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वशिष्ठ आश्रम में 50 लाख से करवाए थे विकास कार्य, बारिश में टूटा पुल, अब जाना भी मुश्किल

समीपवर्ती चण्डेला गांव के अम्बाबेरी स्थित जिस वशिष्ठधाम एवं बगेरी बांध को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 04, 2018, 02:00 AM IST

वशिष्ठ आश्रम में 50 लाख से करवाए थे विकास कार्य, बारिश में टूटा पुल, अब जाना भी मुश्किल
समीपवर्ती चण्डेला गांव के अम्बाबेरी स्थित जिस वशिष्ठधाम एवं बगेरी बांध को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने 50 लाख रुपए के कार्य करवाए वे सभी ना केवल टूट चुके हैं बल्कि यहां बनाया गया एक छोटा पुल भी बारिश में बह गया और अब यहां जाना भी मुश्किल हो गया है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में आश्रम के प्रवेश द्वार से बांध के ओवरफ्लो नाले तक इंटरलोकिंग टाइल्सें लगाकर दो टॉयलेट, वाहनों के पार्किंग के लिए एक टीन शेड तैयार करवाया गया था। बारिश के दौरान बांध के ओवरफ्लो पर एक पुलिए का निर्माण भी इसी योजना में करवाया गया था। करीब पचास लाख रुपए के खर्च से करवाए गए इन कामों की मोनीटरिंग नही की जा सकी। नतीजा यह निकला कि काम पूरा होने के कुछ समय बाद से ही इंटरलोकिंग टाइल्सें उखड़ने लग गई तथा टॉयलेट में दरारें आ गई थी। पीछे की ओर बने सेफ्टी टेंक भी उस दौरान धंस गए थे। गांव के लोगों ने इन्हे वापस ठीक करवाने के लिए गांव में आने वाले हरेक अधिकारी से आग्रह किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

कार्य पूरा होने के कुछ समय बाद ही इंटरलोकिंग टाइल्सें उखड़ने के साथ ही टॉयलेट में भी आ गई दरारें

आबूरोड. बारिश के दौरान टूटे पुल को ठीक नहीं किए जाने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। फोटो|भास्कर

पहली ही बारिश में टूटा पुलिया

योजना में जो पुलिया बनाया गया था साल 2015 में बारिश के दौरान पूरी तरह से टूट गया था। आज तक इसकी रिपेयरिंग करवाने की जरुरत तक नही समझी गई है। पुलिया के अवशेष उसी तरह से बिखरे पड़े हैं। बारिश के मौसम में लोगों के लिए बांध पर जाना बंद हो जाता है। बांध के इस ओवरफ्लो का बहाव इतना तेज होता है कि दोनों ओर से भूमि का कटाव हो रहा है जो लगातार बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि सेफ्टीवॉल कुछ ही हिस्से में बनी हुई है बाकी आज भी इसी प्रकार से है।

मुआवजा भी नही मिला

वशिष्ठधाम, आम्बाबेरी के महंत भक्त वत्सलशरण महाराज ने बताया कि प्रशासन गांवों के संग अभियान, राजस्व अभियान न्याय आपके द्वार एवं उपखण्ड अधिकारी सहित कई बार अधिकारियेां को इस समस्या के बारे में बताया गया तथा इनका समाधान करवाने की मांग की गई थी। इसके बाद भी आज तक ध्यान नही दिया गया है। पंचायत समिति सदस्य लकमाराम गरासिया का कहना है कि इस मुददे को पंचायत की सामान्य बैठक में भी उठाया गया था। सिवाय आश्वासन के कुछ नही हुआ। ग्रामीणों के अनुसार बांध एवं ओवरफ्लो निर्माण के दौरान आसपास के काश्तकारों की काफी जमीन अधिगृहित की गई थी। उनका आज तक मुआवजा नही मिल रहा है। कोई संतोषप्रद जवाब नही मिलने से थक हारकर निराश हो चुके हैं।

मनरेगा में सेफ्टीवॉल बनवाने का प्रस्ताव लिया है

मनरेगा में सेफ्टीवॉल बनाने का प्रस्ताव लिया हुआ है। स्वीकृति मिलने के बाद ही कुछ करवाया जा सकता है। इसके बाद बांध की सेफ्टी से संबंधित कोई बजट आएगा तो उसमें भी यह काम करवाने की कोशिश करेंगे। -ललितमोहन दाधीच, एईएन, सिंचाई विभाग, आबूरोड

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