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पानी पूरी खाने से हुई फूड पॉइजनिंग, अब तक 67 मरीज अस्पताल पहुंचे, दुकानदार गिरफ्तार

भास्कर न्यूज | सिरोही/आबूरोड/रेवदर रेवदर के निकट फूड प्वाइजनिंग से बीमार होने वाले लोगों की संख्या 67 पहुंच गई।...

Danik Bhaskar | May 21, 2018, 02:10 AM IST
भास्कर न्यूज | सिरोही/आबूरोड/रेवदर

रेवदर के निकट फूड प्वाइजनिंग से बीमार होने वाले लोगों की संख्या 67 पहुंच गई। शनिवार देर रात को आबूरोड में इन मरीजों का आना शुरू हुआ था। थोड़ी ही देर में वहां करीब 50 मरीजों को लाया गया। इनमें से अधिकांश मरीजों को रात को ही घर भेज दिया गया था, लेकिन रविवार सवेरे वापस उनकी तबीयत बिगड़ने पर 51 मरीजों को रेवदर और 16 को आबूरोड लाया गया। शाम को 16 मरीजों को रेवदर से सिरोही जिला अस्पताल लाया गया। इस बीच रविवार को कलेक्टर बाबूलाल मीणा, एडीएम आशाराम डूडी, एसडीएम, शैलेंद्रसिंह, रेवदर पुलिस उपअधीक्षक देवाराम, थानाधिकारी दिलीप कुमार समेत अन्य अधिकारी पालड़ी गांव पहुंचे। जहां इन सभी ने मामले की जानकारी ली। इसके बाद पाली से फूड इंस्पेक्टर दिलीपसिंह भी यहां पहुंचे और पानी पुरी की दुकान से खाद्य सामग्री के सैंपल लिए। दुकान को अभी सील कर दिया गया है। जबकि पुलिस ने इसके संचालक रमणलाल भील को गिरफ्तार कर लिया है। कलेक्टर बाबूलाल मीणा आबूरोड के अस्पताल भी गए और वहां भर्ती मरीजों से जानकारी ली। जहां एक मरीज गोपाल पुत्र लखमा कोली ने बताया कि गांव में स्थायी रूप से संचालित दुकान पर पानी पुरी खाई थी। जिसके बाद तबीय खराब हुई। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में सर्वे भी शुरू किया है। ताकि सभी की जांच हो सके। रात में कलेक्टर जिला अस्पताल पहुंचे व मरीजों की कुशलक्षेम जानी।

खाद्य निरीक्षक ने लिए पानी पुरी बनाने की खाद्य सामग्री के सैंपल

फूड पॉइजनिंग के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों के हाल जानने पहुंचे कलेक्टर।

अस्पताल पहुंचे कलेक्टर ने कहा, मरीज जमीन पर क्यों

सामान्य दिनों में भी मरीजों के लिए छोटा पड़ने वाला आबूरोड का अस्पताल फूड प्वाइजनिंग के एक साथ इतने मरीज आने पर छोटा पड़ गया। इस स्थिति में कई मरीजों को जमीन पर ही लिटाकर इलाज करना पड़ा। इस दौरान यहां मरीजों से मिलने आए कलेक्टर बाबूलाल मीणा ने भी पूछा कि मरीज जमीन पर क्यों लिटाएं गए। जिस पर अस्पताल प्रभारी ने बिस्तर कम होने की समस्या बताई। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल के बाहर व पीछे फैली गंदगी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सबसे अधिक जोर सफाई का ही होना चाहिए। इसके बावजूद यहां गंदगी क्यों हैं। उन्होंने इसे सही करने और तीन दिन में वापस निरीक्षण करने की बात कही।

सैंपल लेकर दुकान सीज की

पाली से यहां पहुंचे फूड इंस्पेक्टर दिलीपसिंह ने दुकान की जांच की। यहां एक मटके में पानी पुरी के लिए मसाला तैयार रखा हुआ था। वह सूखा हुआ पाया गया। इस पर उसमें कुछ पानी डालर सैंपल लिया गया। हालांकि, पानी पूरी का आलू, प्याज व अन्य सामग्री वहां नहीं मिली। तैयार पुरियों का भी सैंपल लिया गया है। इसके बाद दुकान को सीज कर दिया गया। साथ ही गांव में पेयजल आपूर्ति स्रोत को भी देखा गया। सामने आया कि यहां बोरिंग से सीधे घरों में पानी सप्लाई होती है।

दुकान स्थायी, आसपास के लोग आते हैं नाश्ता करने

जिस दुकान पर इन सभी मरीजों ने पानी पुरी खाई। वह मैन चौराहे पर लंबे समय से स्थायी रुप से संचालित है। इस जगह आसपास के गांवों से आने वाले रास्ते मिलते हैं। ऐसे में यहां अक्सर भीड़ रहती है। यही कारण रहा कि एक ही दिन इस दुकान पर इतने लोगों ने पानी पुरी खाई और सभी बीमार हुए। ऐसे में संभवत खाद्य सामग्री में या पानी में कोई दूषित सामग्री या पानी शामिल था।

7 साल में दूसरी घटना

जिले में फूड पॉइजनिंग की यह सात साल में दूसरी सबसे बड़ी घटना है। इससे पूर्व 13 मई 2011 को गोयली गांव में एक वैवाहिक कार्यक्रम में भोजन के बाद लोगों की तबियत खराब हो गई थी। उस समय 102 लोगों को सिरोही के जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

तीन दिन तक रहेगा असर

आबूरोड चिकित्सालय प्रभारी डॉ. एमएल हिंडोनिया, डॉ. जगदीश एवं डॉ. गौरव मेवाड़ा की टीम ने मरीजों की जांच की। इन डॉक्टर्स ने बताया कि ऐसा अमूमन दूषित पानी या दूषित भोजन से होता है। सभी लोगों को पेट दर्द, उल्टी जैसी शिकायत है। इसका असर सामान्य रुप से तीन दिन तक रहता है। डॉक्टर्स ने बताया कि मरीजों को चाहिए कि वे पूरा इलाज लें और यदि इसके बाद भी शिकायत रहती है तो चैकअप करवाएं।