अजमेर

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कई दफ्तरों के ताले नहीं खुले, पूरी तरह ठप रहा सरकारी कामकाज

राज्य कर्मचारी का सामूहिक अवकाश, आंदोलन का व्यापक असर दिखा, दिया धरना

Danik Bhaskar

Dec 09, 2017, 07:11 AM IST

अजमेर. अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एक दिन का सामूहिक अवकाश लिया। किसी दफ्तर में ताले लगे मिले तो, कई में खाली कुर्सियां। कुछ दफ्तरों के दरवाजे खुले तो वहां संविदा अथवा प्रोबेशन पर चल रहे कार्मिक काम करते दिखायी दिए। ऐसे दफ्तरों में अपने काम कराने आए लोगों को बैरंग लौटना पड़ा।


सरकार से 7वें वेतन आयोग को जनवरी 2016 से मय एरियर लागू करने व कटौतियों को वापस लेने की मांग को लेकर कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने का असर अजमेर शहर मुख्यालय व ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में रहा। जिला परिषद, राजस्थान लोक सेवा आयोग, सामाजिक न्याय विभाग, राजस्व मंडल, तहसील व जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय, कृषि विभाग, अजमेर विकास प्राधिकरण, सूचना सहायक कार्यालय, पशु पालन विभाग, शिक्षा विभाग के पातेय वेतन शिक्षक संघ के कार्मिक, सहायक कर्मचारी जीसीए, एमडीएस विवि के अराजपत्रित कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारी, कृषि, ग्राम सेवक तथा आयुर्वेद चिकित्सालयों के कार्मिक सामूहिक अवकाश पर रहे।


जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जमाबंदी, नकलें, तरमीम, किसानों को कृषि संबंधी सलाह अथवा सामान और आयुर्वेद का इलाज नहीं मिल सका। विश्वविद्यालय में छात्रों को परेशानी झेलनी, राजस्व मंडल में कोर्ट तो लगे लेकिन दूसरे कामकाज नहीं हुए। सूचना सहायकों के अवकाश के कारण किसी भी कार्यालय में इंटरनेट संबंधी काम नहीं हो सके। कलेक्ट्रेट परिसर में ही तहसील कार्यालय में ताला लगा मिला। वहां केवल प्रोबेशन पर चल रहे कार्मिक, जिला रसद कार्यालय में संविदा कार्मिक ही काम करते मिले। एसडीएम दफ्तर, कलेक्ट्रेट की संस्थापन शाखा सूनी मिली। जिला परिषद के हाल भी कुछ ऐसे ही थे।


ये नेता रहे मौजूद

कार्यक्रम में संयोजक संघर्ष समिति ज्ञानेन्द्र सिंह, विशाल वैष्णव, विजय कुमार, अनिल कुमार, गुलाब सिंह भाटी, उम्मेद मल टांक, सरिता चौधरी, कश्मीर सिंह, भंवरलाल मेहरड़ा, प्रभातीलाल, दयाशंकर, जसवंत वर्मा, नरेन्द्र सिंह, मुकेश कांकाणी, कांति कुमार शर्मा, नवीन शर्मा, रमेशचंद, सत्यनारायण सिंह, लक्ष्मी तंवर, गोपाल जोशी, राजीव गंगवार, विपुल त्रिवेदी, राजेश उबाना, जितेन्द्र शर्मा, शिरीष शर्मा, शैलेंद्र वैष्णव, सतीश शर्मा आदि उपस्थित रहे ।

राजस्थान के 65 कर्मचारी संगठन जुड़े हुए हैं

प्रवक्ता शर्मा के अनुसार संघर्ष समिति के आह्वान से राजस्थान के 65 संगठन जुड़े हुए हैं। अजमेर जिले में भी यही स्थिति है। केवल शिक्षक संघ सियाराम, शिक्षक संघ राधाकृष्णन तथा मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन इनके साथ नहीं है। इसके बावजूद कलेक्ट्रेट के ही 160 कर्मचारी अवकाश पर रहे।

लोगों को हुई परेशानी

लोग रोजमर्रा की तरह ही अपने कामों के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में सामजिक न्याय विभाग, तहसील, एसडीएम कार्यालय में आए लेकिन उन्हें वहां से निराश होकर लौटना पड़ा। कर्मचारी थे नहीं और संविदा व प्रोबेशन पर चल रहे कर्मचारी उनके काम कर नहीं सकते। सिंचाई विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग से संबंधित कामों को लेकर आए लोगों को लौटना पड़ा। लोगों के काम अब तीन दिन बाद यानी सोमवार को ही हो सकेंगे।

टकराव छोड़ने का दिया संदेश

सामूहिक अवकाश के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर कर्मचारी नेताओं सरकार को संदेश दिया कि वह टकराव छोड़े तथा जय चंदों, मनोज सक्सेना व महेन्द्र चौधरी से सतर्क रहे। यही जयचंद राजस्थान सरकार को नेस्तनाबूद करेंगे। मंत्रालय साथियों को इन्होंने गर्त में धकेल दिया। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व में इन्होंने 21 दिन का वेतन मंत्रालयों का कटवा कर उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। कर्मचारियों ने सुबह 10 बजे से 2.30 बजे तक जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर गेट मीटिंग की और नारे, तख्ती, बैनर से प्रदर्शन किया। इस मौके पर आमसभा को कई यूनिटों के नेताओं ने सं‍बोधित किया। कर्मचारियों में सरकार के प्रति भारी आक्रोश नजर आया। संख्या में महिला कर्मचारी भी सामूहिक अवकाश पर रही ।


प्रवक्ता दिनेश शर्मा ने बताया कि सभा को पूर्व जिलाध्यक्ष भंवर सिंह जोधा, कश्मीर सिंह ने भी सं‍बोधित करते हुए कहा कि सरकार 7वें पे कमीशन को जनवरी, 2016 से मय एरियर के लागू करे। कटौतियों को वापस लें अन्यथा आगामी चुनाव में परिणाम भुगतान को सरकार तैयार रहे। सभा का संचालन कांति शर्मा ने किया। अंत में सभी कर्मचारियों ने महासंघ अध्यक्ष बद्री प्रसाद शर्मा के स्वास्थ्य लाभ की ईश्वर से कामना की।

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