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जवाई बांध पुनर्भरण के लिए साबरमती बेसिन परियोजना की डीपीआर का एक पार्ट अगस्त में भेजेंगे सरकार को

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 23, 2018, 02:00 AM IST

जवाई बांध पुनर्भरण के लिए साबरमती बेसिन परियोजना की डीपीआर का एक पार्ट अगस्त में भेजेंगे सरकार को
जवाई बांध पुनर्भरण के लिए प्रस्तावित साबरमति बेसिन परियोजना की डीपीआर का काम तेज गति से चल रहा है। वर्तमान में तैयार की जा रही डीपीआर में बदलाव करके इसे दो पार्ट में तैयार किया जा रहा है। ताकि समय पर डीपीआर का एक पार्ट तैयार करके सरकार को अगस्त माह तक भेजा जा सके। - गिरीश लोढ़ा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग जोधपुर संभाग

जवाई बांध पुनर्भरण के लिए साबरमती बेसिन परियोजना की डीपीआर का एक पार्ट अगस्त में भेजेंगे सरकार को

लेखराज गौड़ | गुड़ा बालोतान

जवाई बांध पुनर्भरण के लिए प्रस्तावित साबरमति बेसिन परियोजना को लेकर तैयार की जा रही डीपीआर अगस्त में सरकार को प्रस्तुत की जाएगी। डीपीआर में कुछ बदलाव करने से करीब नौ माह की देरी हो गई है।

पहले डीपीआर की अंतरिम रिपोर्ट नवम्बर 2017 तक सरकार को भेजी जानी निर्धारित थी, लेकिन डीपीआर को टू पार्ट में तैयार करने एवं कार्य को तीव्र गति प्रदान करने के लिए डीपीआर में बदलाव करने से करीब नौ माह का समय निकल गया। वर्तमान में दो पार्ट में तैयार की जा रही डीपीआर का काम तेजी के साथ चल रहा है। जोधपुर संभाग जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता गिरीश लोढा ने बताया कि डीपीआर में बदलाव कर दो पार्ट में बनाने से देरी हो गई है। डीपीआर का एक पार्ट अगस्त माह में सरकार को भेज दिया जाएगा। ताकि कार्य पर प्रथम चरण की लागत के लिए सरकार की ओर से बजट के लिए हरी झंडी मिल सके।

डीपीआर में बदलाव के कारण नौ महीने हुई देरी, पहले बनाई गई डीपीआर में दो बांध बनाए जाने प्रस्तावित थे

अब नई डीपीआर में चार बांध बनाए जाने प्रस्तावित, वर्तमान में परियोजना की लागत चार हजार करोड़ रुपए से अधिक हुई, दो पार्ट में डीपीआर होने से बजट आबंटन में होगी आसानी

पहले योजना के फाइनल प्रारूप में ऐसा किया है बदलाव

जवाई बांध पुनर्भरण व जवाई बांध को पेयजल आपूर्ति से मुक्त करवाने के लिए कमेटी व विभागीय अधिकारियों की देखरेख में वाप्कोस कम्पनी द्वारा जो फाइनल प्रारूप तैयार किया गया था, उस प्रारूप में जवाई बांध पुनर्भरण के लिए साबरमती की कोटड़ा तहसील में स्थित वाकल चतुर्थ, कोलया गांव की दामन नदी व गौरी गांव के समीप सेई नदी पर बांध बनाया जाना प्रस्तावित था। वाकल, साबरमती व सेई नदी पर बनाए जाने वाले बांधों को साइट की स्थिति के अनुसार खुली चैनल व टनल के माध्यम से आपस में जोड़ने के साथ सेई बांध को पिण्डवाड़ा तहसील में बने मोरस व कादंबरी बांध से होते हुए मार्ग में आने वाले जलग्रहण क्षेत्र की आवक को उसके साथ जोड़ते हुए समूचा पानी जवाई बांध में लाया जाना प्रस्तावित किया गया था। जिसमें टनल व ओपन चैनल की अनुमानित लंबाई करीब 73 किलोमीटर आंकी गई थी। हालांकि टनल व ओपन चैनल की लंबाई में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पहले बनाई गई डीपीआर में दो बांध बनाए जाने प्रस्तावित थे, अब नई डीपीआर में चार बांध बनाए जाने प्रस्तावित किए गए है। इससे परियोजना की लागत में इजाफा हुआ है। तथा दो पार्ट में तैयार की गई डीपीआर में प्रस्तावित जल मार्ग द्वारा साबरमती बेसिन से जवाई बांध में करीब 6500 एमसीएफटी पानी अपवर्तन किया जाना प्रस्तावित है।

दो पार्ट होने से बजट में रहेगी सहूलियत

डीपीआर दो पार्ट में बनाने से सरकार को बजट जारी करने में सहूलियत रहेगी। एक साथ बजट जारी नहीं करना पड़ेगा। हालांकि वर्तमान में इस परियोजना की लागत करीब चार हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार को प्रथम चरण की राशि जारी करने का अवसर मिल सकता है।

इनका कहना है...

जवाई बांध पुनर्भरण की डीपीआर पहले बीते वर्ष नवम्बर माह के दौरान सरकार को भेजी जानी प्रस्तावित थी। लेकिन निर्धारित समय पर डीपीआर तैयार नहीं हो पाई। और अतिरिक्त मुख्य अभियंता लोढा के आने के बाद डीपीआर में बदलाव कर टू पार्ट में तैयार करवाने की सोच सराहनीय है। इससे सरकार की ओर से आधा बजट जारी करना आसान हो जाएगा और कार्य को तेज गति से शुरू करवाने में आसानी रहेगी। अब दोनों जिलों के जनप्रतिनिधियों का फर्ज बनेगा कि सरकार पर दबाव बनाकर बजट आवंटन करवाए। - ईश्वरसिंह थुम्बा, सदस्य, जवाई बांध पुनर्भरण हाई पॉवर कमेटी

2014 में लागत थी 2720 करोड़, देरी होने से अब परियोजना हुई 4 हजार करोड़ रुपए

वर्ष 2014 में इस योजना की लागत करीब 2750 करोड़ रुपए प्रस्तावित थी। उसके बाद वर्ष 2016 में इसकी लागत करीब 3350 करोड़ रुपए बताई गई थी, लेकिन जैसे जैसे प्रस्तावित योजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही है। वैसे वैसे इसकी लागत भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में महंगाई का ग्राफ बढ़ने एवं परियोजना की डीपीआर में नया बदलाव करने से अब इसकी अनुमानित लागत करीबन चार हजार करोड़ रुपए से भी अधिक की बताई जा रही है। हालांकि परियोजना पर वास्तविक लागत कितनी आएगी इसका आंकलन डीपीआर की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद ही तय हो पाएगा।

जवाई बांध पुनर्भरण की डीपीआर जल संसाधन विभाग द्वारा सरकार के पास भेजते ही हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द इसे क्रियान्वित करवाकर जिले के किसानों व ग्रामीणों को सौगात प्रदान करवा सके। इसके बारे में मैंने विधानसभा की बैठक में भी इस मुद्दे को प्राथमिकता के साथ उठाया था। - शंकरसिंह राजपुरोहित, विधायक आहोर

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