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छापेमारी से पहले रेजीडेंट हॉस्टल रात को हो गए खाली, पुलिस ने सुबह दी दबिश

656 डॉक्टर्स हड़ताल पर, घुटनों पर आई व्यवस्था

Bhaskar News | Last Modified - Dec 19, 2017, 07:45 AM IST

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    जेएलएन अस्पताल में बिगड़ी व्यवस्थाएं। सुबह 10 बजे तक भी चिकित्सक नहीं आए, इंतजार में मरीज।

    अजमेर. राजस्थान सरकार के हेल्थ मिनिस्टर कालीचरण सराफ के बोल बचन और अचानक गिरफ्तारियों से नाराज डॉक्टर्स अब सरकार से आर पार की लड़ाई पर उतर आए हैं। जिले में सेवारत चिकित्सक सहित जेएलएन अस्पताल के मेडिकल आफिसर, रेजीडेंट डॉक्टर्स, नॉन पीजी जूनियर रेजीडेंट, सीएस रेजीडेंट डॉक्टर्स सहित अन्य 656 डॉक्टर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।


    जेएलएन के रेजीडेंट डॉक्टर्स ने गिरफ्तारी के डर से रविवार की रात ही हॉस्टल खाली कर दिया। पुलिस ने सुबह हॉस्टल पर दबिश दी, लेकिन बैरंग लाैटना पड़ा। पहले ही दिन जवाहर लाल नेहरु अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमराती नजर आई। सुबह 10 बजे तक आउट डोर के चिकित्सकीय कक्ष खाली पड़े थे। मरीज घंटों तक उनके आने का इंतजार करते रहे। सप्ताह का पहला दिन होने के कारण सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन यहां पर मरीजों को देखने के लिए पर्याप्त डॉक्टर्स ही नहीं थे। मरीजों की लंबी कतार देख कई मरीज को बिना उपचार के घर लौट गए।


    सेवारत चिकित्सकों की गिरफ्तारी के विरोध में ऑल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर सोमवार से सेवारत चिकित्सक एक साथ काम पर नहीं आए। आंदोलन की रणनीति का माध्यम सोशल मीडिया रहा। यहीं से ही एक दूसरे काे दिशा-निर्देश देते रहे। सोशल मीडिया पर बने डॉक्टर्स के ग्रुप में सरकार, प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर गुबार निकाला जा रहा है।


    डॉक्टर्स इस बात से खफा हैं कि सरकार उनकी मांगों पर अमल करने के बजाए दमनात्मक कार्यवाही कर रही है। लोकतंत्र की हत्या हो रही है। सरकार अपनी हठधर्मिता के चलते प्रदेश के मरीजों को भी प्रताड़ित कर रही है। इस आंदोलन से जुड़े सभी नेता भूमिगत हो गए और अपने-अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिए हैं।

    आयुष और आरबीएसके चिकित्सकों को सौंपी जिम्मेदारी
    सोमवार से कार्य बहिष्कार से पहले सरकार ने सीएमएचओ के माध्यम से व्यवस्था संचालन की तैयारी पूरी कर ली थी। पहले चिकित्सा विभाग ने आयुर्वेद विभाग से चिकित्सकों की डिमांड की, लेकिन बाद में जिला कलेक्टर के माध्यम से अपने स्तर पर ड्यूटी चार्ट तैयार कर आयुष एवं आरबीएसके चिकित्सकों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई। जिले भर में 158 आयुष चिकित्सक लगाए गए हैं।


    जेएलएन में मरीज होते रहे परेशान
    डॉक्टर्स हड़ताल का असर जेएलएन अस्पताल में देखने को मिला। सुबह दस बजे तक आउट डोर में डॉक्टर्स नहीं मिले। सुबह से मरीज उनके आने के इंतजार में कतार लगाए नजर आने लगे। साढ़े दस बजे बाद एक डॉक्टर आउट डोर पहुंचीं।


    पुष्कर एसडीओ ने लगाई गैर हाजिरी
    राजकीय चिकित्सालय की व्यवस्था चरमरा गई है। उपखंड अधिकारी वीके गोयल ने चिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान 8 में से एक भी चिकित्सक नहीं मिला। उन्होंने सभी की उपस्थिति रजिस्टर में गैर हाजिरी लगाई।

    अस्पताल में फैकल्टी मेम्बर एवं हड़ताल में शामिल नहीं हुए डॉक्टर्स द्वारा व्यवस्था संभाली जा रही है। सेामवार को 2320 मरीज आउट डोर में पंजीकृत हुए। आउट डोर में 63 मरीज भर्ती किए गए। छोटे-बड़े 36 ऑपरेशन किए गए अभी भर्ती मरीजों की संख्या 970 है।

    -डॉ. अनिल जैन, अधीक्षक जेएलएन अस्पताल


    हड़ताल के मद्देनजर सभी के अवकाश रद्द करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जिलेभर में 273 डॉक्टर्स में 252 काम पर नहीं आए। ऐसे में आयुष एवं आरबीएसके चिकित्सक लगाए गए हैं। विभाग द्वारा मॉनीटरिंग की जा रही है।
    -डॉ. केे सोनी,
    सीएमएचओ

    कांग्रेसी ने किया रेस्मा का विरोध

    सेवारत डॉक्टर्स पर रेस्मा लागू करने का कांग्रेस ने विरोध किया। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के महासचिव डॉ. संजय पुरोहित, अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव शिव कुमार बंसल, ललित भटनागर, राकेश शर्मा, मनोज खंडेलवाल ने कहा कि एक ओर सरकार 4 साल का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में वृद्ध, असहाय, बच्चे इलाज के अभाव में दर्द से कराह रहे हैं।

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