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हांफता दिखा 5 साल का पैंथर, पकड़ने से पहले ही गिर कर उसने दम तोड़ दिया

सरवीना में कुएं में मिले सिरकटे पैंथर की मौत भी जहर से होने की आशंका, मसूदा क्षेत्र में पैंथर के होने की आशंका

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 08:37 AM IST

नसीराबाद/जेठाना. बिठूर के समीप गांव पंचमता में मंगलवार सुबह दिखे एक पैंथर ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी। लेकिन इस दहशत का अंत पैंथर की रहस्यमयी मौत के साथ हो गया। पैंथर की मौत की वजह तो पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी, लेकिन जिले में दो दिन में दो पैंथर की मौत ने सवाल भी खड़े कर दिए हैं। इससे पहले जवाजा के सरवीना गांव में कुएं में पैंथर का शव मिला था। आरोप है कि उसे बकरी में जहर देकर मारा गया था, फिलहाल उसकी भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आना बाकी है।


गांव पंचमता में मंगलवार सुबह जंगल में मवेशी चरा रहे एक ग्रामीण को पैंथर दिखा। उसने तुरंत अन्य ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। इस बीच बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। पैंथर पहाड़ी पर बैठा हांफ रहा था। वन विभाग के कुछ कर्मचारी वहां पहुंच गए और उसे पकड़ने के लिए प्लानिंग करने लगे। अचानक ग्रामीणों की भीड़ बढ़ते देख पैंथर दहाड़ा और कुछ देर बाद ही वह गश खाकर गिर गया। उसके पास जाकर जांच की तो थोड़ी देर तो सांसें चलती रही, बाद में उसने दम तोड़ दिया। तब तक मांगलियावास थाना प्रभारी अरविंद सिंह सहित डीएफओ अजय चित्तौड़ा, एसीएफ केके गुप्ता व अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।

पैंथर का शव नसीराबाद राजकीय पशु अस्पताल लाया गया, जहां पशु चिकित्सक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. विनय यादव और डॉ. मुबीन के बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। इस दौरान अंधेरा हो जाने पर अधिकारियों ने तय किया कि पैंथर का अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा।

सरवीना में मिला सिर कटा पैंथर
जवाजा के समीप सरवीना में गत 10 दिसंबर को एक सप्ताह पुराना सिर व चारों पांव कटा पैंथर का शव कुएं में मिला था। उसका भी पोस्टमार्टम करवाया गया था। ग्रामीणों का ही आरोप है कि उसे किसी ग्रामीण ने ही बकरी में जहर मिलाकर दे दिया था। हालांकि पांव कटे मिलने से शिकार किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आना शेष है।

गणना में नदारद पैंथर
हर साल जंगली जानवरों की गणना की जाती है पर पैंथर गणना में हमेशा नदारद ही रहते है। क्षेत्र में हमेशा किसी ने किसी हादसे में मौत होती रहती है। वन विभाग केवल औपचारिकता करता है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 की वन्य जीव गणना में भी जिले में एक भी पैंथर नजर नहीं आया था। जबकि ब्यावर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में कई सालों से पैंथर के शिकार की घटनाओं से दहशत पसरी हुई है।

करीब 5 वर्ष का था पैंथर
पैंथर करीब 5 वर्ष का था तथा नर था। वन विभाग के मुताबिक यह पैंथर संभवतया टॉडगढ़ अथवा जवाजा के पहाड़ी क्षेत्र से विचरण करते हुए आने की आशंका है।
गत वर्ष राजगढ़ की पहाड़ियों में पैंथर का जोड़ा अपने शावकों के साथ मिला था।

मसूदा में भी पैंथर?
मसूदा क्षेत्र में भी ग्रामीण कई दिनों से पैंथर के होने की शिकायत कर रहे हैं मगर वन महकमा किसी अन्य वन्य जीव की वजह से मवेशियों की मौत की पुष्टि कर रहा है। गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व भी दौलतपुरा व अासपास पैंथर देखा गया था लेकिन पकड़े जाने से पहले ही खोह में छिप गया जिसे वन महकमा पिंजरा लगाकर भी नहीं पकड़ पाया था। आशंका इस बात की भी है कि वहां भी पैंथर ग्रामीणों के आक्रोश का शिकार न हो जाए।

वन विभाग का इनकार

पंचमता के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पैंथर को पहाड़ी पर देखा था और ग्रामीण युवक बड़ी संख्या में पहाड़ी पर चढ़ गए थे। कुछ ने पैंथर को घेरकर पत्थरबाजी शुरू की तो पैंथर ने डूंगरी से छलांग लगा दी, जिससे वह ज्यादा ऊपर से गिरने के कारण घायल हो गया और उसके बाद वह ज्यादा चल नहीं पाया। दूसरी ओर वनकर्मियों ने पत्थर फेंके जाने की घटना से इनकार किया है। वन कर्मियों ने बताया कि पैंथर का एक पैर जख्मी है और उसमें 4-5 दिन पुराना घाव है। पैंथर के पीछे के पैरों के ऊपर की तरफ पीठ पर भी एक घाव था जो किसी नुकीली चीज के चुभने से हुआ प्रतीत होता है।


पैंथर ने पहले किया था कुत्ते का शिकार
जिला वन अधिकारी अजय चित्तौड़ा ने बताया कि पैंथर काफी हट्टा-कट्टा था। उसके शव के थोड़ी ही दूरी पर एक कुत्ते का शव मिला था, यानी उसने कुत्ते का शिकार किया था। दोनों के शवों का विसरा जांच करवाया जा रहा है। हो सकता है कूदने या अन्य कोई वजह से कोई अंररूनी घाव हो गया हो, इस वजह से भी मौत संभव है। मौत की असली वजह तो जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगी।