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अजमेर शिफ्ट होगा ब्यावर का टीबी क्लिनिक...!

सालों से अजमेर ही नहीं भीलवाड़ा, पाली, नागौर और राजसमंद के लोगों को भी राहत देने वाला ब्यावर का जिला क्षय निवारण...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 03:10 AM IST
अजमेर शिफ्ट होगा ब्यावर का टीबी क्लिनिक...!
सालों से अजमेर ही नहीं भीलवाड़ा, पाली, नागौर और राजसमंद के लोगों को भी राहत देने वाला ब्यावर का जिला क्षय निवारण केंद्र को गुपचुप अजमेर शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी गई है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि हाल में विधानसभा में विधायक शंकर सिंह रावत के सवाल का जवाब देने के बाद विभाग के अधिकारियों द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया बताती है।

स्टेट ट्यूबर क्लोसिस ऑफिसर डॉ. डीके काला और डब्ल्यूएचओ के संजय सिन्हा द्वारा हर माह ब्यावर के डिस्ट्रिक्ट ट्यूबरक्लोसिस सेंटर में होने वाली मासिक बैठक को अजमेर में करवाने के मौखिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही डीटीबीओ(डिस्ट्रिक्ट ट्यूबर क्लोसिस ऑफिसर ) कार्यालय को भी अजमेर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे पूर्व भी ब्यावर से जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भी ब्यावर से शिफ्ट हो चुका है।

जिला क्षय रोग निवारण केंद्र को अजमेर ले जाने की कवायद, हर माह ब्यावर में होने वाली जिला स्तरीय बैठक इस माह से अजमेर में करने के निर्देश

विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा...

हाल ही में क्षेत्रीय विधायक शंकर सिंह रावत ने जिला क्षय रोग निवारण केंद्र के अजमेर शिफ्ट होने के मामले को लेकर सदन में सवाल उठाया। उन्होंने जिला क्षय रोग निवारण केंद्र के अजमेर स्थानांतरित करने के पीछे कारणों के बारे में भी सवाल उठाया। लेकिन 30 जनवरी को ही दिए गए जवाब में निदेशालय द्वारा टीबी क्लिनिक को अजमेर शिफ्ट नहीं करने का आश्वासन दिया गया। लेकिन दूसरे दिन ही अधिकारियों ने इस संबंध में मौखिक आदेश देकर हर माह ब्यावर में होने वाली मीटिंग को अजमेर सीएमएचओ कार्यालय में करवाने के निर्देश दे दिए।

पहले भी किए जा चुके हैं प्रयास

जिला क्षय रोग निवारण केंद्र को पूर्व में भी अजमेर शिफ्ट करने की कवायद हुई थी। लेकिन तब जनप्रतिनिधियों के विरोध के चलते विभाग ने हाथ पीछे खींच लिए। करीब दो साल पूर्व भी जिला क्षय रोग निवारण केंद्र को अजमेर शिफ्ट करने को लेकर निदेशालय ने सुझाव मांगे थे। लेकिन जनाक्रोश की संभावना के चलते हुए उस समय भी टाल दिया गया।

सिलिकोसिस संदिग्धों की जांच पर पड़ेगा असर

अधिकारियों का कहना है कि टीबी क्लिनिक को अजमेर शिफ्ट नहीं किया जा रहा है बल्कि डीटीबीओ कार्यालय को अजमेर शिफ्ट किया जा सकता है, जिससे क्लिनिक पर कोई असर नहीं होगा। एक हजार से अधिक मिनरल फैक्ट्रियां होने और खनन क्षेत्र होने के कारण क्षेत्र में बड़ी तादाद में सिलिकोसिस के रोगी है। न्यूमोकोनोसिस बोर्ड के महीने में एक ही बार कार्य करने के कारण सिलिकोसिस संदिग्धों की जांच समय पर नहीं हो पा रही है। बोर्ड में डिस्ट्रिक ट्यूबर क्लोसिस ऑफिसर का होना भी जरूरी है। डीटीओ के अजमेर जाने से सिलिकोसिस संदिग्धों की जांच में फिर से बाधा आ सकती है।


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