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सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए दूध की योजना, पेयजल व्यवस्था की ओर विभाग का ध्यान नहीं

Ajitgarh News - अजीतगढ़ क्षेत्र में बच्चों को हो रही परेशानी भास्कर न्यूज | अजीतगढ़ सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए...

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2018, 02:10 AM IST
सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए दूध की योजना, पेयजल व्यवस्था की ओर विभाग का ध्यान नहीं
अजीतगढ़ क्षेत्र में बच्चों को हो रही परेशानी

भास्कर न्यूज | अजीतगढ़

सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर करोड़ों रुपए का बजट लगा रही है। हाल ही सरकार ने बच्चों के लिए दूध योजना शुरू की, लेकिन लंबे समय से स्कूलों में पेयजल समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चे पेयजल के लिए भयंकर समस्या से जूझ रहे है।

स्थानीय राआउमावि में गत करीबन 10 साल से ट्यूबवेल नकारा हो गया। राजकीय उप्रावि केरली ढाणी (अजीतगढ़) में जलस्तर गिरने से 2007-08 में हैंडपम्प नकारा हो गया, जहां पर वर्तमान में भामाशाह पेयजल व्यवस्था कर रहा है। राउप्रावि गंगासागर ढाणी (जुगराजपुरा) में वर्ष 2005-06 में हैंडपम्प नकारा हो गया, राप्रावि नाडी का बाढ़ में 10 साल से हैंडपम्प नकारा पड़ा है। राआउमावि कुसुमपुरा के प्राथमिक स्कूल में हैंडपम्प नकारा हो गया। राबाउमावि अजीतगढ़ में ट्यूबवेल व राउप्रावि बागवाली में हैंडपम्प खराब है। राउप्रा संस्कृत स्कूल में पेयजल संकट हैं। जुगराजपुरा पंचायत में ढाणी कुशावाली (मानगढ़) के राजकीय उत्कृष्ट उप्रावि में तीन ट्यूबवेल लगे थे लेकिन भूजल स्तर घटने से तीनों नकारा पड़े है।

यह आ रही है समस्या

सरकारी स्कूलों में पेयजल व्यवस्था के अभाव के कारण नामांकन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के पेयजल के साथ ही पोषाहार बनाने, सरकार के पौधारोपण समेत अनेक कार्य बाधित हो रहे है। स्कूल प्रशासन को पेयजल के लिए पृथक से कोई बजट नहीं होने के कारण भामाशाह एवं समाजसेवियों के सहयोग से बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

राआउमावि में ट्यूबवेल नहीं

राआउमावि अजीतगढ़ में करीब 10 साल पूर्व भूजल घटने से ट्यूबवेल नकारा हो गया। करीब 900 बच्चों वाले इस स्कूल में पेयजल के लिए दो नल कनेक्शन ले रखे है, जिनमें पानी आपूर्ति कम होने से पेयजल एवं पोषाहार आदि के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। गत सालों में क्षेत्रीय विधायक झाबर सिंह खर्रा ने एक ट्यूबवेल की घोषणा की लेकिन जलदाय विभाग ने इस फाइल को भूजल वैज्ञानिक की रिपोर्ट की टिप्पणी लगाकर बंद कर दी। वर्ष 2015-16 में स्कूल ने 9400 रुपए पानी के लिए टैंकर पर खर्च किए गए। वर्ष 2016-17 में भामाशाह द्वारा पेयजल व्यवस्था की गई, वर्ष 2017-18 में 17 हजार 400 रुपए टैंकरों से पानी मंगवाने में खर्च हुए।

डार्कजोन में फैक्ट्री कर रही जलदोहन

अजीतगढ़ क्षेत्र में पूर्वी दिशा की ओर भू-गर्भ में जल स्रोत मौजूद थे। वर्ष 2005 में अजीतगढ़ रीको यहीं डवल्प हुआ। इसमें 2005 से जल आधारित एग्रीबायोटेक फैक्ट्री लगी, जिसको तीन ट्यूबवेलों से दो साल के लिए निर्धारित जलदोहन की अनुमति दी गई। वर्ष 2006 में केन्द्रीय भूजल बोर्ड द्वारा श्रीमाधोपुर उपखंड को डार्कजोन घोषित कर दिया गया। उक्त फैक्ट्री ने 2007 के बाद बगैर अनुमति के ही 11 ट्यूबवेल अवैध तरीके से खोद कर अंधाधुंध जलदोहन किया। इसके चलते अजीतगढ़ क्षेत्र के भूजल पूर्व दिशा से भी कम होता गया। तीन साल पूर्व इन ट्यूबवेलों की जांच करवाई गई जिसमें 11 ट्यूबवेल अवैध पाए गए लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से फैक्ट्री प्रबंधन वर्तमान में भी अंधाधुंध अवैध जलदोहन कर रही है।

