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जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी ने मालेरकोटला प्रशासन पर लगाया आरोप, कहा-

एक वर्ष पहले
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जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी ने मालेरकोटला प्रशासन पर गांव तोलेवाल के दलितों द्वारा जनरल वर्ग के लोगों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज करवाए केस को रद करवाने के लिए धोखे के साथ डरा धमकाकर हस्ताक्षर करवाने के प्रयास करने का आरोप लगाया है। दलित वर्ग को रिजर्व कोटे की पंचायती जमीन के बदले एससी एसटी एक्ट के तहत केस वापस लेने के लिए दबाव डालने का भी प्रशासन पर आरोप लगाया है। गदर मेमोरियल भवन में जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के प्रधान मुकेश मलौद और जगतार सिंह तोलेवाल ने कहा कि प्रशासन व गांव तोलेवाल के दलितों के मध्य पंचायती जमीन तीन वर्षीय लीज पर देने का समझौता हो गया था। जिसके मुताबिक 13 मार्च को बीडीपीओ दफ्तर मालेरकोटला में पंचायती जमीन की बोली रखी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बोली शुरू करने से पहले मालेरकोटला प्रशासन ने यह शर्त रख दी कि 1 जुलाई 2019 को गांव तोलेवाल में जो लड़ाई हुई थी। जिसमें काफी दलित घायल हो गए। घायलों के बयानों पर पूंजीपतियों पर एससी एसटी एक्ट का पर्चा दर्ज हो गया था। वह उन्हें वापस लेना होगा। जिसके बाद ही बोली शुरू होगी। दलितों ने पर्चा वापिस लेने से पहले शर्त रखी कि दलितों को जमीन तीन वर्षीय लीज पर दी जाएगी, जरूरतमंदों को ग्राम सभा का प्रस्ताव डालकर प्लाट दिए जाएंगे, पूंजीपति मारपीट के लिए गांव की धर्मशाला में माफी मांगेगे, दलितों पर इस बोली के संघर्ष दौरान डाले गए पर्चे रद किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस समझौते पर जनरल वर्ग के लोगों ने एसडीएम, बीडीपीओ और एससी कमिशन की सदस्य की हाजिरी में सहमति दे दी परंतु जब समझौते की प्रशासन द्वारा लिखत की गई तो वह अंग्रेजी में थी। जब दलितों वह समझ न आई तो वह उसे वकील के पास ले गए जिसके बाद वकील ने बताया कि इस में उपरोक्त शर्तों में कोई शर्त नहीं। सिर्फ जनरल वर्ग के लोगों पर एससी एसटी एक्ट तहत हुए केस को रद करवाने के लिए एक आवेदन लिखा गया है और प्रशासन केस रद करवाने के लिए हस्ताक्षर करवा रहा है। उन्होंने कहा कि दलित वर्ग द्वारा हस्ताक्षर करने से इंकार करते हुए इस धोखेबाजी के खिलाफ नारेबाजी की गई। फिर प्रशासन ने कहा कि वह अपना समझौता लिखवा लाए। जब उपरोक्त शर्तों मुताबिक समझौता लिखा गया तो जनरल वर्ग के लोगों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। मुकेश मलौद और जगतार तोलेवाल ने आरोप लगाया कि प्रशासन सरेआम जनरल वर्ग का पक्ष लेते हुए केस रद करवाने के लिए दलित वर्ग पर दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि बोली रद करके 24 मार्च को रखी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डमी बोली करवाने की कोशिश की गई तो इसके नतीजे गंभीर होंगे। जिसका जिम्मेवार प्रशासन होगा।

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