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250 डॉक्टर्स काम पर नहीं आए, रेजीडेंट की भी 18 से हड़ताल की धमकी

जिलाध्यक्ष-बीसीएमओ सहित पांच डॉक्टर्स गिरफ्तार, पाबंद कर 6 घंटे बाद जमानत पर छोड़ा

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 07:14 AM IST

अजमेर. 18 दिसंबर से सामूहिक बहिष्कार पर जाने से पहले ही रेस्मा लागू कर सेवारत चिकित्सकों की गिरफ्तारी से डॉक्टर्स भड़क उठे हैं। सरकार के इस कदम ने आग में घी का काम किया है। शनिवार को जिला पुलिस ने ऑल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रदीप जयसिंघानी, भिनाय बीसीएमओ सहित पांच डॉक्टर्स को गिरफ्तार कर लिया।

इसके विरोध में जिले भर के 250 डॉक्टर्स काम पर नहीं आए। इससे जिले भर में बड़े सरकारी अस्पतालों को छोड़कर शेष में चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इधर अजमेर में भी रेजीडेंट डॉक्टर्स ने भी 18 दिसंबर से ही हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। किशनगढ़-ब्यावर-केकड़ी-बिजयनगर सहित सीएचसी, पीएचसी और डिस्पेंसरियों पर चिकित्सक नहीं पहुंचे।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस लाइन डिस्पेंसरी में तैनात आरिसदा के जिलाध्यक्ष डॉ. जयसिंघानी ने शनिवार सुबह 9 बजे ही मेडिकल लीव ली और वह अपनी कार से किशनगढ़ की रवाना हो गए। उनकी कार के पीछे-पीछे सिविल लाइन थाना पुलिस की जीप भी चलने लगी। सुबह 9.30 बजे गेगल टोल नाके पर पुलिस ने उन्हें रोक कर रेस्मा के तहत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उन्हें सिविल लाइन थाने में ले आई। शाम साढ़े तीन बजे उन्हें एसडीएम के समक्ष पेश किया गया। जहां उनसे शपथ लेकर पाबंद किया गया कि वे कार्य का बहिष्कार नहीं करेंगे और ना ही किसी अन्य चिकित्सक को प्रेरित करेंगे।


इसके बाद शाम चार बजे उनकी रिहाई संभव हो सकी। इसी प्रकार भिनाय बीसीएमओ डॉ. सुरेश शर्मा, टीबी अस्पताल से डॉ. राजेश टेकचंदानी और किशनगढ़ के यज्ञनारायण अस्पताल से डॉ. मेहराव अली और मनोज सैनी को गिरफ्तार किया गया। सभी पाबंद कर रिहा करने के आदेश दिए गए।


गिरफ्तारी का विरोध, कार्य का बहिष्कार
सुबह जैसे ही सेवारत चिकित्सकों की गिरफ्तारी शुरू हुई इसका विरोध भी शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होते ही चिकित्सकों ने तय समय से पहले ही कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी। कई ऐसे भी चिकित्सक थे जिन्हें गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी और वे काम पर आ गए थे। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला को वे भी चले गए।

अस्पताल प्रशासन ने नहीं किया सामूहिक अवकाश स्वीकार

जेएलएन अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने बताया कि अस्पताल के 12 चिकित्सकों ने एक साथ सामूहिक अवकाश का पत्र उन्हें दिया और वे काम पर नहीं आए। अस्पताल प्रशासन ने सामूहिक अवकाश स्वीकार नहीं करते हुए उपस्थिति रजिस्टर में उनकी अनुपस्थिति दर्ज की गई। काम पर नहीं आने वाले चिकित्सकों में डॉ. डॉ. विक्रांत शर्मा, डॉ. एमजी अग्रवाल, डॉ. राजेश वर्मा, डॉ. हेमचंद, डॉ. भंवर खलदानिया, डॉ. रजनी भार्गव, डॉ. सीमा अजमेरा, डॉ. बलराम बच्चानी, डॉ. मीना छतवानी, डॉ. सोनल असेरी और डॉ. सुभाष सैनी काम पर नहीं आए। डॉ. जैन ने बताया कि उन्होंने इसकी जानकारी राज्य सरकार को भिजवा दी है।

ये कैसा लोकतंत्र... अब तो सरकार ने उकसा दिया
आरिसदा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनंत कोटिया ने डॉक्टर्स की गिरफ्तारी से लोकतंत्र की हत्या हो रही है। मांगें मानना तो दूर उनका दमन करना शुरू कर दिया है। सरकार का यह कदम आत्मघाती साबित होगा। सरकार के निर्देश पर करीब 15 से 20 सेवारत चिकित्सकों की गिरफ्तारी की गई है। इससे आंदोलन को और गति मिलेगी। जिले में कार्यरत 300 सेवारत चिकित्सकों में से 250 चिकित्सक पर काम पर नहीं आए।

रेजीडेंट ने भी भरी हुंकार

- जवाहर लाल मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। शनिवार को अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन को ज्ञापन सौंपकर उन्होंने भी 18 दिसंबर सुबह 8 बजे से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

- रेजीडेंट डॉक्टर्स जेएलएन इकाई के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह लामरोर ने बताया कि 12 नवंबर 2017 को सरकार एवं रेजीडेंट डॉक्टर्स के बीच लंबित मांगों को लेकर सहमति बन गई थी और मौखिक समझौता भी हो गया था। सरकार ने मांगों पर क्रियान्विति करने के बजाए दमनात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी। सरकार के इस कदम से भारी आक्रोश है।

- उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि 24 घंटे के भीतर सेवारत चिकित्सकों सहित उनकी मांगों की क्रियान्विति के आदेश जारी किए जाए और दमनात्मक कार्यवाही वापस ली जाए।

- डॉ. लामरोर ने बताया कि जयपुर रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी सर्व सम्मति से निर्णय लिया है कि 18 दिसंबर से कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।

- इस मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. जैन ने बताया कि रेजीडेंट डॉक्टर्स मिले थे। उनकी मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

^ब्यावर, केकड़ी, बिजयनगर और किशनगढ़ अस्पताल बंद रहे, इसी प्रकार 20 सीएचसी, 63 पीएचसी और 20 डिस्पेंसरियों में अधिकांश में डॉक्टर नहीं आए। इसकी जानकारी जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार तक पहुंचा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है। पूर्व की भांति आयुष, आयुर्वेद चिकित्सक एवं जेएलएन मेडिकल कॉलेज से मदद ली जाएगी।
-डॉ. केके सोनी, सीएमएचओ