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भाग्य की भूमि पर ही पुरुषार्थ का बीजारोपण : सुधासागर महाराज

अजमेर|ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में बुधवार सुबह आयोजित धर्मसभा में सुधा सागर महाराज ने कहा कि यह संसार एक...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 03:10 AM IST
अजमेर|ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में बुधवार सुबह आयोजित धर्मसभा में सुधा सागर महाराज ने कहा कि यह संसार एक नाट्यशाला है, जिसमें हम सभी अपनी-अपनी पात्रतानुसार रोल अदा करते हैं। जो जैसे कर्म को करता है, उसे वैसा ही कार्य करने को मिल जाता है। कोई राज का तो कोई रंग का। संसार में जो दिखाने की क्रिया है, वह नाटक है। स्वयं को देखने की क्रिया धर्म कहलाती है। संसार के रंगमंच पर कर्मों का प्रपंच हुए बिना कोई भी पात्र अदा नहीं किया जा सकता। भाग्य की भूमि पर ही पुरुषार्थ का बीजारोपण हो सकता है।

महाराज ने कहा कि भाग्य अच्छा होने पर कम पुरुषार्थ भी फलदायी होता है। चित्त की भूमि को पहले उपजाऊ बनाओ, जिससे आपका पुरुषार्थ धर्म का रूप ले सके। लोक शब्द का अर्थ होता है ‘देखना’ तथा नाटक शब्द का अर्थ है दूसरों को रंजायमान करने वाली त्रियोग की क्रिया। मोही प्राणी संसार उसे कहता है, जिसमें सुख का सार है। ज्ञानी कहता है कि संसार तो दुखों को भोगने का स्थान है और जब सुख का आभास प्रारंभ जहां होता है, वह कहलाता है संसार सागर का किनारा। जो दुख से व्यथित है ऐसा व्यक्ति ही सुख की इच्छा कर सकता है। जिसने संसार के वास्तविक स्वरूप को जान लिया है, वही संसार से टूटने और शाश्वत स्वरूप सुख को प्राप्त कर सकता है। संसार को छोड़े बिना सुख नहीं। जिसने विषय कषायों को छोड़ने का प्रयास भी नहीं किया, उसने तो सिर्फ शब्दों को रटा है। शाम को प्रधान कार्यालय स्थित मुनिसुव्रत नाथ भगवान के सामने केसरगंज जैन समाज की ओर से आरती की गई।

आज के कार्यक्रम: 1 फरवरी को सुबह 8.15 बजे से भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। सुधा सागर महाराज के प्रवचन सुबह 9.30 बजे ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली स्थित प्रवचन पंडाल में होंगे। इसके बाद सुबह 10.30 बजे मुनि की आहारचर्या, दोपहर 12 बजे सामायिक व शाम 5ः30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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