अजमेर

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6 कपल्स के जुड़वां बच्चे, सभी पढ़ते हैं एक ही स्कूल में

‘मिसटेकन आइडेंटिटी’ के कारण कई बार शिक्षिकाएं भी रह जाती हैं हतप्रभ, रोचक हैं पल-पल के नजारे

Dainik Bhaskar

Dec 25, 2017, 08:04 AM IST
Twins of six couples study in same school in ajmer

अजमेर. ‘एक से भले दो’, ये सुनने में भले ही बड़ा भला सा एहसास दे जाता है, लेकिन कैसा हो अगर दोनों दिखने में हों बिल्कुल एक जैसे हो तो? कुछ ऐसी ही मजेदार स्थितियों रोजाना देखने को मिलती हैं अजयनगर क्षेत्र के एक स्कूल में। यह सुनने में भले ही आपको आश्चर्य लगे, अजमेर के अजयनगर क्षेत्र में एक किलोमीटर के दायरे में छह कपल्स के जुड़वां बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल में आते-जाते समय बच्चों को देखने के लिए लोगों का तांता लगने लगा है।

- इधर, स्कूल निदेशक इंडियन आर्मी के एजुकेशन कोर से रिटायर्ड एनसीआे सोहनलाल सारवान के साथ प्रिंसिपल आैर दूसरी टीचर्स भी कई बार जुड़वां के एक जैसे चेहरों से धोखा खा जाते हैं। बच्चों के गले में टंगे आईकार्ड से उनकी सही पहचान हो पाती है।

- ‘जुड़वां’, ‘अंगूर’ ‘सीता और गीता’, ‘राम और श्याम’ आैर ‘चालबाज’ सहित अन्य कई ऐसी फिल्में आपने जरूर देखी होंगी, जिनमें जुड़वां भाइयों या बहनों के हमशक्ल होने के कारण अनेक मजेदार पल बनते हैं।

- इन दिनों टीवी पर चल रहे शो ‘इंडियाज बेस्ट जुड़वां’ आैर ‘जुड़वां-2’ के कारण भी जुड़वां बच्चों की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। रि-एल लाइफ में तो इनके किस्से रोमांचक और रोचक होते ही हैं, लेकिन आज आपको रि-एल लाइफ के जुड़वां बच्चों से जुड़े एक अनोखे स्कूल अजयनगर स्थित मदर्स होम प्ले स्कूल में ले चलते हैं। यहां इनकी पहचान में टीचर्स भी खा जाते कभी-कभी धोखा।

‘मिसटेकन आइडेंटिटी’ के कारण शिक्षिकाएं भी हतप्रभ

- अजयनगर स्थित मदर्स होम प्ले स्कूल में प्लेग्रुप में छह जोड़ी जुड़वां बच्चों की हैं।

- स्कूल की प्रिंसिपल प्रेरणा सारवान बताती हैं कि यह महज इत्तफाक है कि सभी बच्चे एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले हैं, आैर 2 से 3 साल की बीच की उम्र के हैं।

- नितिशा और नायरा जुड़वां बहनें हैं, विशाल-विकास जुड़वां भाई। ऐसे ही पार्थ-प्रीत, हरीश-नंदनी आैर हितेश-डिंपल जुड़वां भाई बहन हैं। वहीं, लक्षिता-अक्षिता जुड़वां बहनें। सभी बच्चे प्लेग्रुप में पढ़ते हैं। कुछ जुड़वां भाई-बहन होने के कारण आसानी से पहचाने जाते हैं, लेकिन बाकी की पहचान के लिए टीचर्स की भी परीक्षा हो जाती है।

- कई बार ‘मिसटेकन आइडेंटिटी’ के कारण वे स्वयं हतप्रभ रह जाती हैं तो कभी अपनी ही गलती पर मुस्कुरा देती हैं।

#रोचक हैं पल-पल के नजारे

1.करे कोई भरे कोई
- ‘हर्षित-हनीश की शक्ल बिलकुल एक सी है। इन्हें पहचानने के लिए कोई निशानी ढूंढ पाना भी कठिन हो जाता है। इसलिए किसी भी कंफ्यूजन से बचने के लिए उनके आई कार्ड चेक किए जाते हैं। ऐसा ही विशाल-विकास के साथ भी होता है। दोनों जुड़वां जोड़ी बेहद शरारती हैं। कई बार एक शरारत करता है तो डांट दूसरे को पड़ जाती है।

2. सूरत इतनी मिलती है कि पहचानना कठिन
लक्षिता-अक्षिता की सूरत इतनी मिलती है कि पहचानना कठिन हो जाता है। एक बार इनमें से एक बहन ने अपना टिफिन गिरा दिया और वो खुद दूसरी सीट पर जाकर बैठ गई। डांट उस बहन को पड़ गई जिसका कसूर था ही नहीं।


3. एक चुस्त, दूजा सुस्त
- जुड़वां भाई-बहन हितेश-डिंपल, पार्थ-प्रीत आैर हरीश-नंदनी में से एक चुस्त है तो दूजा थोड़ा सुस्त। सभी जुड़वां बच्चे स्कूल शिक्षिकाओं आैर अन्य स्टॉफ के ही नहीं, बल्कि आसपास के लोगों के भी चेहते हैं।

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Twins of six couples study in same school in ajmer
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