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उपचुनाव: पायलट, चौधरी सहित कई नेताओं को 27 को छोड़ना पड़ेगा अजमेर

तीन हजार से ज्यादा बाहरी नेता, कार्यकर्ता बनेंगे सिरदर्द, नियमानुसार बाहरी नेता चुनाव क्षेत्र में प्रचार समाप्ति के बाद

Danik Bhaskar | Jan 25, 2018, 08:05 AM IST

अजमेर. कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी, राज्य केबिनेट मंत्री किरण माहेश्वरी सहित कांग्रेस और भाजपा के तमाम छोटे-बड़े नेताओं को 27 जनवरी की शाम को 6 बजे बाद अजमेर छोड़ना पड़ेगा। ऐसा चुनाव आचार संहिता के तहत होगा। लेकिन फिर भी दोनों पार्टियों के तीन हजार से अधिक कार्यकर्ता प्रशासन के लिए सरदर्द बनेंगे। प्रशासन को अब इन नेता और कार्यकर्ताओं को 27 जनवरी को जिला बदर करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रशासन ने भाजपा और कांग्रेस को जिले के बाहर से आए नेता और कार्यकर्ताओं को बाहर भेजने की नसीहत दी है।

प्रशासन ने इनकी पहचान कर जिला बदर करने के लिए अलग अलग टीमों का गठन भी किया है। पिछले दस दिनों से दोनों दलों ने प्रदेश स्तरीय नेता और कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज प्रचार के लिए संसदीय क्षेत्र में झोंक रखी हैं। नेताओं की संख्या पांच सौ से अधिक हैं। इनमें मंत्री और विधायक भी शामिल हैं। दोनों पार्टियों ने दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं अजमेर में है। यह नेता और कार्यकर्ता जिले की हर विधानसभा में फैले हुए हैं। 27 जनवरी को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद जिले के बाहर से आए नेता- कार्यकर्ता जिले में प्रवास नहीं कर सकते हैं।

बाहरी नेताओं को अंडरग्राउंड रखकर कार्य करने की रणनीति

गौरतलब है कि नसीराबाद विधानसभा के उप चुनाव में मतदान के दिन मंत्री अनिता भदेल के विधानसभा क्षेत्र में मौजूद रहने पर कांग्रेसियों ने काफी हंगामा मचाया था। प्रशासन को भी मामला शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। प्रशासन को इस बार भी यहीं चिंता सता रही है।

सूत्रों का कहना है कि फजीहत से बचने के लिए मंत्री और विधायक तो प्रचार के बाद निकल जाएंगे, लेकिन दोनों पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता बाहर जाएंगे या नहीं। इसको लेकर संदेह है। सूत्रों का कहना है कि बाहर से आए कार्यकर्ताओं को दोनों ही पार्टियों के स्थानीय कार्यकर्ता और प्रशासन नहीं पहचानते हैं। यह होटलों और नाते रिश्तेदारों के घरों में ठहरे हुए हैं। ऐसे में प्रशासन को इन लोगों को चिन्ह्ति करने के लिए कोई तिलिस्म नहीं है। मतदान के दिन इन कार्यकर्ताओं के सक्रिय होने से अनावश्यक विवाद खड़े हो सकते हैं।

अजमेर में लंबे समय बाद उप चुनाव हो रहा है। इसी साल विधानसभा चुनाव होने है। इसके चलते भाजपा और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। भाजपा सत्तारूढ़ होने की वजह से प्रशासन को नेता और कार्यकर्ताओं को बाहर भेजने में अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी। प्रशासन के रुख को देखते हुए दोनों ही पार्टियों ने अपने नेता और कार्यकर्ताओं को अंडर ग्राउंड रहकर काम करने की योजना बना रही हैं।

..उत्तर का एमएलए दक्षिण में नहीं कर सकेगा प्रचार

27 जनवरी को शाम 6 बजे बाद चुनाव प्रचार थम जाएगा। जिले के बाहर से आए मंत्री, विधायक, सांसद व पार्टी नेताओं आैर कार्यकर्ताओं को अजमेर संसदीय क्षेत्र छोड़ना होगा। मतदाता, उम्मीदवार आैर मौजूदा एमएलए, एमपी के अलावा सुरक्षा प्राप्त ऐसे एमएलए व एमपी जो यहां के मौजूदा वोटर हों, वही यहां रुक सकेंगे। उल्ल्घंन करने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। इसमें मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी का प्रावधान है। होटल, गेस्ट हाउस आैर धर्मशालाओं में ठहरे हुए सभी यात्रियों की जांच पड़ताल की जाएगी।
-गौरव गोयल, जिला निर्वाचन अधिकारी

प्रशासन ने किया टीमों का गठन

कलक्टर गौरव गोयल ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार 27 जनवरी को सायं छह बजे बाहर से आए नेता और कार्यकर्ताओं को जिला छोड़ना पड़ेगा। प्रमुख पार्टियों सहित अन्य उम्मीदवार को इससे अवगत करा दिया है। प्रशासन ने अपने स्तर पर भी इनको जिले से बाहर भेजने के लिए पुख्ता व्यवस्था कर रखी है।