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ICU में रात को मरीज की तबीयत बिगड़ी, देखने नहीं आया डॉक्टर; सुबह दम तोड़ा

दिन भर मरीज होते रहे परेशान, कोई सुनने वाला नहीं, वार्ड में भी नहीं आते डॉक्टर

Bhaskar News | Last Modified - Dec 21, 2017, 08:06 AM IST

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    अजमेर. डॉक्टरों की हड़ताल अब मरीजों के लिए जान लेवा साबित होने लगी है। संभाग के सबसे बड़े जवाहर लाल नेहरु अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज की बीती रात तबीयत खराब हो गई लेकिन उसे देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया। उपचार के अभाव में मरीज की सुबह होते-होते मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि इसकी जानकारी अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन को भी नहीं है। इस तरह के हालात लगभग सभी वार्डों के हैं जहां पर रात के समय कोई डॉक्टर ड्यूटी पर है ही नहीं। वार्ड में भर्ती मरीज नर्सिंग कर्मियों के भरोसे रहते हैं।


    सेवारत चिकित्सकों एवं रेजीडेंट की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमराने लगी हैं। मरीजों को अस्पताल आने पर इलाज नहीं मिल रहा है। आउट डाेर में डॉक्टर भी समय पर नहीं आ रहे हैं। सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लग जाती है। पहले दिखाने को लेकर मरीज आपस में झगड़ने लग जाते हैं। सुरक्षा गार्ड बीच बचाव करता नजर आता है। जबकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि जेएलएन अस्पताल में माकूल इंतजाम किए गए हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि ना तो आउट डोर में और ना ही आपातकालीन विभाग में मरीजों को इलाज मिल रहा है।

    लाइन में खड़े मरीज को आ गए चक्कर

    केसरपुरा निवासी दुर्गा सिंह मधुमेह का रोगी है। उपचार के लिए यहां पर आया था। घंटों लाइन में लगने के बाद एकाएक चक्कर आने लगे और वह नीचे बैठ गया।उसका कहना था कि डॉक्टरों की बड़े अस्पतालों में तो डॉक्टर मिलने चाहिए। गांव से आने पर पता चलता है कि यहां पर भी डॉक्टर नहीं है। पीसांगन निवासी बन्नी बाई ने बताया कि यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है।

    मरीज की मौत से बेखबर रहे अस्पताल अधीक्षक भी

    सरवाड़ निवासी परमेश्वर ने बताया कि उनकी सास की तबीयत खराब होने पर 15 दिसंबर को जेएलएन अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती करवाया गया। यहां से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। ज्यादा तबीयत खराब होने पर मेडिसन आईसीयू में भेज दिया। महज पेट में दर्द होने पर भर्ती करवाया गया, पेट का दर्द तो ठीक हुआ नहीं लेकिन उनकी सास की मौत जरूर हो गई। बीती रात तबीयत खराब होने पर कोई डॉक्टर देखने के लिए भी नहीं आया।

    वार्ड हो रहे हैं खाली...

    हड़ताल की वजह से भर्ती मरीज भी अब अस्पताल में रुकना पसंद नहीं कर रहे हैं। मजबूरी में कई मरीज को छुट्टी लेकर जा रहे हैं तो कुछ को अस्पताल प्रबंधन घर भेज रहा है। कई वार्ड खाली हो गए हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि जब यहां पर डॉक्टर ही नहीं है तो रुकने से क्या फायदा। रात में वार्ड में डॉक्टर होता नहीं है, दिन में जब भी डॉक्टर राउंड पर आए तो एक ही बात कहते नजर आते हैं कि आपके मरीज की हालत गंभीर है।

    जानकारी लेंगे

    रात के समय वार्ड में डॉक्टर नहीं है इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। इस बारे में पता लगाया जाएगा। यदि कहीं डॉक्टर नहीं है वहां पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि डॉक्टर उपलब्ध हो। रेजीडेंट डॉक्टर काम पर नहीं आए हैं। बुधवार का आउट डोर 1700, 24 घंटे में भर्ती किए गए 131 और भर्ती मरीज 870 हैं।
    -डॉ. अनिल जैन, अधीक्षक जेएलएन अस्पताल

    निशक्तजन को ड्रेसिंग करवाने में काटने पड़े चक्कर

    रेलवे स्टेशन के बाहर चाय की होटल पर काम करने वाले दिलीप को ड्रेसिंग करवानी थी। उसका एक पैर कट चुका है। हर दो दिन बाद ड्रेसिंग के लिए अस्पताल आना पड़ता है। पैर में जख्म की वजह से नकली पैर भी नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे में वह जमीन पर घिसट-घिसट कर चलने को मजबूर है। पूरे अस्पताल का चक्कर लगाने के बाद किसी को भी उस पर रहम नहीं आया।

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Web Title: Patient Died Due To Doctors Strike In Ajmer
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