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आबूरोड में अंतरराष्ट्रीय कॉइन प्रदर्शनी, देखी 80 देशों की पुरानी मुद्राएं

Abu Road News - ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर के डॉयमंड हॉल में अंतरराष्ट्रीय कॉइन प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:10 AM IST
आबूरोड में अंतरराष्ट्रीय कॉइन प्रदर्शनी, देखी 80 देशों की पुरानी मुद्राएं
ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर के डॉयमंड हॉल में अंतरराष्ट्रीय कॉइन प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें पुर्तकालीन, 18वीं सदी से लेकर वर्तमान भारतीय मुद्रा और 80 से अधिक देशों की मुद्रा को रखा गया। प्रदर्शनी में राजा-महाराजों के समय की मुद्रा, रानी विक्टोरिया से लेकर ईस्ट इंडिया कंपनी और महाराज खेंगर, कच्छ-भुज से लेकर एक पैसा, चार आना की मुद्रा देख लोगों ने खुशी जाहिर की। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। साथ ही भारतीय मुद्रा के इतिहास के बारे में जानकारी ली। प्रदर्शनी लगाने वाले पोरबंदर गुजरात के संजय टांग ने बताया कि पिछले 20 साल से भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी मुद्रा को संग्रहित कर रहे हैं। उनके कलेक्शन में 1832 में रानी विक्टोरिया के समय चलनी वाले कॉपर से बने सिक्के 1/12 आना, 1941 रानी विक्टोरिया के समय की मुहर, 1835 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनाए गए सिक्के 1/2, 1946 में ग्वालियर के महाराजा द्वारा चलाई गए सिक्के 1/4 आना से लेकर 1945 में निकाला गया एक पैसा, दो पैसा, तीन पैसा, पांच पैसा, दस पैसा, 20 पैसा, 50 पैसा आदि का कलेक्शन है।

गुजरात के संजय टांग ने ब्रह्माकुमारी संस्थान में लगाई प्रदर्शनी



, रानी विक्टोरिया से लेकर ईस्ट इंडिया कंपनी के सिक्के हुए शामिल

स्कूल-कॉलेज में लगाते हैं प्रदर्शनी

संजय ने बताया कि प्रदर्शनी लगाने के पीछे उनका मकसद विद्यार्थियों का भारत के साथ विदेशी मुद्रा का ज्ञान बढ़ाना है। साथ ही प्राचीन समय में किस धातु और किस तरह के सिक्के चलन में थे आदि की जानकारी और उसके इतिहास के बारे में लोगों को अवगत कराना है। ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं में ओल्ड करेंसी के बारे में पूछा जाता है। ऐसे में विद्यार्थी जब प्रैक्टिकल में मुद्रा देखते हैं तो याद करने में आसानी होती है और भारत का गौरवशाली इतिहास जानने को मिलता है।

12 साल की उम्र से किया सिक्कों का संग्रहण

संजय टांग ने बताया कि जब वह 12 साल के थे तभी से सिक्कों का संग्रहण कर रहे हैं। इन्हें बड़ी ही मशक्कत से बुजुर्ग लोगों से इक्कट्ठा किया है। धीरे-धीरे यह शौक जुनून बन गया। इसके साथ ही विश्वभर के 80 से अधिक देशों के सिक्के भी उनके कलेक्शन में हैं। इनमें ईस्ट अफ्रीका की करेंसी भी है जो अब देश नहीं रहा है। संजय के मुताबिक कुवैत की करेंसी दीनार का वर्ल्ड में सबसे रेट हाईएस्ट है। भारत के 220 रुपए और वहां का एक रुपए। वर्तमान में वह सऊदी अरब में एक रिफाइनरी में नौकरी कर रहे है। प्रदर्शनी देखने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका रतनमोहिनी दादी, ईशु दादी, ऊषा दीदी, भरत भाई, भानुभाई समेत शहरवासी पहुंचे।

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