शिविर में आध्यात्मिक शिक्षा के साथ बताई व्यवहारिक ज्ञान की आवश्यकता

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:21 AM IST

Abu Road News - हिल स्टेशन माउंटआबू में रघुनाथ मंदिर धर्मशाला में आयोजित जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान ध्यान संस्कार शिविर के...

Mount abu News - rajasthan news need for practical knowledge in the camp with spiritual education
हिल स्टेशन माउंटआबू में रघुनाथ मंदिर धर्मशाला में आयोजित जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान ध्यान संस्कार शिविर के पांचवे दिन आचार्य सम्राट जयमल का स्मृति दिवस तप-त्याग के साथ मनाया गया। इस दौरान आचार्य प्रवर पार्शवचंद्र महाराज व डॉ. पदमचंद महाराज का कहना था कि संसार में जीने के लिए सभी जीते है, पर जिनको जीवन जीना आ गया है उनका ही जीवन सार्थक है। औपचारिक शिक्षा एवं कितनी भी डिग्रियां क्यों न प्राप्त कर ली गई हो, इसका केवल यह मतलब है कि इससे सभ्य एवं पढ़े लिखे कहलाने का अधिकार प्राप्त हो गया है। यह काफी नहीं है। इतने से ही सब कुछ नहीं हो सकता है। वर्तमान जीवन शैली को देखते हुए लगता है कि अभी बहुत कुछ आधा-अधूरा है।

जीवनशैली में बदलाव के लिए किया प्रेरित : शिविर में शिविरार्थियों को यहां से सीखी बातों को व्यवहार व आचरण में उपयोग में लेने व जीवन शैली में बदलाव के साथ ही ऐसा कार्य नहीं करने को प्रेरित किया, जिससे दूसरे को पीड़ा हो। इसका उदाहरण देकर भी समझाया गया कि कोई व्यक्ति बाइक या कार लेकर अपने रिश्तेदारों के यहां जाते है, तो उसे यथास्थान पार्क न करके इधर उधर कर देते हैं। इससे दूसरे परेशान होते रहते है। ऐसा नहीं करके सबको सहयोगी बनना चाहिए। जयमल महाराज के जीवन के बारे में बताया गया। मुल्तानमल मेहता ने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन संजय पींचा ने किया। आलिशा बाफना ने जानकारी दी।

शिक्षित होने के बाद जिम्मेदारियां बढ़ जाती है

शिविर में संतों ने बताया कि किताबी एवं खिताबी ज्ञान बहुत मिल गया। खिताब भी कई जीत लिए पर ज्ञान व्यवहार और आचरण में नहीं उतरा। जब हम सड़क से गुजरते है तो अपने आसपास जगह-जगह कचरा पड़ा हुआ मिल जाता है। चाहे शहर हो या गांव जब भी सड़क पर से गुजरे कहीं पर भी प्लास्टिक एवं शराब की टूटी-फूटी बोतलें पड़ी मिले तो इसे वहां से हटाकर सुरक्षित स्थान पर डाल दें, ताकि किसी को इनसे नुकसान नहीं हो सके।

पर्यावरण को संतुलित के लिए सभी की भागीदारी जरुरी

संतों ने बताया कि न जाने क्यों वस्तुएं उपयोग में आने के बाद उन्हें बेरहमी से इधर उधर फेंक देते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा नित नई बीमारियां उत्पन्न होती है। ऐसी सामग्री कई बार जानमाल के हादसों का भी कारण बन जाती है। कोई तीखाकार या नुकीला हिस्सा बाइक के पहिये में लगने से तेज चलती हुई बाइक पंचर हो जाती है तथा उस दौरान हादसों का भी अंदेशा बना रहता है। आवासीय क्षेत्रों में घरों के बाहर कचरे से मच्छर मंडराते रहते है। अपशिष्ट खाद्य सामग्री प्लास्टिक में डालने से अक्सर गाय इसे खा जाती है तथा कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाती है।

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