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दस साल से कच्ची बस्ती की बच्चियों को फ्री एजुकेशन, IIT-IIM के सपनों को दे रहे उड़ान

सेंट एंसलम स्कूल के शिक्षक सुनील जॉस पिछले दस सालों से कच्ची बस्ती की लड़कियों को दे रहे हैं निशुल्क कोचिंग

अतुल सिंह | Last Modified - Jan 22, 2018, 08:50 AM IST

दस साल से कच्ची बस्ती की बच्चियों को फ्री एजुकेशन, IIT-IIM के सपनों को दे रहे उड़ान

अजमेर. सेंट एंसलम स्कूल के गणित के शिक्षक सुनील जॉस पिछले दस सालों से शहर की कच्ची बस्तियों की गरीब लड़कियों को निशुल्क कोचिंग देकर उनका भविष्य संवार रहे हैं, उनका
मकसद इन बच्चियों को आईआईटी, एम्स, आईआईएम जैसे देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिला कर अपने पैरों पर खड़ा करना है। रोजाना दो घंटे इन बच्चों को अब गणित के साथ सोशल साइंस आैर साइंस विषय भी पढ़ाया जा रहा है।

साइंस के लिए सेंट एंसलम स्कूल के साइंस टीचर एलन माइकल सेवा दे रहे हैं। खास बात देखिए - जॉस सरकारी स्कूल के हिंदी मीडियम के बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं, पिछले सालों में इन्हीं में 3 बच्चों को चयन आईआईटी के लिए हो चुका है, तीनों बच्चे आईआईटी में अध्ययनरत हैं। यही नहीं हर साल कम से कम 10 बच्चों को मजदूरी छुड़वाकर उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना भी जॉस के इस मिशन में शामिल है।

देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाकर गरीब परिवार के होनहारों को अपने पैरों पर खड़ा करना है मकसद

अमीर बन रहे हैं आैर अमीर, गरीब होते जा रहे हैं गरीब...जिद इस कड़ी को तोड़ने की
केरल के कालिकट के मूलनिवासी सुनील जॉस ने 1995 में सेंट एंसलम स्कूल बतौर गणित शिक्षक जोइन किया था। एमएससी (मैथ्स) एमएड जॉस की पत्नी शायनी थॉमस सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, जबकि पुत्र अनुपम इंजीनियरिंग आैर पुत्री श्रेया एमबीबीएस कर रही है। जॉस पिछले दस सालों से अब तक करीब 500 से अधिक विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग दे चुके हैं। इनमें से ज्यादातर छात्राएं हैं। शुरूआत में सिर्फ गणित विषय ही पढ़ाया जाता था, लेकिन इस साल से जोश के साथ उनके सहयोगी शिक्षक एलन माइकल भी कदम से कदम मिला रहे हैं। जोश गणित तो माइकल साइंस पढ़ाते हैं।

अपने व्यस्त शिड्यूल से दोनों शिक्षक रोजाना 2-2 घंटे का समय निकाल कर निशुल्क कोचिंग दे रहे हैं। जॉस ने कहा कि देश में अमीर आैर ज्यादा अमीर होते जा रहे हैं, आैर गरीब गरीब। इस कड़ी को तोड़ना है, इस कारण से कच्ची बस्तियों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाकर आईआईटी-आईआईएम जैसे संस्थानों में दाखिला दिलाना ही जीवन का उद्देश्य बना लिया है।

अपील - आप गोद लें इन बच्चियों को, देश का नाम रोशन करेंगी
शहरवासियों से अपील - कच्ची बस्तियों की इन होनहार बच्चियों को यदि सहयोग मिलता है तो यह बच्चियां देश का नाम रोशन करेंगी। लोग आगे आकर बच्चियों को उच्च शिक्षित बनाकर रोजगारोन्मुखी बनाने तक गोद लेकर यह जिम्मा उठा सकते हैं। हर साल कम से कम 10 बच्चों को मजदूरी छुड़वाकर उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना भी मेरे मिशन में शामिल है।

अच्छा काम, अच्छा परिणाम आैर फिर मिलते जाते हैं मददगार
जॉस ने बताया कि आज से दस साल पहले जब निशुल्क कोचिंग की शुरूआत की थी जब 15 से 20 बच्चियां पढ़ने आती थीं, लेकिन आज यह संख्या करीब 70 तक पहुंच गई है। सेंट्रल गर्ल्स, सावित्री, जवाहर सहित अन्य सरकारी स्कूलों के हिंदी मीडियम के विद्यार्थी इसमें शामिल हैं। पिछले साल जिला स्तर पर इन्हीं बच्चियों में से एक आरती मीणा ने गणित आैर साइंस दोनों विषयों में 100 में 100 अंक प्राप्त किए थे।

जॉस ने बताया कि वे दसवीं बोर्ड के विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, साइंस विषय लेने वाले इन विद्यार्थियों को बहुत ही नॉमिनल चार्जेज पर ट्रायम्फ एकेडमी ग्यारहवीं आैर बारहवीं की कोचिंग देकर इन होनहार बच्चियों को मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करवाती है। ट्रायम्फ एकेडमी के अनूप शर्मा व रिचा शर्मा ने तो बाकायदा इन बच्चियों तो पढ़ाने के लिए निशुल्क जगह तक मुहैया करवा रखी है। वहीं समय-समय पर डॉ. आलोक गर्ग का सहयोग भी मिलता रहता है। उन्होंने कहा कि लोगों की मदद की वजह से ही वे अपने मिशन में सफल हो रहे हैं।

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Web Title: Das saal se kchchi bsti ki bchchiyon ko free ejukeshn, IIT-IIM ke spnon ko de rahe uड़aan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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