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गांवों में शुद्ध पानी के लिए लगाए आरओ प्लांट बदहाल, कई जगहों पर गंदगी से घिरे

आबूरोड तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए आरओ प्लांटों की व्यवस्था के लिए कोई प्रबंध नहीं है। हालत यह है कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 01, 2018, 02:00 AM IST

गांवों में शुद्ध पानी के लिए लगाए आरओ प्लांट बदहाल, कई जगहों पर गंदगी से घिरे
आबूरोड तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए आरओ प्लांटों की व्यवस्था के लिए कोई प्रबंध नहीं है। हालत यह है कि प्लांट के आसपास साफ-सफाई नहीं हो रही है। कई स्थानों पर आसपास में कीचड़ व गंदगी पसरी हुई है। इससे पानी के प्रदूषित होने का अंदेशा बना है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार आबूरोड के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी में फ्लोराइड एवं टीडीएस की मात्रा की अधिकता से आमजन को हो रही परेशानियों के स्थाई समाधान के लिए जलदाय विभाग की ओर से चंद्रावती, मावल, सुरपगला, खड़ात, सातपुर, तरतोली, मोरथला, पांडुरी, आमथला एवं किवरली आदि गांवों में आरओ प्लांट लगाए गए थे। विभाग की ओर से इन स्थानों पर चार रुपए में बीस लीटर आरओ को शुद्ध पानी मुहैया कराने का दावा किया गया था।, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। कई जगहों पर यह आरओ लोगों के कोई काम नहीं आ रहे। ग्रामीणों का कहना है कि गत हफ्ते चंद्रावती का प्लांट बंद हो गया था। जलदाय विभाग के अधिकारियों को कई बार बताने के बाद इसे दुरुस्त करवाया गया। इस दौरान लोगों को पानी के लिए खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

गोलिया गांव में करीब दो महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका है आरओ प्लांट

आबूरोड. ग्रामीण क्षेत्र में आरओ प्लांट के बाहर की गंदगी के ढेर लगे है।

गोलियां समेत 22 गांवों में नहीं हुआ शुरु

योजना के तहत गोलिया गांव समेत ग्रामीण क्षेत्रों में 22 आरओ प्लांट ओर स्थापित किए जाने है। इसके बाद भी चयनित स्थानों पर लोगों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीण आज भी पहले की तरह ही हैंडपंपों या परंपरागत पेयजल स्रोतों के पानी पर निर्भर है। जहां यह सुविधा स्थापित है वहां की व्यवस्था प्राइवेट फर्म के जिम्मे है। मॉनिटरिंग के अभाव में कार्य सुचारु नहीं हो पा रहा है।

मार्च में आए थे आरओ प्लांट पानी के सैंपल

जलदाय विभाग एवं संबंधित फर्म की ओर से मार्च 2018 में कुछ आरओ प्लांट के पानी के सैम्पल जांच के लिए आए थे। उसकी रिपोर्ट विभाग को भिजवा दी गई थी। वैसे जब हम कहीं जाते है और वहां प्लांट चालू होता है तो सैम्पल ले लेते है। पानी की शुद्धता को बनाए रखने के लिए प्लांट के पास गंदगी नहीं जमा होनी चाहिए, इसके प्रबंध करने चाहिए। -चितरंजन खंडेलवाल, जल विश्लेषक, जलदाय विभाग, प्रयोगशाला, आबूरोड

फर्म के काम नहीं करने से हो रही दिक्कत

जहां प्लांट स्थापित हो गए एवं शुरु नहीं हो पाए है तथा जिन भी स्थानों पर आधे-अधूरे काम पड़े है। उसका मुख्य कारण संबंधित फर्म द्वारा कार्य का नहीं करना है। चंद्रावती में मोटर खराब होने से दो दिन आपूर्ति बाधित हुई थी। जानकारी मिलने पर कर्मचारी को भेजकर इसे दुरुस्त करवा दिया गया था। साफ-सफाई को लेकर भी परेशानी है। ग्राम पंचायतों का सहयोग लेकर यह काम करवाएंगे। -हेमंत कुमार, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, आबूरोड

टूट गए हैं अपशिष्ट पानी के टैंक

सातपुर व तरतोली गांवों में आरओ प्लांट से शुद्ध पानी के बाद निकलने वाले अपशिष्ट पानी के लिए बनाए गए टैंक निर्माण के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गए थे। जो आज भी उसी हालत में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि तरतोली में पानी बहुत कम दबाव से आ रहा है। जबकि, सातपुर में सलमान पठान के अनुसार टेंक क्षतिग्रस्त होने से हमेशा दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। यहां खेलने वाले बच्चों को बार-बार हटाते रहते है। इस संबंध में कई बार जलदाय विभाग को भी बताया गया। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट के पास इतना कीचड़ है कि यहां दिनभर बदबू बनी रहती है तथा मच्छर मंडराते रहते है।

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