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अब यहां पानी से बनेगा कपड़ा, पहली बार जापानी वाटरजेट लूम

1936 में रुटी सी से कपड़ा उद्योग की शुरुआत करने वाला शहर अब तकनीक में किसी से पीछे नहीं

Danik Bhaskar | Jan 01, 2018, 05:00 AM IST

भीलवाड़ा. भीलवाड़ा में दुनिया की लेटेस्ट टेक्नॉलॉजी की “वाटरजेट’ लूम आ गई हैं। इसमें पानी की मदद से कपड़ा बनता है। यह लूम जापान की है। पहले चरण में भीलवाड़ा के दो उद्यमियों ने 40 लूमें मंगाई हैं। आठ लूमें हाल में ही चालू कर दी और 32 लूमें नए साल में चालू हो जाएगी।


- पॉलिएस्टर विस्कॉस (पीवी) सूटिंग बनाने में देश में पहला स्थान रखने वाले भीलवाड़ा में करीब 16 हजार लूमें हैं लेकिन अभी तक वाटरजेट लूम नहीं थी। वाटरजेट विश्व की लेटेस्ट टेक्नॉलॉजी में अन्य लूमों से कम लागत और कम बिजली खपत वाली लूम है। वाटरजेट लूम की स्पीड 500 से 900 पिक प्रति मिनट है।

- एयरजेट लूम में कपड़ा बनाने के लिए हवा के जरिए धागा आगे से आगे बढ़ाया जाता है, लेकिन वाटरजेट लूम में धागे को आगे से आगे बढ़ाने के लिए पानी की धार लगाई जाती है। पानी की धार से कपड़ा बनने की बात भले ही आश्चर्यजनक लगे लेकिन यही सच है।

- भीलवाड़ा में चित्तौड़गढ़ रोड स्थित एक फैक्ट्री के संचालक नरेश बाल्दी के अनुसार, उनके यहां आठ वाटरजेट लूमें शुरू हो गई है। रीको एरिया स्थित एक फैक्ट्री में 32 लूमें नए साल में शुरू होगी।

एयरजेट लूम: कपड़ा उत्पादन लागत वाटरजेट से 30% ज्यादा

- कपड़ा उत्पादन लागत ‌~ 20 से 22 पैसा प्रति पीक है। इसमें बिजली लागत सबसे ज्यादा ‌~ 8 से ‌~ 9 पैसा प्रति पीक होती है। बिजली लागत वाटरजेट से दोगुनी है।
- इसमें आरओ प्लांट की जगह हवा देने के लिए बड़ा कंप्रेशर लगाया जाता है।
- टेक्सचराइज, पॉलिएस्टर कॉटन, कॉटन, पॉलिएस्टर विस्कॉस आदि उत्पाद बनाए जाते हैं।
- इसकी स्पीड 1000 से 1200 प्रति पीक होती है लेकिन कपड़ा उत्पादन लागत काफी होती है। इसलिए अब उद्यमी वाटरजेट लूमों की ओर बढ़ रहे हैं।
- भीलवाड़ा में अभी करीब 2500 एयरजेट लूम हैं
- एयरजेट लूम भी जापान में बनती है। देश के कपड़ा उत्पादन केंद्रों पर एयरजेट लूम है, लेकिन वाटरजेट लूम देश के गिने-चुने शहरों में ही है।
- प्रति मीटर कपड़े का वजन 600 से 700 ग्राम होता है।
#भास्कर नॉलेज:
- भीलवाड़ा में कपड़ा उद्योग की शुरुआत वर्ष 1936 में हुई थी। लूम में सबसे पुरानी तकनीक रूटी सी और रूटी बी हैं।
- भीलवाड़ा में अभी भी करीब एक हजार ऐसी लूम हैं। इनके बाद सिमको लूम आई। जिनकी संख्या अभी करीब 150 है। इसके बाद पिकानोल (55), डोनियर व रेपियर (650) लूमें आई।
- अभी करीब 2,500 लूमें एयरजेट हैं और सबसे ज्यादा करीब 16 हजार में से करीब 12 हजार सल्जर लूम हैं। इनकी स्पीड 250 प्रति पीक होती है। इस पर प्रति मीटर 300 से 350 ग्राम कपड़ा बनता है।
कपड़ा बनते समय गीला रहता है इसलिए प्रदूषण भी नहीं होता है
- यह लूम जापान की है। स्पीड 500 से 900 पिक प्रति मिनट है।
- भीलवाड़ा में पहली बार दो फैक्ट्रियों में 40 वाटरजेट लूमें मंगाई हैं।
- दुनिया में ऐसी कोई लूम नहीं जिस पर कपड़ा बनते समय गिला रहता है। वैफ्ट यार्न को पानी के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इसलिए कपड़ा बनते समय गीला रहता है। इससे क्वालिटी अच्छी बनती है।
- इसमें फिलामेंट, टेक्सचराइज और नाइलोन उत्पाद बनते हैं। इनमें स्पोर्ट्स वीयर, डिफेंस, टेंट हाउस और शूटिंग का कपड़ा बनता है। पानी का उपयोग होने के कारण इस पर कॉटन नहीं बनता है।
- इसकी कपड़ा उत्पादन लागत 14-15 पैसे प्रति पीक है। इसमें से चार पैसा प्रति पीक बिजली लागत है।
- सभी लूमों तक पानी पहुंचाने के लिए एक आरओ प्लांट लगाया जाता है। इसमें 60 से 70 प्रतिशत पानी रियूज होता है। एक लूम पर औसतन एक दिन में 400 लीटर पानी खर्च होता है।
- अन्य लूमों की अपेक्षा फेब्रिक की क्वालिटी अच्छी होती है। प्रति मीटर 550 से 600 ग्राम का कपड़ा तैयार होता है।