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मरीज के परिजन खुद डर-डर कर काट रहे थे प्लास्टर, हड़ताल ने पैदा की परेशानी

वार्ड ब्वॉय आया और कहा कि मेडिकल स्टोर से ब्लेड खरीदकर ले आओ और अपने-अपने मरीज का प्लास्टर काट लो।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 07:21 AM IST

अजमेर. रात को हड़ताल तो खत्म हो गई लेकिन बुधवार का दिन अस्पतालों में बहुत बुरा बीता। जेएलएन अस्पताल का अस्थिरोग विभाग। प्लास्टर रूम में कोई स्टाफ नहीं। दर्जनों मरीज प्लास्टर कटवाने के लिए इंतजार में थे। एकाएक वार्ड ब्वॉय आया और कहा कि मेडिकल स्टोर से ब्लेड खरीदकर ले आओ और अपने-अपने मरीज का प्लास्टर काट लो। अपने मरीज की परेशानी को देखते हुए परिजन डर-डर कर प्लास्टर काटने लगे।

- सेवारत चिकित्सकों एवं रेजीडेंट डॉक्टर्स की 12 वें दिन भी हड़ताल जारी रही। गुरुवार से डॉक्टर काम पर लाैट आएंगे। अस्पताल प्रबंधन के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
- मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है। उन्हें घंटों भटकना पड़ रहा है। इसके बाद भी यहां पर उपचार नहीं मिल रहा है। अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह से पटरी से उतरने लगी।

- आउट डोर में महज एक ही डॉक्टर और सैकड़ों मरीज कतार में घंटों नंबर नहीं आने पर मरीज ठंडे फर्श पर बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करने लगे। कई मरीज व्यवस्थाओं को कोसते नजर आए।

कई दौर की चली वार्ता, रात आठ बजे हुआ समझौता

आरिसदा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनंत कोटिया ने बताया कि गुरुवार को सीएम राजे के हस्तक्षेप के बाद बनी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, परिवहन मंत्री युनूस खान और सहकारिता मंत्री अजय किलक की मौजूदगी कई दौर की वार्ता चली। समझौते में आरिसदा के प्रदेशाध्यक्ष को चूरू के स्थान पर सीकर में सीएमएचओ लगाया गया है। शेष 11 डॉक्टर्स के तबादले जल्द निरस्त कर दिए जाएंगे। इसका आश्वासन परनामी ने दिया है। इसी प्रकार एरियर संबंधी विसंगति को दूर कर दिया गया है। एकल पारी का निर्णय मुख्यमंत्री पर छोड़ दिया गया है। इसी प्रकार रेजीडेंट्स की भी सभी मांगे मान ली गई है। हड़ताल के दौरान अनुपस्थित रहने पर यह पीएल एवं सीएल में छ़ुट्टियों में बदल दिया जाएगा।

मंशा नहीं थी मरीज परेशान हों, लेकिन हालात कुछ ऐसे बन गए
डॉ. कोटिया ने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर वर्ष 2011 से संघर्षरत थे। हर बार उन्हें आश्वासन ही दिया जाता रहा। नबंवर माह में भी आंदोलन किया और समझौता हो गया था, लेकिन मांगंे पूरी नहीं हुई थी। मजबूरन एक बार फिर सख्त कदम उठाना पड़ा। इन सबके पीछे उनकी मंशा कभी यह नहीं थी कि मरीजों को परेशानी हो, लेकिन प्रदेश में हालात कुछ ऐसे बन गए जिसकी वजह से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।