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मरीजों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, मिली राहत

12 दिनों से चल रही हड़ताल खत्म होने के बाद डॉक्टर ड्यूटी पर लौटे, आउटडोर में पहले दिन पहंुचे डेढ़ हजार

Bhaskar News | Last Modified - Dec 29, 2017, 08:28 AM IST

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    अजमेर. 12 दिन से चल रही हड़ताल खत्म होने के बाद गुरुवार को डॉक्टर काम पर लौट आए। मरीजों को भारी राहत मिली। चिकित्सकों के काम पर लौट आने के बाद मरीज और परिजन के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। जेएलएन अस्पताल में रेजीडेंट भी काम पर लौट आए हैं। सबसे अधिक राहत आउट डाेर में आने वाले मरीजों काे हुई है।

    हड़ताल के दौरान आउट डोर में महज एक ही चिकित्सक की सेवाएं मिल रही थी। मरीजों को घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ रहा था। कई बार हालात ऐसे भी बन जाते थे कि आउट डोर का समय ही समाप्त हो जाता और मरीजों को बिना उपचार ही घर पर लाैटना पड़ रहा था।

    12 दिन चली हड़ताल का असर यह रहा कि आधा अस्पताल ही खाली हाे गया था। अधिकांश मरीज या तो छुट्टी लेकर या फिर चिकित्सकों ने डिस्चार्ज कर उन्हें घर भेज दिया था। सबसे अधिक राहत शिशु रोग विभाग में भर्ती शिशु मरीजों को मिली है। उपचार मिलने पर परिजन के चेहरे भी खिल उठे हैं। इससे पहले उन्हें इस बात की चिंता थी कि भर्ती मरीजों को पर्याप्त उपचार ही नहीं मिल रहा था।

    काम पर आए रेजीडेंट, सुचारू हुई व्यवस्था
    अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने बताया कि हड़ताल पर गए सभी रेजीडेंट और इन्टर्न काम पर लौट आए हैं। अस्पताल की व्यवस्थाएं सुचारू हो गई हैं। गुरुवार को 1483 मरीजों का आउट डोर रहा है। गत 24 घंटे के भीतर 126 मरीजों को भर्ती किया गया है। अस्पताल में 34 मेजर सर्जरी एवं 11 माइनर सर्जरी हुई हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले एक दो दिन भी भीतर अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह से पटरी पर आ जाएंगी।


    ग्रामीण क्षेत्रों में 11 चिकित्सक रहे अनुपस्थित
    सीएमएचओ डॉ. केके सोनी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी सेवारत चिकित्सक काम पर लौट आए हैं। 11 चिकित्सक गुरुवार काे अनुपस्थित रहे हैं। माना जा रहा है कि हड़ताल के दौरान वे मुख्यालय से बाहर हाेने की वजह से काम पर नहीं आ पाए हैं। शुक्रवार से सभी काम पर आ जाएंगे।

    और... इनकी बदल गई थी दिनचर्या

    सेवारत चिकित्सक एवं रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल से जहां सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। वहीं संभाग स्तरीय जवाहर लाल नेहरु अस्पताल में कुछ विभाग ऐसे भी थे जहां पर वरिष्ठ चिकित्सकों ने दिन रात एक कर मरीजों को राहत प्रदान की। 12 दिन चली इस हड़ताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की दिनचर्या ही बदल गई थी। सुबह जल्दी अस्पताल आना और देर तक अस्पताल में ही रुकना। रात में भी एक चक्कर लगाना इनका रूटीन बन गया था। ये विभाग ऐसे हैं जहां मरीज के ऑपरेशन में थोड़ी देर हो जाती तो उसकी जान पर भी बन सकती थी। सर्दी के मौसम में ह्रदय रोगियों की संख्या एकाएक बढ़ जाती है। कार्डियोलोजी विभाग में सबसे अधिक मरीज इन दिनों में ही आते हैं। लेकिन हड़ताल में इस विभाग पर कोई असर नहीं पड़ा। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आरके गोखरू ने अकेले ही 176 मरीजों को राहत प्रदान की। 126 एंजियोग्राफी, 39 एंजियोप्लास्टी, एक आईसीडी और दो पेज मेकर लगाए गए। डॉ. गोखरू आमदिनों की तरह ही देर रात तक ऑपरेशन थियेटर में मरीजों के ऑपरेशन में लगे रहे।

    यूरोलॉजी विभाग
    इसी प्रकार यूरोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित अजमेरा ने भी करीब सौ से अधिक मरीजों की अकेले ही सर्जरी की। डाॅ. अजमेरा अकेले आउट डोर में मरीजों को देखते और भर्ती करते। इसके बाद ऑपरेशन डे में दिन रात एक कर मरीजों के ऑपरेशन किए। ऑपरेशन के बाद डॉ. अजमेरा रात को भी वार्ड का राउंड लेने के लिए अस्पताल पहुंचते थे। उन्हें पता था कि रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं पीछे मरीज को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

    नेत्ररोग विभाग में भी मिली मरीजों को राहत
    नेत्ररोग विभाग में भी 200 मरीजों के ऑपरेशन हुए। दो यूनिट संचालित थी। पहली यूनिट में 136 आैर दूसरी यूनिट में 64 मरीजों के ऑपरेशन हुए। उल्लेखनीय है कि मोतियाबिंद मरीजों की धारणा रहती है कि सर्दी में ही ऑपरेशन करवाए जाए। दिसंबर माह में उक्त ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों की संख्या आम दिनों से अधिक ही होती है। हड़ताल में मरीजों को परेशानी नहीं होने दी गई। विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश पोरवाल, डॉ. संजीव नैनीवाल, डॉ. आरएस हरसोलिया, डॉ. अर्चना गर्ग और डॉ. सोनल असेरी ने मरीजों को राहत प्रदान की।

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