पेयजल समस्या समाधान के लिए संपर्क


सरकार व विभाग का ध्यान नहीं


व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे


नामांकन प्रभावित, अनेक कार्य बाधित


अजीतगढ़ क्षेत्र में बच्चों को हो रही परेशानी

भास्कर न्यूज | अजीतगढ़

सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर करोड़ों रुपए का बजट लगा रही है। हाल ही सरकार ने बच्चों के लिए दूध योजना शुरू की, लेकिन लंबे समय से स्कूलों में पेयजल समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चे पेयजल के लिए भयंकर समस्या से जूझ रहे है।

स्थानीय राआउमावि में गत करीबन 10 साल से ट्यूबवेल नकारा हो गया। राजकीय उप्रावि केरली ढाणी (अजीतगढ़) में जलस्तर गिरने से 2007-08 में हैंडपम्प नकारा हो गया, जहां पर वर्तमान में भामाशाह पेयजल व्यवस्था कर रहा है। राउप्रावि गंगासागर ढाणी (जुगराजपुरा) में वर्ष 2005-06 में हैंडपम्प नकारा हो गया, राप्रावि नाडी का बाढ़ में 10 साल से हैंडपम्प नकारा पड़ा है। राआउमावि कुसुमपुरा के प्राथमिक स्कूल में हैंडपम्प नकारा हो गया। राबाउमावि अजीतगढ़ में ट्यूबवेल व राउप्रावि बागवाली में हैंडपम्प खराब है। राउप्रा संस्कृत स्कूल में पेयजल संकट हैं। जुगराजपुरा पंचायत में ढाणी कुशावाली (मानगढ़) के राजकीय उत्कृष्ट उप्रावि में तीन ट्यूबवेल लगे थे लेकिन भूजल स्तर घटने से तीनों नकारा पड़े है।

यह आ रही है समस्या

सरकारी स्कूलों में पेयजल व्यवस्था के अभाव के कारण नामांकन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के पेयजल के साथ ही पोषाहार बनाने, सरकार के पौधारोपण समेत अनेक कार्य बाधित हो रहे है। स्कूल प्रशासन को पेयजल के लिए पृथक से कोई बजट नहीं होने के कारण भामाशाह एवं समाजसेवियों के सहयोग से बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

राआउमावि में ट्यूबवेल नहीं

राआउमावि अजीतगढ़ में करीब 10 साल पूर्व भूजल घटने से ट्यूबवेल नकारा हो गया। करीब 900 बच्चों वाले इस स्कूल में पेयजल के लिए दो नल कनेक्शन ले रखे है, जिनमें पानी आपूर्ति कम होने से पेयजल एवं पोषाहार आदि के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। गत सालों में क्षेत्रीय विधायक झाबर सिंह खर्रा ने एक ट्यूबवेल की घोषणा की लेकिन जलदाय विभाग ने इस फाइल को भूजल वैज्ञानिक की रिपोर्ट की टिप्पणी लगाकर बंद कर दी। वर्ष 2015-16 में स्कूल ने 9400 रुपए पानी के लिए टैंकर पर खर्च किए गए। वर्ष 2016-17 में भामाशाह द्वारा पेयजल व्यवस्था की गई, वर्ष 2017-18 में 17 हजार 400 रुपए टैंकरों से पानी मंगवाने में खर्च हुए।

डार्कजोन में फैक्ट्री कर रही जलदोहन

अजीतगढ़ क्षेत्र में पूर्वी दिशा की ओर भू-गर्भ में जल स्रोत मौजूद थे। वर्ष 2005 में अजीतगढ़ रीको यहीं डवल्प हुआ। इसमें 2005 से जल आधारित एग्रीबायोटेक फैक्ट्री लगी, जिसको तीन ट्यूबवेलों से दो साल के लिए निर्धारित जलदोहन की अनुमति दी गई। वर्ष 2006 में केन्द्रीय भूजल बोर्ड द्वारा श्रीमाधोपुर उपखंड को डार्कजोन घोषित कर दिया गया। उक्त फैक्ट्री ने 2007 के बाद बगैर अनुमति के ही 11 ट्यूबवेल अवैध तरीके से खोद कर अंधाधुंध जलदोहन किया। इसके चलते अजीतगढ़ क्षेत्र के भूजल पूर्व दिशा से भी कम होता गया। तीन साल पूर्व इन ट्यूबवेलों की जांच करवाई गई जिसमें 11 ट्यूबवेल अवैध पाए गए लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से फैक्ट्री प्रबंधन वर्तमान में भी अंधाधुंध अवैध जलदोहन कर रही है।

