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चंद्रग्रहण के दौरान बंद रहे मंदिरों के कपाट, श्रद्धालुओं ने किया दान-पुण्य

चंद्रग्रहण के दौरान शहर के मंदिरों में अल सुबह ही पूजा अर्चना और आरती की गई। कई जगह सूर्योदय से पूर्व मंदिरों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:10 AM IST

चंद्रग्रहण के दौरान शहर के मंदिरों में अल सुबह ही पूजा अर्चना और आरती की गई। कई जगह सूर्योदय से पूर्व मंदिरों में भगवान का शृंगार कर आरती की गई। श्रद्धालुओं ने उपासना की। सुबह 8.21 बजे खग्रास चंद्रग्रहण का सूतक लगा। मुख्य ग्रहण शाम 5.21 बजे से रात 8.45 बजे तक रहा।

पंडित ओमप्रकाश ओझा ने बताया कि ग्रहण का मध्य भाग 7 बजकर 3 मिनट पर रहा। कई जगह पर गंगाजल कई तुलसी का पत्ते तो कहीं पर डाब रखकर मंदिरों के पट और दरवाजे बंद कर दिए गए। महिलाओं ने सुबह जल्दी पूजा की और ठाकुर जी को भोग लगाया गया। बड़े बुजुर्गों ने अपने इष्ट का मंत्र जाप किया, कई महिला और पुरुषों और साधु संतों ने अपने गुरुमंत्र का जाप किया। मदार स्थित सिंगलपुर शनि मंदिर के पुजारी लालचंद ने बताया कि शनि मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। रात्रि 9 बजे मंदिर परिसर की सफाई और धुलाई कर पूजा अर्चना की गई। ब्रिज वाले बालाजी के महंत राजू ओझा ने बताया कि सूतक के बाद मंदिरों में सभी मूर्तियों की शुद्धि की गई और नए वस्त्र पहनाकर भगवान की आरती कर भोग लगाया गया। मंदिर परिसर के पाश कुछ श्रद्धालुओं ने दान पुण्य किया। प्राचीन शनि मंदिर फाउण्डेशन पुष्कर की ओर से पुष्कर घाटी पर भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान संत महात्माओं और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

पुष्कर. चंद्र ग्रहण के कारण बुधवार को बंद रहे ब्रह्मा मंदिर के कपाट।

पुष्कर| खग्रास चंद्र ग्रहण के चलते बुधवार दिनभर ब्रह्मा मंदिर समेत पुष्कर के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे तथा रात को ग्रहण के मोक्ष के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण किया गया तथा शयन आरती के बाद दोबारा मंदिरों के कपाट बंद कर दिए। रात को हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्कर सरोवर में ग्रहण का शुद्धि व प्रायश्चित स्नान किया।

खग्रास चन्द्र ग्रहण का सूतक शुरू होने के साथ ही सुबह 8.21 बजे ब्रह्मा मंदिर समेत सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। दिनभर मंदिरों के दरवाजे बंद रहे। शाम को 5.21 बजे ग्रहण का प्रभाव शुरू हुआ तथा 3 घंटे 24 मिनट बाद रात 8.45 ग्रहण मोक्ष हुआ। ग्रहण काल के दौरान तांत्रिकों ने एकांत में बैठ कर अनुष्ठान किए। श्रद्धालुओं ने पुष्कर सरोवर के घाटों पर भजन कीर्तन किया तथा दोनों हाथों से दान पुण्य किया। बाजार बंद हो गए, जिससे बाजारों में भी सन्नाटा पसर गया। ग्रहण का प्रभाव खत्म होने के बाद पुजारियों ने अपने-अपने मंदिरों में पुष्कर सरोवर के जल से शुद्धिकरण किया तथा शयन आरती की। श्रद्धालुओं ने ग्रहण पूर्ण होने के बाद सरोवर में स्नान किया। पंडित कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि बुधवार को संवत 2074 का सबसे बड़ा एवं आखिरी ग्रहण था।

पुष्कर. चंद्र ग्रहण पूर्ण होने के बाद पुष्कर सरोवर में शुद्धिस्नान करते श्रद्धालु।

अजमेर. मदार स्थित शनि सिंगलापुर मंदिर के बंद कपाट।

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