Hindi News »Punjab »Tanda» 45 दिन है मशरूम का उत्पादन चक्र, सिर्फ अंधेरे कमरे की जरूरत, शेल्फ सिस्टम से 6 गुना प्रोडक्शन

45 दिन है मशरूम का उत्पादन चक्र, सिर्फ अंधेरे कमरे की जरूरत, शेल्फ सिस्टम से 6 गुना प्रोडक्शन

मशरूम की खेती कम जमीन वाले किसानों के लिए कमाई का नया साधन बन सकती है। टांडा क्षेत्र के गांव बुड्ढी पिंड के किसान...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 02:45 AM IST

  • 45 दिन है मशरूम का उत्पादन चक्र, सिर्फ अंधेरे कमरे की जरूरत, शेल्फ सिस्टम से 6 गुना प्रोडक्शन
    +1और स्लाइड देखें
    मशरूम की खेती कम जमीन वाले किसानों के लिए कमाई का नया साधन बन सकती है। टांडा क्षेत्र के गांव बुड्ढी पिंड के किसान भाई संजीव सिंह और राजिंदर सिंह ने मशरूम फार्मिंग में संभावनाओं को देखते हुए इसे व्यवसाय में बदलकर कम जमीन वाले किसानों को उम्मीद की किरण दिखाई है। 1995 में संजीव सिंह और राजिंदर सिंह ने पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना से बुनियादी जानकारी हासिल कर घर के एक कमरे में 10 क्विंटल भूसे से मशरूम की खेती शुरू की। पहले साल सफलता के बाद दो साल में 50 क्विंटल तक पैदावार लेने लगे। आज जर्मनी, न्यूजीलैंड और इस्राइल से मशीनें मंगवाकर रोजाना डेढ़ टन के करीब मशरूम प्रोडक्शन कर रहे हैं आैर 25 से 30 लोगों को रोजगार भी दे रखा है।

    बिजाई के 20 दिन में शुरू हो जाता है प्रोडक्शन

    मशरूम की पैदावार का साइकिल 45 दिन का है। यह 100 फीसदी आर्गेनिक प्रोडक्ट है। इसे स्ट्रॉ की कम्पोस्ट में मशरूम के बीज बोकर पैदा किया जाता है। मशरूम की खेती के लिए बस अंधेरे कमरों की जरूरत होती है। इनमें शेल्फ सिस्टम से प्रोडक्शन छह गुना की जा सकती है। बिजाई के लिए पहले पराली या तूड़ी (स्ट्रा) में गेहूं का बूरा, यूरिया, कैल्शियम, अमोनियम नाइट्रेट, सुपर फॉस्फेट, पोटाश , जिप्सम मिलाकर कम्पोस्ट बनाई जाती है। इसे पॉलिथीन या शेल्फ पर डाल कर मशरूम की बिजाई की जाती है। लगभग 20 दिन में मशरूम की पैदावार शुरू हो जाती है। पंजाब में कुदरती हालात और तापमान पर मशरूम की खेती करने का सही समय अक्टूबर से मार्च है|

    पंजाब में पैदा की जा सकती हैं मशरूम की पांच किस्में

    ऐसे बनाएं कम्पोस्ट...गेंहू का भूसा-300 किलो, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (कैन) खाद 9 किलो, यूरिया 4 किलो, मयुरेट ऑफ़ पोटाश खाद 3 किलो, सुपर फासफेट खाद 3 किलो, गेंहू का चोकर १५ किलो, जिप्सम 20 किलो।

    मशरूम की खेती में नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं दोनों

    Á 2008 में नेशनल मशरूम रिसर्च सेंटर की और से मशरूम प्रोडक्शन के लिए नेशनल अवार्ड

    Á 2013 बेस्ट सिटीजन अवार्ड ऑफ़ इंडिया और भारत ज्योति अवार्ड

    Á 2014 में सक्सेस स्टोरी ऑफ़ इंडिया ने देश के 10 उद्यमियों में जगह दी

    Á 2015 में बी बी सी वर्ल्ड चैनल में डाक्यूमेंट्री दिखाई जाना

    Á 2015 में मशरूम प्रोडक्शन डेवलपमेंट कमेटी पंजाब में सदस्य बनाए गए

    दुनिया भर में मशरूम की लगभग 40 से 50 किस्मों की खेती होती है लेकिन पंजाब का वातावरण पांच किस्मों के लिए उपयुक्त है। इसमें भी लगभग 80 से 90% काश्त बटन मशरूम की है। बटन मशरूम के अलावा ओएस्टर मशरूम की खेती होती है।

    कितनी हो सकती है कमाई...मशरूम कैश क्रॉप है। इसमें उधार का झंझट नहीं रहता। एक किसान एक एकड़ में गेहूं, धान या फिर गन्ने की खेती से साल में 50 हज़ार से 75 हज़ार रुपए ही कमा सकता है। ऐसे में अगर एक एकड़ में मशरूम की खेती मेहनत और ईमानदारी से की जाए तो एक करोड़ रुपए तक टर्नओवर ली जा सकती है।

    ऐसे बढ़ा सकते हैं मुनाफा

    संजीव सिंह और राजिंदर सिंह ने बताया कि मशरूम फार्मिंग के साथ-साथ मशरूम बीज (स्पान) की प्रोडक्शन भी शुरू की जा सकती है। इसके लिए हाइब्रिड कल्चर से बीज प्रोडक्शन करनी होती है। यह करने के लिए ट्रेनिंग ली जा सकती है।

  • 45 दिन है मशरूम का उत्पादन चक्र, सिर्फ अंधेरे कमरे की जरूरत, शेल्फ सिस्टम से 6 गुना प्रोडक्शन
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Tanda

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×