अजमेर

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इस मंदिर में चल रहा था पाखंड का खेल, बाबा लोगों को धोखा देकर ऐसे कमा रहा था लाखों

प्रसाद खिलाकर किडनी की पथरी थमा देते थे हाथ में, ऐसे करते थे लाखों की कमाई

Danik Bhaskar

Mar 14, 2018, 07:22 AM IST
मंदिर जिसमें चल रहा था पाखंड का खेल। मंदिर जिसमें चल रहा था पाखंड का खेल।

अलवर. सावधान, ढोल मजीरों की आवाज के साथ बंदर की तरह कूदने वाले एक बाबा को यहां देवता आते है और आपकी किडनी में मौजूद पथरी को वह मुंह से उगल देता है। यह कथित चमत्कार अलवर शहर से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित इंदोक गांव में बाबा नारायण मीणा पिछले आठ दस साल से कर रहें है। पथरी के नाम पर पिछले करीब आठ साल से ये बाबा मुंह में पहले से ही भर रखे कंकर के पीस पुडिय़ा में बांधकर देता है। इससे पहले बाबा भूत प्रेम उतारता था। इस पथरी के कथित इलाज का भंडा फोड़ किया दैनिक भास्कर के दो रिपोर्टरों ने। ये रिपोर्टर एक मरीज की सोनोग्राफी करवाकर ले गए और एक स्वयं भी मरीज बना। बाबा ने दोनों की पथरी निकालकर कंकर थमा दिया। दुबारा जांच करवाई तो सच सामने आ गया।

ऐसे करता था वसूली

यह बाबा मरीज से 300 रुपए फीस और 120 रुपए प्रसाद के रूप में वसूल रहा है। प्रसाद भी उसके परिवार के सदस्य ही बेच रहे हैं। आस्था के नाम पर चल रहे इस खेल में आठ से दस लोग शामिल हैं। किसी को शक नहीं हो, इसके लिए वे बाकायदा पथरी निकालने से पहले मरीज की सोनोग्राफी रिपोर्ट देखते हैं। शनिवार और बुधवार को यहां लगने वाले दरबार में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब सहित कई प्रांतों से सैकडों मरीज आते हैं। लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर मेडिकल साइंस को चुनौती दे रहे इस बाबा की करतूत को दैनिक भास्कर के दो रिपोर्टरों ने उजागर किया है। इसमें पथरी निकालने दावा झूठा साबित हुआ। मरीजों के हाथ में थमाई गई पथरी जांच में नदी, नालों एवं पहाड़ी के पत्थर साबित हुए।

चमत्कार होने का बोल ठगता था लोगों को

भास्कर रिपोर्टर इंदोक गांव पहुंचे। हाईवे पर खेत में कई गाड़ियों का जमावड़ा था। जब वहां रुके तो बायीं ओर मंदिर से कई लोग इलाज कराकर लौट रहे थे। पूछा तो पता चला कि ये पथरी का इलाज कराकर लौट रहे हैं। यह पहले बैच के मरीज थे, जो पीली पुडिय़ा में पथरी लेकर लौट रहे थे। मंदिर में पहुंचने पर बाबा के पुत्र सियाराम ने दो मरीजों के नाम लिखकर 300-300 रुपए फीस वसूली। थोड़ी देर बाद ही ढफ और मजीरा बजने शुरू हो गए तो सभी मरीजों ने जान लिया कि अब चमत्कार होने वाला है। मंदिर के सामने मरीजों की लाइन लगवा दी गई। चबूतरे पर बैठा बाबा उछलकर मंदिर के सामने पहुंचा और बार-बार ढोक लगाने लगा। मंदिर के चबूतरे पर बैठा व्यक्ति सोनोग्राफी रिपोर्ट देखता और पथरी की संख्या पूछकर उंगलियों से इशारा कर देता। इसके बाद बालों की रस्सी को किडनी की जगह लगाता। उसी दौरान बाबा को वहां खड़े एक अन्य व्यक्ति ने बाबा को पानी पिलाया और उसने वहां खड़े दूसरे युवक की थाली में उतनी ही पथरी उगल दी। एक-एक करके लाइन में लगे सभी लोगों की पथरी निकालने का तमाशा किया गया।

