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500 से ज्यादा किसान डूबे कर्ज में, मुआवजा की आस के साथ टूटे बच्चों के संबंध, एक घर छोड़ गया

पांच वर्षों से खेतों में नहीं चले हल, उधारी से चलाया घर खर्च। अब न्यायालय की लेंगे शरण, लोकसभा उपचुनाव का बहिष्कार।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 04:49 AM IST
debt burden on farmers in rajasthan

शाहजहांपुर. पांच साल तक दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे के लिए शाहजहांपुर के पांच गांवों की जमीन उलझाए रखने के बाद राज्य सरकार ने बिना मुआवजे जमीनें मुक्त कर सैकड़ों किसानों के सामने जीने या मरने जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। खेत नहीं जोत पाने से 5 साल में किसान बाजार के कर्जदार हो गए। उधारी में बच्चों की पढ़ाई और शादी ब्याह के बंदोबस्त कर दिए। वादा ये किया कि मुआवजे की रकम मिलेगी तो उधारी चुका देंगे।

- बाजार ने भी भरोसा किया, लेकिन अब अचानक सरकार के फैसले से कइयों के सगाई-संबंध टूट गए हैं। किसी के घर साहुकारों ने तकादे शुरू कर दिए हैं।

- एक किसान की हालत यह हुई है कि वह बिना बताए घर से निकला और तीन दिन से नहीं लौटा है। परिवार परेशान है कि कोई अनहोनी नहीं हो जाए। एक किसान की बेटी के ब्याह के लिए उठाया वाहन कंपनी ने उठवा लिया है।


- ऐसे वे अकेले परिवार नहीं हैं, जो परेशान है। उन जैसे 500 से ज्यादा किसानों की यही दशा लेकिन कर्जदार होने की बदनामी से बचने के लिए वे मुंह भी नहीं खोल पा रहे। कुछ ने हिम्मत की है और लोकसभा उपचुनाव और विधानसभा उप चुनाव में सरकार के खिलाफ खुलकर खड़े होने का ऐलान कर दिया है।

- मुआवजा के लिए संघर्ष करती रही इन 5 गांवों कि समिति के सदस्य सुनील चौहान का कहना है कि किसानों को पांच वर्ष तक विकास का झांसा दिया गया। हम मुआवजा मांगते रहे, सरकार आश्वासन देती रही। अब सरकार ने अचानक पांच गांवों को परियोजना से मुक्त कर किसानों को परेशानी मे डाल दिया है। हम अब पांच वर्ष के नुकसान की भरपाई के लिये न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

वादा-खिलाफी : सरकार ने ले लिया यू-टर्न

दरअसल मुख्यमंत्री द्वारा डीएम‌आईसी के लिए अधिग्रहण अधीन शाहजहांपुर क्षेत्र के 10 गांवों में 5 गांवों सक्तपुरा, गुगलकोटा, जौनायचाखुर्द, चौबारा एवं शाहजहांपुर की भूमि मुक्त करने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि 3 अप्रैल 2012 की अधिसूचना के तहत अधिग्रहित जमीनों के खरीद एवं बेचान पर सरकार ने रोक लगाई थी। तब से किसान न खेतों मे हल चला पा रहे थे न कोई और काम कर सके। खासा कर्जा उन पर चढ़ गया। किसान सोच रहे थे कि मुआवजे से मिली रकम से कर्ज चुका देंगे। अब एकाएक सरकार ने यू-टर्न ले लिया है।

62 % जमीन उन गांवों की जिन्हें अधिग्रहण मुक्त किया
राज्य सरकार ने 3 अप्रैल 2012 को डीएमआईसी की अधिसूचना जारी कर मुंडावर क्षेत्र के माणका, सक्तपुरा, लामचपुर, विरोद, पलावा एवं मिर्जापुर व नीमराना के गुगलकोटा, चौबारा, जौनायचाखुर्द एवं शाहजहांपुर की 1425.36 हेक्टेयर जमीन के खरीद बेचान पर रोक लगा दी थी। इनमें 893.06 हेक्टेयर जमीन उन गांवों की थी, जिन्हें अब अधिग्रहण मुक्त किया गया है। करीब 21.15 हेक्टेयर पर हाईकोर्ट का स्टे है।

पांच साल का हर्जाना दिए बिना झाड़ा पल्ला
किसानों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि सरकार ने इन गांवों के किसानों को पांच साल तक लगी रोक का हर्जाना दिए बगैर पल्ला झाड़ लिया है। मामले में जमीन के लिए अब तक संघर्ष करती आ रही समिति का कहना है कि वह प्रकरण को न्यायालय में ले जाएगी। सरकार के निर्णय से 552 किसान प्रभावित होंगे।

किसान क्यों परेशान : 10 गांवों में बंटना था 27.32 रुपए अरब मुआवजा, हर बीघा पर मिलते ~ 30 लाख

सभी दस गांवों में 27.32 अरब रुपए का मुआवजा बंटना था। प्रति हैक्टेयर करीब 1.91 करोड़ रुपए यानी 30 से 31 लाख रुपए प्रति बीघा की मुआवजा राशि किसानों के हिस्से आने वाली थी। पांच साल से किसान इसका इंतजार करते रहे। अब उन्हें यह नहीं मिलेगी।

गुगलकोटा : कुल जमीन-256.49 हेक्टेयर, 3.36 पर हाईकोर्ट का स्टे
कुल मुआवजा : 9 अरब 95 करोड़़ 27 लाख 1751 रुपये
शाहजहांपुर : कुल जमीन 120.88 हेक्टेयर
कुल मुआवजा : 4 अरब 27 करोड़ 17 लाख 7 हजार 700 रुपए
चौबारा : कुल जमीन 177.39 हेक्टेयर, 6.24 हेक्टेयर पर हाईकोर्ट का स्टे
कुल मुआवजा : 5 अरब 64 करोड 33 लाख 77 हजार 593 रुपये
जौनायचाखुर्द : कुल जमीन 151.94 हेक्टेयर, 6.51 हेक्टेयर पर हाईकोर्ट का स्टे
कुल मुआवजा : 1 अरब 36 करोड़ 83 लाख 79 हजार 579 रुपये
बावद : कुल जमीन 186.36 हेक्टेयर, 5.04 पर स्टे
कुल मुआवजा : 6 अरब 9 करोड़ 28 लाख 23 हजार 617

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