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कैंसर रोगियों को फरवरी माह से मिलने लगेगी ब्रेकी थैरेपी

जेएलएन अस्पताल में कैंसर रोगियों को मिल सकेगी अत्याधुनिक मशीन से थैरेपी, जर्मन निर्मित है मशीन

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 08:24 AM IST

अजमेर. विश्व की अत्याधुनिक जर्मन मेड सेगीनोवा कंपनी की ब्रेकी थैरेपी मशीन की टेस्टिंग मुंबई के एआरबी सेंटर के इंजीनियर करेंगे। एआरबी के इंजीनियरों से अनुमति मिलने के बाद मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। भारत में संभवतया पहली मशीन है, जिसकी सुविधा जेएलएन अस्पताल में कैंसर रोगियों को मिलेगी।

इस मशीन की कीमत करीब 1.75 करोड़ है। अब ब्रेकी थैरेपी की पुरानी टेक्नोलॉजी की मशीन से थैरेपी लेने के लिए मरीजों को जयपुर, उदयपुर और कोटा नहीं जाना पड़ेगा। जेएलएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर यूनिट में कोबाल्ट थैरेपी की ही सुविधा है। ब्रेकी थैरेपी के लिए मरीजों को अन्य जिलों में जाना पड़ता है। जर्मन निर्मित यह मशीन जेएलएन अस्पताल में 21 मार्च 2017 को आ गई थी। इस मशीन की खरीद विश्वंभर नाथ टंडन सेनेटोरियम एंड धर्मशाला ट्रस्ट अजमेर के सहयोग से की गई है।

फरवरी 2015 में एमओयू
23 फरवरी 2015 को ट्रस्ट के अध्यक्ष एनएस टंडन ने एमओयू किया था। इसके लिए ट्रस्ट ने जेएलएन मेडिकल कॉलेज को सवा दो करोड़ की धन राशि मुहैया करवाई थी। 50 लाख रुपए लागत से नए भवन का निर्माण किया गया है। मेडिकल कॉलेज स्तर पर गठित कमेटी ने जयपुर की निजी फर्म से यह काम करवाया गया।

ये है मशीन की विशेषता
कैंसर रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यूके माथुर ने बताया कि सेगीनोवा कंपनी की यह मशीन विश्व में सबसे अत्याधुनिक मशीनों में से एक है। कंपनी की पहली मशीन ही अजमेर आई है। इसकी विशेषता यह है कि इसका सोर्स 5-6 सालों तक काम करता है। वर्तमान में अभी जो मशीनें चल रही हैं, उनका सोर्स 3 से 4 माह में बदलना पड़ता है। जेएलएन अस्पताल में कोबाल्ट मशीन से शरीर के बाहर के अंगों की ही सिकाई हो पाती है। इस मशीन से बच्चेदानी के मुंह, आहार नली, मुंह या गाल, छाती आदि अंगों की थैरेपी हो सकेगी।

फैक्ट फाइल
ओपीडी में 80 से 100 पुराने मरीज हर रोज आते हैं । 40 से 50 कोबाल्ट थैरेपी हो रही रोजाना। 10 से 15 केस प्रतिमाह ब्रेकी थैरेपी के रेफर होते हैं।


एआरबी सेंटर मुंबई की चेकिंग पेंडिंग है। यहां से अनुमति मिलने के बाद फरवरी से ब्रेकी थैरेपी की सुविधा मिलने लगेगी। देश में यह पहली मशीन है इसलिए एआरबी को टेस्ट करना है। कुछ ही दिनों में मुंबई से इंजीनियर यहां पहुंचेंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी शुरूआत कर दी जाएगी।
-डॉ. यूके माथुर, विभागाध्यक्ष कैंसर रोग विभाग जेएलएन