करोड़, बिजली से चुंगी 1 करोड़, एक्साइज डयूटी 1 करोड़, प्रोपर्टी टैक्स 1 करोड़, रेंट 90 लाख, नक्शा फीस 50 लाख, प्लाट रैगुलर फीस करीब 1 करोड़ समेत अन्य दूसरे स्रोत से करीब 32 करोड़ रुपए आमदन होने की उम्मीद थी।
26 करोड़ रुपए से अधिक खर्च, जिसे रोका नहीं जा सकता
खर्च की बात की जाए तो कौंसिल के इस बजट का 52 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, मेडिकल बिल, पीएफ व डीए आदि पर खर्च किया गया है। मतलब 17 करोड़ रुपए से अधिक राशि वेतन में निकल जाती है। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट बिल, लाइटों की देखभाल पर खर्च, नगर सुधार ट्रस्ट के कर्ज की किस्त, मोहल्ला सुधार कमेटी, गोशाला की देखरेख पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च आता है। मतलब साफ है कि 27 करोड़ से अधिक खर्च को रोका नहीं जा सकता है।
आय कम होने से 25 करोड़ से अधिक की देनदारी : पूर्व पार्षद
कौंसिल में विपक्ष के पूर्व कांग्रेसी पार्षद महेश कुमार मेशी ने कहा कि नगर कौंसिल अपनी गलत नीतियों के कारण किसी वर्ष भी अपनी आमदन के संभावित बजट को पूरा नहीं कर सकी है। आमदन कभी भी बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा नहीं कर सकी है। नतीजतन कौंसिल घाटे में जा रही है। वर्तमान समय में कौंसिल ने ट्रस्ट का 14 करोड़, ईपीएफ 5 करोड़, बिजली बिल 4 करोड़, पेंशन 30 लाख, रिटायर्ड ड्यूज डेढ़ करोड़, पीएफ 10 लाख, बीमा किस्त 7 लाख समेत 25 करोड़ रुपए की देनदारी है।
आमदन की 52 प्रतिशत से अधिक राशि कर्मचारियों के वेतन पर की जाती है खर्च
संगरूर के अजीत नगर की सड़क नगर कौंसिल के कार्यकाल के दौरान बन ही नहीं पाई। ऐसा ही हाल दूसरे मोहल्लों में भी है।