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इंटरक्रॉपिंग खेती दिखाएगी किसान को कर्जमुक्ति का रास्ता

22 एकड़ में खेती करने वाले किसान प्रह्लाद सिंह नमोलीहर (तलवाड़ा) आर्गेनिक खेती करके पंजाब सरकार की ओर से शुरू की गई...

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2018, 02:55 AM IST
इंटरक्रॉपिंग खेती दिखाएगी किसान को कर्जमुक्ति का रास्ता
22 एकड़ में खेती करने वाले किसान प्रह्लाद सिंह नमोलीहर (तलवाड़ा) आर्गेनिक खेती करके पंजाब सरकार की ओर से शुरू की गई मुहिम ‘मिशन तंदरुस्त पंजाब’ को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं बाकी किसानों के लिए भी मिसाल बने हैं। प्रह्लाद सिंह ने बताया कि 1998 में उसने 7 एकड़ पुश्तैनी जमीन में खेती शुरू की। इसके बाद 15 एकड़ जमीन लीज पर लेकर गन्ना, गेहूं तथा दालों की खेती शुरू की तथा कई साल से इसी तरह से खेती करते आ रहे हैं। उन्होंने इंटरक्रॉपिंग तकनीक से रिवायती फसलों में सब्जियों तथा फूल लगाकर मुनाफा हासिल किया है। इसके बाद उन्होंने 2 कनाल क्षेत्र में माहिरों की सलाह से नैट हाउस के माध्यम से फूलों आैर सब्जियों की काश्त भी की।

तलवाड़ा के गांव नमोलीहर के किसान प्रह्लाद सरकार के मिशन तंदुरुस्त पंजाब को दे रहे हैं बढ़ावा

इनके गुड़ शक्कर का प्लांट देखने आते हैं किसान, आस्ट्रेलिया आैर दुबई तक में ऐसे प्लांट की मांग

1 एकड़ में सब्जी से कमाए डेढ़ लाख... किसान प्रह्लाद सिंह ने बताया कि बदलते समय के अनुसार उन्होंने खेतीबाड़ी विभाग के सहयोग से सिंगल बैड प्लांटेशन सिस्टम द्वारा 8 फुट तथा 3 फुट के फासले पर क्यारियों में गन्ना लगाकर सब्जियां लगाईं तथा 1.40 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुनाफा लिया। उन्होंने बताया कि इस तरह उन्होंने आईपीएम कांन्सेप्ट से अपने मुनाफे को कई गुणा बढ़ाया। उन्होंने दूसरे किसानों से भी इंटरक्रॉपिंग खेती की अपील की।

विभाग दे रहा सबसिडी...जिला खेतीबाड़ी अफसर विनय कुमार ने बताया कि विभाग किसानों को बीज तथा मशीनरी पर 50 फीसदी सबसिडी दे रहा है। इसके अलावा फसलों का वेस्ट संभालने के लिए सुपर एसएमएस 300, हैप्पी सीडर तथा पैडी स्ट्रा पर भी छूट दी जा रही है।

पानी की कर रहे बचत...प्रह्लाद ने बताया कि हलदी, फूलगोभी, अदरक तथा लहसुन जैसी नकदी फसल लगाकर किसान पानी बचा सकते हैं। उन्होंने सरकार की आत्मा स्कीम के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर रिसर्च (आईआईएसआर) लखनऊ से ट्रेनिंग ली आैर अपना गुड़ शक्कर का यूनिट स्थापित किया। इस यूनिट से उनको चोखा मुनाफा हुआ। इसी तरह का यूनिट लगाने के लिए आस्ट्रेलिया तथा दुबई से भी किसानों ने उनके साथ संपर्क किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती से मुनाफा तो हासिल किया ही जा सकता है साथ ही सेहत को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकता है।

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