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गर्भवती बेटी और दामाद पर जानलेवा हमला, पीड़िता की मां ने लगाई न्याय की गुहार

गंज थाना पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप, चार आरोपियों में से एक आरोपी को ही पाबंद किया

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 07:23 AM IST
attack on Pregnant daughter and son-in-law

अजमेर. फॉयसागर रोड पर चार दिन पहले संपत्ति विवाद में अधेड़ और उसके दो पुत्रों द्वारा गर्भवती बेटी और दामाद पर हमला कर गंभीर रूप से जख्मी करने के मामले में वारदात की शिकार गर्भवती विवाहिता की मां गुड्डो ठाकुर उर्फ शाइन बानू ने महिला थाने में न्याय की गुहार लगाई है। उसने बयान में खुलासा किया है कि आरोपी उसके पति जगदीश ठाकुर ने विवाहित होने के बावजूद धोखे से उससे विवाह कर लिया और करीब तीस साल से उसके साथ क्रूरतम व्यवहार कर रहा है। अब जगदीश और उसकी पहली पत्नी के पुत्र सर्वेश, अनिल और राजू उसे मकान से बेदखल करने के लिए मारपीट कर रहे हैं, उसे बचाने की कोशिश करने पर गर्भवती बेटी और दामाद पर भी आरोपियों ने जानलेवा हमला किया।


आरोपियों की करतूत उजागर करने के लिए उसने मकान में सीसी टीवी कैमरा सिस्टम लगा रखा है, सात दिन पहले जानलेवा हमले की वारदात कैमरे में कैद हो गई है। कैमरे की फुटेज में चारो आरोपी उसे और बेटी दामाद को बेरहमी से मारते-पीटते दिखाई दे रहे हैं, इसके बावजूद गंज थाना पुलिस हाथ-पर हाथ धरे बैठी है। पुलिस ने खानापूर्ति करने के लिए सिर्फ एक आरोपी को पाबंद किया है, जबकि जगदीश ठाकुर सहित तीन आरोपियों को पुलिस का संरक्षण है।

तीस साल से झेल रही है अमानवीय यातनाएं

नृसिंह पुरा फायसागर रोड न्यू गीता कालोनी निवासी गुड्डोे ठाकुुर उर्फ शाईन बानू ने मंगलवार को महिला थाने में पेश होकर शिकायत दर्ज कराई और चौकानें वाले बयान दिए हैं। पीड़िता ने बताया कि आरोपी जगदीश ठाकुुर के साथ 28 मई 1983 को उसका विवाह हुआ था। विवाह के बाद उसे पता चला कि जगदीश ठाकुर पहले से ही विवाहित था और पहली पत्नी से उसके तीन पुत्र सर्वेश, अनिल उर्फ रिंकू और राजू है। उसने विरोध किया तो जगदीश ठाकुर ने उसे पत्नी के पूरे हक देने का वादा किया। बाद में जगदीश उसे अमानवीय शारीरिक और मानसिक यातनाएं देने लगा था।

यौन शोषण के कारण वह गर्भवती हो गई थी। जगदीश ठाकुर उसपर गर्भपात कराने के लिए दबाव डालने लगा था, लेकिन उसने बच्ची रेशमा को जन्म दिया। बच्ची के पालन-पोषण के लिए उसने जगदीश के जुल्म सहते हुए तीस साल का लंबा समय बिता दिया। साल भर पहले उसने रेशमा की शादी उसने अच्छे परिवार में कर दी थी। बेटी की शादी के बाद से ही जगदीश और उसके पुत्रों का जुल्म उस पर बढ़ गया था। चारों उसे मकान से बेदखल करना चाहते हैं और कहते हैं कि बेटी-दामाद के पास जाकर रह। मकान से नहीं निकलने पर उसे जान से मारने की धमकियां भी दे रहे हैं। पांच दिन पहले बेटी रेशमा और दामाद कमलजीत उससे मिलने आए थे, मौका देख कर जगदीश और उसके तीन पुत्रों ने जानलेवा हमला कर दिया था। पूरी वारदात सीसी टीवी कैमरे में कैद हो गई थी।

एसपी के आदेश के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं

खास बात यह है कि जानलेवा हमले की पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है, इसमें आरोपी निर्दयता से गर्भवती युवती और उसके पति पर लात-घूंसे बरसा रहे हैं। मारपीट में घायल कमलजीत के जबड़े में फ्रैक्चर और उसकी गर्भवती पत्नी रेशमा के पेट में घातक चोट से असहनीय पीड़ा बनी हुई है। जेएलएन अस्पताल में दोनों की मेडीकल मुआयना रिपोर्ट में इसकी पुष्टि है।

इसके बावजूद गंज थाना पुलिस आरोपियों की हिमायत में जुटी है। चौकानें वाला तथ्य यह है कि एसपी राजेन्द्र सिंह चौधरी ने थाना प्रभारी सूर्यभान सिंह को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे, इसके बाद भी थाना प्रभारी ने घायलों की बगैर आईआर रिपोर्ट के ही एक आरोपी सर्वेश को पाबंद कर जमानत पर छोड़ दिया और कार्रवाई की औपचारिकता पूरी की। जबकि नियमानुसार घायलों की मेडिकल मुआयना रिपोर्ट का पुलिस को इंतजार करना चाहिए और रिपोर्ट के आधार पर ही आरोपियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों की गंज थाना पुलिस से सांठगांठ है। उल्लेखनीय है कि सात दिन पहले पीड़ित आशागंज निवासी कमलजीत सिंह ने गंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

कमलजीत सिंह ने शिकायत में बताया है कि वह पत्नी रेशमा को लेकर न्यू गीता कालोनी फॉयसागर रोड निवासी सास गुड्डों ठाकुर से मिलने गया था, जहां ससुर जगदीश सिंह ठाकुर ने उसपर हमला कर दिया।

जगदीश सिंह की पहली पत्नी के पुत्र सर्वेश और रिंकू ने भी मारपीट शुरू कर दी। हमले में उसके मुंह और हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आई है, जबकि गर्भवती पत्नी रेशमा के पेट और सिर में चोटें आई है। पुलिस ने कमलजीत की चोटों का जेएलएन अस्पताल में मेडिकल मुआयना कराया और मुकदमा दर्ज कर चुनाव नतीजे के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। चुनाव नतीजों के बाद जब पीड़ित थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी का जवाब था कि मामले में जांच अधिकारी हैडकांस्टेबल सुखदेव अवकाश पर गया है, उसके लौटने के बाद ही कार्रवाई हो पाएगी।

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