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पचानवा बाढ़-बचाव का कार्य नहीं होने से जवाई नदी के ओवरफ्लो पानी के दस गांवों में घुसने का खतरा

भास्कर न्यूज | गुड़ा बालोतान निकटवर्ती उम्मेदपुर-पचानवां गांव जाने वाले मार्ग पर स्थित जूना मालपुरा गांव से...

Dainik Bhaskar

Jun 19, 2018, 02:00 AM IST
पचानवा बाढ़-बचाव का कार्य नहीं होने से जवाई नदी के ओवरफ्लो पानी के दस गांवों में घुसने का खतरा
भास्कर न्यूज | गुड़ा बालोतान

निकटवर्ती उम्मेदपुर-पचानवां गांव जाने वाले मार्ग पर स्थित जूना मालपुरा गांव से सटकर गुजर रही जवाई नदी के किनारे पर बाढ़ बचाव के लिए बनी हुई धोरापाळी (मिट्टी की पाळ) पिछले वर्ष की बारिश के दौरान जवाई नदी के ऊफान पर चलने से टूट कर बह गई थी। जिससे जवाई नदी का ओवरफ्लो पानी इसी टूटी हुई धोरापाळी से निकलकर जूना मालपूरा गांव होते हुए पचानवा, उम्मेदपुर, अगवरी गांव से गुडाबालोतान तक पहुंच गया था। यह तो अच्छा रहा कि जवाई बांध के गेट बंद कर दिए गए और जवाई नदी के पानी की रफ्तार धीमी पड़ गई थी, वरना उम्मेदपुर से लेकर आहोर के बीच आने वाले करीब दस गांवों में बाढ़ के हालात पैदा हो जाते। आने वाले दिनों में मानसून की बारिश का दौर शुरू हो जाएगा और वर्ष २०१६ व २०१७ की तर्ज पर जोरदार बारिश हो गई तो स्थिति विकराल रूप धारण कर सकती हंै।

नरेगा योजना के तहत संविदा पर लगे काॢमकों की हड़ताल से कार्य शुरू होने में हो रहा है विलंब : जब इसके बारे में आहोर पंचायत समिति नरेगा शाखा और विकास अधिकारी कार्यालय से जानकारी ली गई तब सामने आया कि पिछले एक माह से नरेगा योजना के तहत संविदा पर लगे हुए कार्मिक हड़ताल पर जाने से नरेगा कार्यो के मस्टरोल जारी नहीं हो पा रहे हैं। इसी के साथ ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक भी हड़ताल पर रहने से ग्राम पंचायतों की ओर से नरेगा श्रमिकों की सूचिया नहीं भेजी गई थी। हालांकि ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ लिपिकों की हडताल १२ जून को समाप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों में नरेगा में कार्य करने के इच्छुक श्रमिकों के आवेदन के अनुसार उनकी सूची तैयार की जा रही हंै। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि कम्प्यूटर सिस्टम से ऑनलाईन जारी होने वाले मस्टरोल तकनीकी खामियों के चलते जारी नहीं हो पा रहे है। जिससे कार्य शुरू करने में विलंब होता जा रहा है।

जवाई नदी के ऑवरफ्फ्लों से हो जाती है बाढ़ की स्थिती : मालपूरा, उम्मेदपुर व पचानवां गांव के किसानों व ग्रामीणों की माने तो जब भी जवाई नदी ऊफान पर चलती है और पचानवा व जूना मालपूरा गांव के आस पास बाढ़ बचाव के लिए बनाई गई धोरापाळी तोडकर ओवरफ्लो का पानी गांवों में घुसता है तो जूना मालपूरा, उम्मेदपुर, पचानवा, अगवरी, गुड़ाबालोतान, गंगावा, दयालपुरा, मादडी, सनवाड़ा व आहोर तक पहुंचता है। जवाई नदी से बाढ़ के रूप में निकलने वाला पानी गांवों की स्थिती पर इतना प्रतिकूल असर नहीं करता जितना नदी के किनारों पर स्थित खेतों में नुकसान करता है। जवाई नदी के ऑवरफ्लों पानी के साथ साथ भारी मात्रा में बजरी बहकर आती है और ये बजरी जवाई नदी के किनारों पर आए हुए खेतों में फैल जाती है। जिससे आने वाले कई वर्षो तक फसल नहीं होती है।

पिछले साल जवाई के ओवरफ्लो होने पर उम्मेदपुर समेत कई गांवों तक पहुंचा था पानी

गुडाबालोतान. निकटवर्ती जूना मालपुरा व पचानवां गांव के पास पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हुई धोरापाळी, इसी रास्ते से गांवों तक पहुंचा था जवाई नदी का ऑवरफ्लो पानी।

पिछले वर्ष बारिश बंद होते ही धोरापाळी की मरम्मत करवाने की थी किसानों ने

पिछले साल बारिश के बंद होते ही मालपूरा पचानवा व उम्मेदपुर समेत जवाई नदी के पानी से प्रभावित होने वाले गांवों के जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने इस टूटी हुई धोरापाळी को तुरंत प्रभाव से ठीक करवानेे के लिए जिला प्रशासन से मांग की थी। जिसके बाद कलेक्टर ने स्थिति को विकट मानते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को तुरंत टूटी हुई धोरापाळी की मरम्मत व रखरखाव करवाने के निर्देश जारी कर दिए थे।

पंचायत समिति से नरेगा श्रमिक नहीं देने के कारण शुरू नहीं हो पाया कार्य

इधर जल संसाधन विभाग ने मनरेगा योजना के तहत पचानवां बाढ़ बचाव व पेंचिग वर्क के लिए १२ लाख ९१ हजार रूपयें का तकनीमा तैयार करके जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी को स्वीकृति के लिए भेजा। इसके बाद जिला परिषद की ओर १२ लाख ९१ हजार रूपये वित्तीस स्वीकृति जारी कर दी, लेकिन मौके पर अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जानकारी लेने पर आहोर पंचायत समिति व ग्राम पंचायत डोडीयाली की ओर से नरेगा श्रमिक उपलब्ध नहीं करवाए जाने के कारण कार्य शुरु नहीं होने की बात सामने आई है।

मस्टरोल जारी करवाकर जल्द ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा



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