बरनाला जिले के दो डार्क जोन में 1.13 लाख हेक्टेयर में 38151 ट्यूबवेलों से होगी रोपाई

Sangrur News - ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जिले के तीन में से दो ब्लाॅकों को डार्क जोन घोषित किए जाने के बावजूद जिले में इस बार 1.13 लाख...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:30 AM IST
Barnala News - transplantation of 38151 tube wells in 113 lakh hectare in two dark zones of barnala district
ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जिले के तीन में से दो ब्लाॅकों को डार्क जोन घोषित किए जाने के बावजूद जिले में इस बार 1.13 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल की रोपाई होगी, जिसमें से 56 प्रतिशत रोपाई भूजल से होगी। अगले एक महीने तक किसान धान की रोपाई में व्यस्त रहेंगे। खेतीबाड़ी विभाग व यूनिवर्सिटी द्वारा सिफारिश की हुई धान की किस्मों को दरकिनार करते हुए किसानों ने दूसरी किस्मों को प्राथमिकता दी है। किसानों का मानना है कि यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित किस्मों में झाड़ नहीं निकलता, जिसके चलते किसानों को नुकसान होता है। वहीं खेतीबाड़ी विभाग ने दावा किया है ऐसा कुछ नहीं होता। खेतीबाड़ी विभाग के अनुसार इस बार करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई कम होगी। पहले दिन किसानों को धन की रोपाई के लिए लेबर की किल्लत महसूस हुई। प्रवासी मजदूरों के कम आने के कारण लेबर के रेट भी बढ़े हैं।

ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जिला बरनाला के बरनाला, महलकलां व शैहणा ब्लॉक में से बरनाला व महलकलां को डार्क जोन घोषित किया हुआ है। पानी का स्तर खतरनाक स्तर पर नीचे जा चुका है। ट्यूबवेल 300 फीट पर लग रहे हैं। फिर भी धान की 56 प्रतिशत फसल जिले के कुल 38151 ट्यूबवेल पर निर्भर है। ब्लाॅक शैहणा में नहरी पानी होने के कारण उसे अभी तक डार्क जोन में नहीं लिया गया। वहां पर ज्यादातर खेती नहरी पानी से होती है। खेतीबाड़ी अफसर जसबिंदरपाल सिंह ने कहा कि किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वह धान की खेती से हट जाएं।

धान का मूल्य

वित्तीय वर्ष एमएसपी

2013-14 1345

2014-15 1400

2015-16 1450

2016-17 1510

2017-18 1590

2018-19 1770

लेबर को ट्राली पर लेकर जाते हुए किसान।

बरनाला में इस बार धान की खेती का रकबा 0.87 प्रतिशत कम होगा : जसबिंदर पाल ग्रेवाल

खेतीबाड़ी विभाग व यूनिवर्सिटी की सिफारिश के उल्ट किसानों ने पूसा किस्म को अपनाया है। किसान नेता लखबीर सिंह ने बताया कि खेतीबाड़ी विभाग की तरफ से पीआर 127, 122,121,114 किस्म की सिफारिश की गई थी। लेकिन किसान पूसा-44 व पूसा डोगरा को अपना रहे हैं, क्योंकि इस किस्म से झाड़ अधिक निकलता है। पिछली बार ज्यादातर किसानों ने खेतीबाड़ी विभाग की सिफारिश को माना था, लेकिन उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। विभाग द्वारा बताई किस्म से 20 से 25 क्विंटल और दूसरी से 25 से 30 क्विंटल झाड़ निकलता है, इसलिए किसान दूसरी किस्मों को पहल दे रहे हैं। खेतीबाड़ी अफसर जसबिंदर पाल सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पिछली बार धान की रोपाई जिले में 1.14 हेक्टेयर पर हुई थी। वहीं इस बार 1.13 पर होगी। उन्होंने किसानों को प्रेरित करके दाल, मक्की व कपास की तरफ मोड़ा है। किसानों को इस बार किसी भी किस्म की कमी नहीं आने दी जाएगी।

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