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शहरवासियों ने धुलंडी पर सूखी होली खेलकर दिया पानी बचाने का संदेश

भास्कर न्यूज | सिरोही (ग्रामीण) रंगों का त्योहार होली पर्व जिलेभर में परंपरागत तरीके से हर्षोल्लास के साथ मनाया...

Danik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:10 AM IST
भास्कर न्यूज | सिरोही (ग्रामीण)

रंगों का त्योहार होली पर्व जिलेभर में परंपरागत तरीके से हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिले में गुरुवार शाम को शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। इसके बाद ढूंढ़ोत्सव कार्यक्रम हुआ। इसके साथ ही शुक्रवार को धुलंडी पर्व मनाया। युवाओं ने परस्पर गुलाल डालकर सुखी होली खेली। वहीं जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में होली के दूसरे दिन शनिवार को धुलंडी पर्व मनाया। जिला मुख्यालय पर शहर के रामझरोखा, सरजावाव दरवाजा, कृष्णापुरी, नया वास, सम्पूर्णानंद कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, भाटकड़ा, वाघेला लाइन, छीपाओली, कुम्हारवाड़ा, ब्रहमपुरी, शांतिनगर समेत कई मोहल्लों में होलिका दहन किया गया।

दांतराई| दांतराई सहित आस पास के गांवों में होली व धुलंडी पर्व मनाया। कस्बे में पंडित कांतिलाल त्रिवेदी के मंत्रोच्चार के साथ होलिका दहन किया गया। गेरियों ने बच्चों को ढूंढने की रस्म अदा की। शाम को आम चौराहे पर ढोल ढमाकों के साथ गेर नृत्य का आयोजन किया गया।

जावाल| कस्बे समेत आसपास के गांवों में होली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कस्बे में गेर नृत्य का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं ने गेर नृत्य किया। वहीं क्षत्रिय घांची युवा मण्डल के तत्वावधान में धर्मशाला से शुरुआत कर गांव के विभिन्न मार्गो होते से हुए युवाओं ने नृत्य किया।

सिरोही. होलिका दहन पर गेहूं की बालियां सेकने की परंपरा का निर्वहन किया गया।

होली के साथ जमा गेर नृत्य का रंग

रोहिड़ा. कस्बे समेत वासा, माण्डवाड़ा देव, सनवाड़ा आर, वाटेरा, भीमाना, भारजा, वालोरिया व भूला में ग्रामीणों ने होली पर्व हर्षोल्लास से मनाया। शुभ मुहुर्त पर होलिका दहन किया गया। धुलंडी के दिन ग्रामीणों ने अबीर व गुलाल से होली खेली। दैनिक भास्कर की मुहिम के साथ जुड़ कर सुखी होली खेल कर पानी बचाने का संदेश दिया। वहीं कस्बे में ढोल ढमाकों की धुन पर गेर नृत्य किया। यहां पर सात दिन तक प्रतिदिन गेर नृत्य खेला जाएगा।

गुलाल व अबीर लगाकर दी शुभकामनाएं

आबूरोड| शहर के रोडवेज बस स्टैंड स्थित अंबाजी मंदिर, विष्णु धर्मशाला के समीप, जूनीखराड़ी, मानपुर, गांधीनगर, सातपुर व आबकारी सहित विभिन्न स्थानों पर भद्रा समाप्ति के बाद पूजा अर्चना के बाद होलिका दहन किया गया। लोगों ने नए धान को सेका एवं परिजनों की खुशहाली की कामना की। धुलंडी पर लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं दी और रंगों से होली खेलने का सिलसिला शुरु हुआ। गले मिलकर बधाइयां देते नजर आए। शाम को केसरगंज क्षेत्र स्थित रामझरोखा मंदिर परिसर में वार्षिक मेले का आयोजन हुआ। इसमें लगाए गए विभिन्न प्रकार के झूले एवं मिक्की माउस बच्चों के आकर्षण का केन्द्र बने रहे। सदर बाजार एवं पारसीचाल सहित बाजार क्षेत्रों में सवेरे से ही ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों की भीड़भाड़ बनी रही।

सद्भावना और ज्ञान के रंग में रंगने का पर्व है होली: दादी जानकी

आबूरोड. शहर के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शांतिवन परिसर में होली पर शाम को स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान विशेष योग तपस्या भट्टी का कार्यक्रम भी रखा गया। मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने कहा कि होली सद्भावना और ज्ञान के रंग में रंगने का पर्व है। होली अर्थात् पवित्रता- हमारे मन के विचार शुद्ध हो, मुख के बोल मीठे हों, कर्मों में श्रेष्ठता हो, धन में ईमानदारी और सर्व के प्रति बांटने की इच्छा हो तो हमारे संस्कार भी पवित्र होंगे। होली अर्थात् हो लिया (बीत गया) बीती हुई बात का भी चिंतन नहीं करें। किसी ने कुछ कहा, अभद्र व्यवहार किया, कुछ नुकसान हो गया उसको सदा के लिए भुला दें। होली माना खेल- यह संसार एक नाटक शाला है। हम सब खेल खेलने वाले पात्र हैं। सभी को ज्ञान गुणों का रंग लगाएं। यही सच्ची होली है। सुबह संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका रतनमोहिनी दादी ने कॉन्फेंस हॉल में भाई-बहनों पर गुलाब जल छिड़ककर होली की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर ईशु दादी, संस्था की जनरल मैनेजर मुन्नी बहिन आदि उपस्थित रहे।

होलिका दहन के बाद किया गेर नृत्य

मंडार. कस्बे के मुख्य बस स्टैंड, तीन बत्ती चौराहा एवं लीलाधारी महादेव मंदिर पर होलिका दहन किया गया। तीन बत्ती चौराहा पर सामूहिक रूप से ग्रामीणों की ओर से होलिका दहन के बाद गेर नृत्य किया गया। कस्बे में युवाओं की टोली अबीर गुलाल के साथ होली मनाने का आनंद उठाते रहे। मंडार, पीथापुरा, सोनेला, मगरीवाड़ा, बांट, मोरवड़ा, भटाना, पादर, मालीपुरा, सुलिवा, सोरड़ा सहित आसपास के सभी गांवों में होली पर्व मनाया गया।

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