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उन्होंने ठाना और ठंडे प्रदेशों की मशरूम रेतीले राजस्थान में उगा दी

ओएस्टर मशरूम उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दक्षिण भारत में ही होता है उत्पादित, छात्रों ने पढ़ाई के साथ शुरू की मशरूम की

अरविंद अपूर्वा | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:32 AM IST

उन्होंने ठाना और ठंडे प्रदेशों की मशरूम रेतीले राजस्थान में उगा दी

अजमेर. राजस्थान के जालौर और झालावाड़ से अजमेर में एग्रीकल्चर सब्जेक्ट में पढ़ाई करने आए थे। यहां कॉलेज में एडमिशन के साथ ही चारों में दोस्ती हो गई और फिर सभी ने एग्रीकल्चर के क्षेत्र में ही कुछ नया करने का सोचा। उन्होंने तय किया कि क्यों ना ठंडे प्रदेशों में उगने वाले मशरूम की खेती गरम रेतीले राजस्थान में की जाए। ओएस्टर जिसे हिंदी में ढिंगरी मशरूम के नाम से जाना जाता है, उसे उन्होंने अजमेर में ही उगाने की ठानी। पहली बार असफल हुए, लेकिन दूसरी बार में कामयाबी ने ने उनके कदम चूम लिए।

- सारोला कलां झालावाड़ के बृजेश गुर्जर और राजेंद्र राठौड़, जालौर निवासी मुकेश सैनी और सुरेश सोलंकी अजमेर की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएससी थर्ड ईयर एग्रीकल्चर के स्टूडेंट हैं। पढ़ने के साथ ही कुछ करने की ललक ने इन्हें ओएस्टर की खेती करने के लिए प्रेरित किया। उसके लिए सबसे बड़ी समस्या 28 डिग्री से कम तापमान और आर्द्रता 80 प्रतिशत से ज्यादा होना अनिवार्य था। पहले तो इन्होंने अपने हॉस्टल के ही एक कबाड़ रूम में प्रयोग किया लेकिन सफल नहीं हुए। इसके बाद यूनिवर्सिटी के पास ही चाचियावास गांव में एक हॉल किराए पर लिया और पूरी तैयारी के साथ शुरुआत की। नमी को नियंत्रित रखने के लिए जूट के बोरे को हमेशा जमीन पर गीला करके रखा गया।

यू-ट्यूब पर सीखकर करते रहे काम
- यू-ट्यूब पर देखकर सीखते गए और आजमाते रहे। बंगाल से 100 रुपए किलो में बीज खरीदा। पॉलीथिन बैग्स में गेहूं, सोयाबीन या अन्य किसी भी धान का भूसा भरा और उनमें बीज डाल दिए। इससे पहले भूसे को फार्मलीन और बावस्टिन से उपचारित किया। प्रति बैग करीब 25 से 40 रुपए के बीच खर्चा आया।

इस तरह मिली उपज
- बैग तैयार करने के 15 दिन बाद ही पूरे बैग में कवक का जाल फैल जाता है। करीब 21 दिन में मशरूम का पहला उत्पादन प्राप्त होता है। फिर हर 7 दिन के अंतराल में 3-4 बार उत्पादन मिलता है। एक बैग से करीब 3 किलो मशरूम प्राप्त होता है, जिसकी बाजार कीमत 100-150 रुपए प्रति किलो है। अधिकतम 35 रुपए खर्च में 300 रुपए कमाए जा सकते हैं।

तापमान नियंत्रित करके ले सकते हैं पूरे साल उत्पादन

- स्टूडेंट्स ने बताया कि यह किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। कम जगह और कम समय में अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। मशरूम की खेती के बाद भूसे और बैग से खाद का निर्माण किया जा सकता है।

स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद
- ओएस्टर में विटामिन डी पाया जाता है। ट्यूमर, मलेरिया, मिर्गी, कैंसर, मधुमेह, रक्तस्राव के साथ ही पेट संबंधी बीमारियों में भी यह काफी लाभदायक है। फोलिक एसिड, प्रोटीन, कम फैट, हाई न्यूट्रीशन भी इसमें है।

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