परदे के पीछे का सच

पथरी निकालने के खेल की भास्कर की टीम ने बारीकी से पड़ताल की। इस पूरे ढोंग को 8 से 10 लोग अंजाम दे रहे हैं, जिनमें ज्यादातर एक ही परिवार के हैं। यहां लाइन में लगे मरीज की सोनोग्राफी देखने वाला व्यक्ति पथरी की संख्या पूछता है। मरीज के बताने पर बालों की रस्सी किडनी के पास लगाने के वाला दूसरा व्यक्ति उंगलियों के इशारे से तांत्रिक को पथरियों की संख्या बता देता है। इशारे के मुताबिक ही वह उतने ही पत्थर मुंह से उगल देता है। ये छोटे-छोटे पत्थर वह मुंह में दबा कर रखता है। जब पत्थर खत्म हो जाते हैं तो वह शॉल ओढ़कर बैठ जाता है। इस दौरान मीणा किसी से बात नहीं करता है।

अभी तक जादुई तरीके से पथरी निकालने के मामले की कोई शिकायत नहीं मिली है। इस कारण कार्रवाई नहीं हो पाई है। क्योंकि आस्था के कारण कोई शिकायत करने नहीं आता है। लेकिन संज्ञान में आएगा तो उसके खिलाफ झोलाछाप डॉक्टरों जैसी कार्रवाई करेंगे और पुलिस में मुकदमा दर्ज कराएंगे।-डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल, सीएमएचओ अलवर

तांत्रिक की ओर से पथरी के रूप में निकाले गए कंकड दिखाता मरीज बबली सैनी। तांत्रिक की ओर से पथरी के रूप में निकाले गए कंकड दिखाता मरीज बबली सैनी।

पथरी पुड़िया में दे दी , जांच में पता लगा किडनी में मौजूद है 

 

पथरी के मरीज राजगढ़ के थाना राजाजी गांव निवासी बबली सैनी  की 10 मार्च को जिले के सबसे बड़े राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में सोनोग्राफी कराई गई। रेडियोलॉजिस्ट डॉ.भगवान सहाय ने सैनी की दांयीं  किडनी में तीन तथा बायीं किडनी में एक पथरी बताई। सोनोग्राफी की यह रिपोर्ट तांत्रिक मीणा को दिखाई तो उसने तीन पथरी निकालकर थमा दी। सच्चाई पता लगने के लिए 13 मार्च को फिर से मरीज सैनी की सोनोग्राफी जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में उसकी दोनों किडनियों में चारों पथरी थीं।

 

पथरी निकालने के लिए बैठा नारायण मीणा। पथरी निकालने के लिए बैठा नारायण मीणा।

रिपोर्टर के पथरी थी ही नहीं फिर भी निकालकर दे दी

 

पथरी निकलवाने के इस खेल में भास्कर का रिपोर्टर भी शामिल हुआ। पथरी के मरीजों की लाइन में लगने के बाद जब भास्कर रिपोर्टर का नंबर आया तो उससे भी सोनोग्राफी की रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्टर ने कहा कि वह सोनोग्राफी रिपोर्ट घर पर भूल अाया है। इस पर बाबा के चेले ने पूछने पर रिपोर्टर ने 6.5 एमएम की पथरी बताई। चंद सेकंड में उसे भी तांत्रिक ने मुंह से एक बड़ा कंकड़ उगल कर दे दिया।

मंदिर के बाहर प्रसाद बेचता बालक। मंदिर के बाहर प्रसाद बेचता बालक।
डॉ.योगेश उपाध्याय डॉ.योगेश उपाध्याय

चमत्कार से पथरी से मुक्ति मरीज से धोखा : डॉ.योगेश उपाध्याय

 

जनरल सर्जन डॉ. योगेश उपाध्याय का कहना है कि मानव शरीर में पित्त की थैली की पथरी खतरनाक हो सकती है। यह आंत को भोजन पचाने के लिए अम्ल पहुंचाने वाली नली में फंसने पर जान का खतरा पैदा कर सकती है। नली में रुकावट से लीवर और पैंक्रियाज के पाचक एंजाइम के आंतों में पहुंचने में रुकावट उत्पन्न होती है। जिसके कारण लीवर और पैंक्रियाज में सूजन आने का खतरा बढ़ जाता है। जो जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं ज्यादा दिन तक बने रहने वाली पथरी किडनी को भी खराब कर सकती है या फिर किडनी में बनने वाली पथरी यूरीन के बहाव में रुकावट पैदा कर जोखिम पैदा कर सकती है। इससे किडनी के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। मेडिकल साइंस में पित्त की थैली की पथरी को आमतौर पर ऑपरेशन से इलाज किया जाता है। किडनी की पथरी एवं यूरिनरी सिस्टम, यूरेटर और ब्लेडर की पथरियों का इलाज उनके आकार एवं स्थान पर निर्भर करता है।

 

मंदिर पर लगी लोगों की भीड़। मंदिर पर लगी लोगों की भीड़।
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