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अब तक लगती थी पैरा मिलिट्री फोर्सेज की 5 कंपनियां, इस बार लगेंगी 16

उपचुनाव में 417 लोकेशन क्रिटिकल, निर्वाचन आयोग ने पिछले चुनावों की तुलना में बढ़ाई तीन गुना सुरक्षा

अतुल सिंह | Last Modified - Jan 18, 2018, 05:55 AM IST

अब तक लगती थी पैरा मिलिट्री फोर्सेज की 5 कंपनियां, इस बार लगेंगी 16

अजमेर. अजमेर संसदीय क्षेत्र के उपचुनावों में इस बार पिछले चुनावों की तुलना में तीन गुणा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सामान्य चुनावों में जहां अब तक पैरा मिलिट्री फोर्सेज की 5 कंपनियां ही तैनात की जाती रहीं हैं, वहीं इस बार उपचुनावों में इनकी संख्या बढ़कर 16 पहुंच गई है।


इसके अलावा जिला पुलिस, होमगार्ड आैर आरएसी की कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी। दो माह की कड़ी मशक्कत आैर मैराथन बैठकों के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव गोयल ने अजमेर संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्रों में 417 लोकेशन आैर 611 बूथों को क्रिटिकल चिन्हित किया है। इन बूथों पर इनकी संवेदनशीलता आैर अतिसंवेदशीलता के हिसाब से फोर्स के साथ वेब कास्टिंग टीमें, वीडियोग्राफर्स आैर केंद्र के माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात रहेंगे।

यह है संवेदनशील-अतिसंवेदनशील बूथ तय करने का मापदंड
जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव गोयल ने जिले के सभी एसडीएम आैर पुलिस अधिकारियों की बैठक लेकर आठों विधानसभा क्षेत्र के संवेदनशील आैर अतिसंवेदनशील बूथों को चिन्हित किया है। इसमें चार अलग-अलग मापदंड तय किए गए हैं, जिसमें ऐसे क्षेत्र जहां 10 प्रतिशत से ज्यादा के पास मतदाता पहचान पत्र नहीं है, वोटर लिस्ट में नाम है लेकिन बीएलआे को नहीं मिले, 75 फीसदी से ज्यादा एक ही कैंडिडेट के वोटर्स आैर पूर्व चुनावों में जहां-जहां कानून व शांति व्यवस्था बिगड़ी है, ऐसे पोलिंग स्टेशनों आैर लोकेशन को क्रिटिकल की श्रेणी में रखा गया है।

बूथों की हर गतिविधि पर इनकी निगरानी भी रहेगी

वेब कास्टिंग टीम

अति संवेदनशील पोलिंग बूथों की निगरानी के लिए वेब कास्टिंग कैमरे लगाए जाते हैं, क्रिटिकल बूथों पर लाइव वेब कास्टिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके जरिये जिला मुख्यालय पर बनाए गए कंट्रोल रूम आैर राज्य निर्वाचन आयोग के कंट्रोल रूम से निगरानी हो सकेगी। इससे लाइव कवरेज भी देखा जा सकेगा। वेब कास्टिंग हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन पर चलता है। इसके जरिए मोबाइल, लैपटाप या डेस्कटॉप पर घर बैठे सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी भी जगह का लाइव नजारा देखा जा सकता है। यह ठीक उसी तरह काम करेगा, जैसे किसी फिल्म को दिखाने के लिए यू-ट्यूब काम करता है।


वीडियोग्राफर्स

संवेदनशील आैर अतिसंवेदनशील बूथों की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। मतदान शुरू होने से समाप्त होने तक वीडियोग्राफर्स की टीम मौके पर जमी रहेगी। साथ ही फोटोग्राफी भी करवाई जाएगी। जिन बूथों पर आचार संहिता का उल्लंघन पाया गया, वहां नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


माइक्रो आब्जर्वर

क्रिटिकल बूथ पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट व माइक्रो आब्जर्वर की निगरानी में मतदान होगा। शांतिपूर्ण आैर निष्पक्ष मतदान कराने की जिम्मेदारी इन पर होगी। कुछ बूथ ऐसे भी होंगे जहां, स्टेटिक मजिस्ट्रेट व माइक्रो आब्जर्वर दोनों मौजूद रहेंगे।

ताकि कोई भयभीत होकर नहीं करे मतदान

उपचुनावों में पिछले चुनावों की तुलना में तीन गुणा फोर्स बढ़ाने के पीछे कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के अलावा मकसद यह भी है कि कोई भी मतदाता भयभीत होकर मतदान नहीं करे। निष्पक्षता व पारदर्शिता बनी रहे। पैरा मिलिट्री फोर्स की सोलह कंपनियां चुनाव शुरूआत से मतगणना तक जिलेभर में तैनात रहेंगी। जिला निर्वाचन विभाग द्वारा इन कंपनियों के भोजन व आवास की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

29 जनवरी को अजमेर संसदीय क्षेत्र में होने जा रहे मतदान को लेकर जिला निर्वाचन विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। क्रिटिकल पोलिंग स्टेशन पर निगरानी आैर कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पैरा मिलिट्री फोर्सेज की 16 कंपनियां तैनात रहेंगी। इसके अलावा वेब कास्टिंग टीमें, वीडियोग्राफर्स आैर केंद्र के माइक्रो ऑब्जर्वर भी रहेंगे तैनात रहेंगे।
-गौरव गोयल, जिला निर्वाचन अधिकारी

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