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अजीतगढ़ प्राचीन किले की जांच के लिए आईजी कार्यालय से डीएसपी ने किया मौका निरीक्षण

कस्बे के प्राचीन किले पर अवैध कब्जे की शिकायत को लेकर जयपुर रेंज के आईजी कार्यालय में परिवाद दायर करने के बाद...

Danik Bhaskar | Jun 27, 2018, 02:10 AM IST
कस्बे के प्राचीन किले पर अवैध कब्जे की शिकायत को लेकर जयपुर रेंज के आईजी कार्यालय में परिवाद दायर करने के बाद मंगलवार को जांच अधिकारी डीएसपी हवासिंह ने दोनों पक्षों के बयान लिए एवं किले का मौका मुआयना किया।

प्राचीन किले में कई दशकों से थोई थाना अन्तर्गत पुलिस चौकी संचालित होती थी, लेकिन वर्ष 1993 में अजीतगढ़ में पुलिस थाना खुलने के बाद कस्बा चौकी अजीतगढ़ के अधीन हो गई। वर्ष 2005 तक अजीतगढ़ किले में पुलिस चौकी स्टाफ का आवागमन हुआ। इसके बाद स्टाफ की कमी और नीमकाथाना रोड स्थित नए भवन में थाना स्थानांतरित होने के बाद किले पर पुलिस का ताला लगा दिया गया। कई बार असामाजिक तत्वों ने किले के मुख्यद्वार के किवाड़ों में आग लगा दी। किवाड़ नहीं होने के चलते किले के अंदर एवं बाहर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने लगा। वर्ष 2007 में गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले किले के तोरणद्वार स्थित गणेश प्रतिमा को खंडित कर दी गई। वर्ष 2009 में कथित साधु ने नवरात्रों के दौरान पूजा की। पूजा के आड़ में खुदाई करने लगा, पुलिस ने इस साधु को बाहर निकाल कर किले पर दोबारा से ताला लगा दिया। लेकिन इसके बाद से असामाजिक तत्वों ने किले के किवाड़ तोड़ पर चमकादड़ों की बिट के बहाने खुदाई की शिकायत पर थाना प्रभारी हिम्मत सिंह ने मौका मुआवना कर ग्रामीणों के सहयोग से लोहे के नए किवाड़ लगा कर ताला लगा दिया। समाज विशेष के लोगों ने किले पर अवैध कब्जे की शिकायत सोशल मीडिया एवं जयपुर रेंज आईजी से की। मंगलवार को जांच अधिकारी डीएसपी हवा सिंह ने परिवादी पक्ष एवं ग्रामीणों के बयान दर्ज किए तथा किले का मौका मुआवना किया। परिवादी पक्ष से श्रवण सिंह महरोली, कर्मवीर सिंह, दिलीप सिंह आसपुरा आदि तथा पूर्व सरपंच जगदीश चौधरी, कृषि वैज्ञानिक जगदीश पारीक, पवन टांक, अविनाश सेठी, जेपी जाट, लखन पारीक, राकेश खंडेलवाल, सत्यनारायण गिराठी, हेमंत पारीक आदि मौजूद थे।