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प्रभु श्रीकृष्ण की बांसुरी भक्ति और समर्पण का प्रतीक : साध्वी रूपेश्वरी

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में शिव निकेतन धर्मशाला में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत का आयोजन किया...

Dainik Bhaskar

Apr 15, 2018, 02:45 AM IST
प्रभु श्रीकृष्ण की बांसुरी भक्ति और समर्पण का प्रतीक : साध्वी रूपेश्वरी
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में शिव निकेतन धर्मशाला में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन की शुरूआत में स्वामी उमेशानंद जी, साध्वी ईश्वरप्रीता भारती, घनश्याम कांसल, पवन कुमार छाहड़िया, अकुंश बतरा, राज कुमार, प्रीति अाहूजा ने पूजन किया। कथा में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी रूपेश्वरी भारती ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में जहां बहुत से चेतन पात्र हैं वही एक ऐसा पात्र भी है जिसके बिना भगवान श्रीकृष्ण अधूरे हैं, वह है उनकी बांसुरी। जब वह बजती थी तो सभी को दीवाना बना देती थी। प्रभु की बांसुरी भक्ति व समर्पण का प्रतीक है। इसलिए तो वह कन्हैया के हाथ का यंत्र बनी। हमें भी संसार का मोह छोड़कर प्रभु का बनना होगा। तभी जीवन का कल्याण है। कथा में गोवर्धन लीला प्रसंग भी सुनाया गया जो हमें समझाता है कि हमें अपनी प्रकृति का सरंक्षण करना चाहिए। ज्योति प्रज्वल्लित करने के लिए विशेष रूप से श्रीप्रकाश चंद गर्ग, इंद्रजीत सिंह गोल्डी, आरएन कांसल, लाजपत गर्ग, सुनीता शर्मा, टिंका आनंद, राजीव सिंगला, रामेश गर्ग, अच्छर गोयल, सुभाष सिंगला, वैद हुकम चंद, मनप्रीत बांसल, विक्रम गर्ग,विक्की सुरजीत भारद्वाज, विकास गर्ग, राकेश जिंदल, विनोद कुमार, प्रवीण गोयल, चमन लाल, मोहिल गर्ग, मीनू कांसल, भूषण कांसल, गोपाल शर्मा, पहुंचे। (टिंका)

िदव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित गोवर्धन कथा के चौथे दिन कथा से पूर्व पूजन करते श्रद्धालु।

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