पेयजल समस्या समाधान के लिए संपर्क


सरकार व विभाग का ध्यान नहीं


व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे


नामांकन प्रभावित, अनेक कार्य बाधित


अजीतगढ़ क्षेत्र में बच्चों को हो रही परेशानी

भास्कर न्यूज | अजीतगढ़

सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर करोड़ों रुपए का बजट लगा रही है। हाल ही सरकार ने बच्चों के लिए दूध योजना शुरू की, लेकिन लंबे समय से स्कूलों में पेयजल समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चे पेयजल के लिए भयंकर समस्या से जूझ रहे है।

स्थानीय राआउमावि में गत करीबन 10 साल से ट्यूबवेल नकारा हो गया। राजकीय उप्रावि केरली ढाणी (अजीतगढ़) में जलस्तर गिरने से 2007-08 में हैंडपम्प नकारा हो गया, जहां पर वर्तमान में भामाशाह पेयजल व्यवस्था कर रहा है। राउप्रावि गंगासागर ढाणी (जुगराजपुरा) में वर्ष 2005-06 में हैंडपम्प नकारा हो गया, राप्रावि नाडी का बाढ़ में 10 साल से हैंडपम्प नकारा पड़ा है। राआउमावि कुसुमपुरा के प्राथमिक स्कूल में हैंडपम्प नकारा हो गया। राबाउमावि अजीतगढ़ में ट्यूबवेल व राउप्रावि बागवाली में हैंडपम्प खराब है। राउप्रा संस्कृत स्कूल में पेयजल संकट हैं। जुगराजपुरा पंचायत में ढाणी कुशावाली (मानगढ़) के राजकीय उत्कृष्ट उप्रावि में तीन ट्यूबवेल लगे थे लेकिन भूजल स्तर घटने से तीनों नकारा पड़े है।

यह आ रही है समस्या

सरकारी स्कूलों में पेयजल व्यवस्था के अभाव के कारण नामांकन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के पेयजल के साथ ही पोषाहार बनाने, सरकार के पौधारोपण समेत अनेक कार्य बाधित हो रहे है। स्कूल प्रशासन को पेयजल के लिए पृथक से कोई बजट नहीं होने के कारण भामाशाह एवं समाजसेवियों के सहयोग से बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

राआउमावि में ट्यूबवेल नहीं

राआउमावि अजीतगढ़ में करीब 10 साल पूर्व भूजल घटने से ट्यूबवेल नकारा हो गया। करीब 900 बच्चों वाले इस स्कूल में पेयजल के लिए दो नल कनेक्शन ले रखे है, जिनमें पानी आपूर्ति कम होने से पेयजल एवं पोषाहार आदि के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। गत सालों में क्षेत्रीय विधायक झाबर सिंह खर्रा ने एक ट्यूबवेल की घोषणा की लेकिन जलदाय विभाग ने इस फाइल को भूजल वैज्ञानिक की रिपोर्ट की टिप्पणी लगाकर बंद कर दी। वर्ष 2015-16 में स्कूल ने 9400 रुपए पानी के लिए टैंकर पर खर्च किए गए। वर्ष 2016-17 में भामाशाह द्वारा पेयजल व्यवस्था की गई, वर्ष 2017-18 में 17 हजार 400 रुपए टैंकरों से पानी मंगवाने में खर्च हुए।

डार्कजोन में फैक्ट्री कर रही जलदोहन

अजीतगढ़ क्षेत्र में पूर्वी दिशा की ओर भू-गर्भ में जल स्रोत मौजूद थे। वर्ष 2005 में अजीतगढ़ रीको यहीं डवल्प हुआ। इसमें 2005 से जल आधारित एग्रीबायोटेक फैक्ट्री लगी, जिसको तीन ट्यूबवेलों से दो साल के लिए निर्धारित जलदोहन की अनुमति दी गई। वर्ष 2006 में केन्द्रीय भूजल बोर्ड द्वारा श्रीमाधोपुर उपखंड को डार्कजोन घोषित कर दिया गया। उक्त फैक्ट्री ने 2007 के बाद बगैर अनुमति के ही 11 ट्यूबवेल अवैध तरीके से खोद कर अंधाधुंध जलदोहन किया। इसके चलते अजीतगढ़ क्षेत्र के भूजल पूर्व दिशा से भी कम होता गया। तीन साल पूर्व इन ट्यूबवेलों की जांच करवाई गई जिसमें 11 ट्यूबवेल अवैध पाए गए लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से फैक्ट्री प्रबंधन वर्तमान में भी अंधाधुंध अवैध जलदोहन कर रही है।

पेयजल समस्या समाधान के लिए संपर्क


सरकार व विभाग का ध्यान नहीं


व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे


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