Hindi News »Rajasthan »Ajmer» Doctor Gs Jhala Also Performs Surgery At The Age Of 93

93 साल की उम्र में भी आपरेशन करने का जज्बा

शहर के क्रिश्चियनगंज रोड निवासी डॉ. झाला 1981 में जेएलएन अस्पताल अधीक्षक पद से हुए थे सेवानिवृत्त

Bhaskar News | Last Modified - Jan 15, 2018, 06:14 AM IST

93 साल की उम्र में भी आपरेशन करने का जज्बा

अजमेर. डॉ. जीएस झाला, उम्र 93 साल... पेशे से जनरल सर्जन। इस उम्र में भी उनका मरीज के ऑपरेशन को लेकर जज्बा देखते ही बनता है। आमतौर पर सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारी हो या कर्मचारी उम्र के इस पड़ाव में अपने आपको थका हुआ महसूस करने लगता है, लेकिन डॉ. झाला उत्साह के साथ मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इस उम्र में भी वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

क्रिश्चियनगंज रोड निवासी डॉ. झाला 1981 में जेएलएन अस्पताल अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने सेंट फ्रांसिस हॉस्पिटल ज्वाइन कर लिया। यहां पर अब तक कंसलटेंट के रूप से नियमित सेवाएं दे रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी वे मरीजों के ऑपरेशन कर रहे हैं। उनके इस जज्बे को देख हर कोई दांतों तले उंगली दबा लेता है। वे अब तक 35 हजार से अधिक सर्जरी कर चुके हैं। प्रमुख रूप से मेजर एब्डोमिनल सर्जरी एवं लंग्स की चेस्ट सर्जरी की है। उनकी सेवाओं को देखते हुए हाल ही में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया है।

राजस्थान में चिकित्सकों को नहीं मिलता बेहतर माहौल

डॉ. झाला को इस बात का दुख है कि राजस्थान में चिकित्सकों को बेहतर माहौल नहीं मिलता है। गांवों में डिस्पेंसरी नहीं, कई जगह पर डॉक्टर्स के लिए रहने के लिए उपयुक्त आवास सुविधा नहीं है। जब गांवों में बेसिक सुविधा नहीं मिलेगी तो डॉक्टर वहां पर क्यों जाना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि 50 सालों में निजी अस्पताल कहां से कहां पहुंच गए, लेकिन जहां थे, वहां से पीछे आ रहे हैं। विदेशों में बेहतर चिकित्सा सुविधा देना सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि यहां पर भी सरकार को चाहिए कि एक अच्छा माहौल बने ताकि मरीजों को लाभ मिले।

ये है डॉक्टर बनने का सफर

1951 में मुंबई के जीएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया था। 1959 में एमएमएस जयपुर से एमएस किया और यहीं पर लेक्चरर बन गए। 1962 तक रहे, उनका तबादला इस साल जूनियर स्पेशलिस्ट सर्जन के रूप में अजमेर हो गया। 1967 में अजमेर में जेएलएन मेडिकल कॉलेज बना और यहां पर लेक्चरर बने फिर रीडर। 1971-72 में प्रमोशन लेकर उदयपुर में प्रोफेसर बने। 1972 में पुन: जेएलएन अस्पताल आ गए और सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष बनाए गए।

ये है दिनचर्या

डॉ. झाला अस्पताल जाने से पहले मौसमी फ्रूट और एक गिलास दूध लेते हैं और सुबह 9 बजे हॉस्पिटल के लिए रवाना हो जाते हैं। यहां पर आउटडोर में मरीजों को देखते हैं और मरीजों के ऑपरेशन करते हैं। दोपहर को हल्का खाना लेते हैं। शाम को भोजन नहीं करते, सिर्फ फ्रूट और एक गिलास दूध ही लेते हैं। रात 10 से 11 बजे तक ध्यान करते हैं और इसके बाद सोने चले जाते हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Ajmer News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: 93 saal ki umr mein bhi aapareshn karne ka jjbaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Ajmer

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×