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जलापूर्ति स्रोतों के पास पसरी गंदगी, 8 साल पहले दूषित पानी से फैली बीमारी से भी जलदाय विभाग ने नहीं लिया सबक

शहर में जलापूर्ति स्रोतों के आसपास पसरी गंदगी के कारण पानी दूषित होने का खतरा बना हुआ है। आठ साल पहले आबूरोड में...

Dainik Bhaskar

May 22, 2018, 02:10 AM IST
जलापूर्ति स्रोतों के पास पसरी गंदगी, 8 साल पहले दूषित पानी 
 से फैली बीमारी से भी जलदाय विभाग ने नहीं लिया सबक
शहर में जलापूर्ति स्रोतों के आसपास पसरी गंदगी के कारण पानी दूषित होने का खतरा बना हुआ है। आठ साल पहले आबूरोड में दूषित पानी से डायरिया फैलने की घटना से भी जलदाय विभाग सबक नहीं ले रहा है। नदी किनारे स्थित कुएं में देशी शराब के पाउच और खाली बोतलें गिरी हुई है। कुएं के आसपास भी यही स्थिति है। इससे थोड़ी दूर जूनीखराड़ी कुएं के पास भी नगरपालिका सफाई कर्मचारी कचरा डाल रहे हैं, जिससे बदबू फैल रही है। आनंदेश्वर महादेव मंदिर की टंकी का ऊपरी हिस्सा लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। जिससे इसमें गंदगी गिरती रहती है। इसको ढकने के लिए तिरपाल लगाया है जो नाकाफी साबित हो रहा है। आकराभट्टा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का कुआं खुला है तथा इसके पास भी कचरा डाला जा रहा है। इन्हीं जलस्रोतों से लुनियापुरा, जूनीखराड़ी, सब्जी मंडी व दरबार स्कूल मार्ग, आकराभट्टा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सदर बाजार, पारसीचाल, अंबाजी चौराहा मार्ग, पत्थर गली, आजाद मैदान, सिंधी कॉलोनी, गुरुनानक कॉलोनी सहित बाजार आदि क्षेत्रों में जलापूर्ति की जा रही है। आकराभट्टा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कुएं की मुंडेर खुली होने से इसमें दो जानवर गिर गए थे। बदबू के कारण उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका था। आज भी ये कुआं खुला पड़ा है। लोगों द्वारा बार-बार प्रशासन को शिकायत के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकल रहा।

मई 2010 में फैला था डायरिया, फिर भी जिम्मेदार बेपरवाह : मई 2010 में शहर के जूनीखराड़ी क्षेत्र के कुएं का पानी प्रदूषित हो गया था। इससे उस दौरान चौदह सौ लोगों को कॉलेरा रोग हो गया था तथा तीन लोगों की मौत हो गई थी। जोधपुर संभाग से विभिन्न स्थानों से टीमों को बुलवाया गया था तथा इस पर काबू पाने में करीब एक हफ्ते का समय लगा था। प्रशासन द्वारा हालत बिगड़ने के लिए जलदाय विभाग के तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता को दोषी मानते हुए एपीओ कर दिया गया था। जांच में कुएं में गंदगी को इस स्थिति के लिए मुख्य कारण माना गया था। उसके बाद से इस कुएं को जाली से ढकवाया गया था।

आनंदेश्वर महादेव मंदिर के समीप बनी टंकी का ऊपर का हिस्सा लंबे समय से क्षतिग्रस्त, अंदर गिरता है कचरा

आबूरोड. पेयजल टंकी का ढक्कन टूटा होने से पानी दूषित हो रहा है।

महीनेभर पहले पुलिस को से मांगा गया था सहयोग

जलदाय विभाग के सहायक अभियंता हेमंत कुमार की ओर से गत अप्रेल माह में आबूरोड शहर पुलिस थानाधिकारी को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र में बताया गया है कि नदी किनारे स्थित जलापूर्ति कुएं के आसपास दिनभर असामाजिक तत्व बैठे रहते हैं। ये लोग शराब का सेवन करने के बाद खाली बोतलें, पाउच एवं अन्य सामग्री यहीं फेंक देते हैं। इससे पानी के प्रदूषित होने का खतरा मंडरा रहा है। इन लोगों से जब भी विभागीय कर्मचारी आसपास में गंदगी नहीं फैलाने का आग्रह करते हैं तो वे उलझ पड़ते है। पत्र में पुलिस से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करवाने की मांग की गई थी। करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी आज तक हालत पहले की तरह बने हैं।

साल में दो बार करनी होती है सफाई, एक साल से नहीं हुई

आनंदेश्वर महादेव मंदिर के पास बनी टंकी की स्थिति बेहद खराब है। टंकी जीर्णशीर्ण हालत में है तो इसकी सफाई भी अंतिम बार जनवरी 2017 में हुई थी। लंबी समयावधि बीतने के बाद भी दुबारा सफाई नहीं हुई है। जबकि, छह महीने में एक बार पुरी तरह से सफाई करवाकर कीटाणुनाशक दवाई डालने का नियम बना हुआ है।

करवाएंगे सभी समुचित प्रबंध


गर्मियों में पानी दूषित होने रहता है खतरा


जलस्रोतों में करते हैं क्लोरिन का छिड़काव


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 से फैली बीमारी से भी जलदाय विभाग ने नहीं लिया सबक
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