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नवसंवत्सर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

नवसंवतसर समारोह समिति द्वारा श्री मथुरा प्रसाद गुलाब देवी आर्य कन्या विद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:10 AM IST

नवसंवतसर समारोह समिति द्वारा श्री मथुरा प्रसाद गुलाब देवी आर्य कन्या विद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता चित्तौड़ प्रांत के सेवा प्रमुख मोहन खंडेलवाल रहे। उन्होंने बताया कि भारतीय नवसंवत्सर 18 मार्च को प्रारंभ हो रहा है। यह नवसंवत्सर पूर्णतः वैज्ञानिक एवं प्रकृति सम्मत तो है ही हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक ऐतिहासिक धरोहर को पुष्ट करने का पुण्य दिवस भी है। इसी दिन वरुणावतार झूलेलालजी का आज ही के दिन अवतरण हुआ, डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म भी आज ही के दिन हुआ, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराम बलिराम हेडगेवार का भी जन्म वर्ष प्रतिपदा के मंगल दिन ही हुआ। नवसंवत्सर के दिन ही भगवान राम का राज्याभिषेक तथा सम्राट युधिष्ठिर का भी राज्याभिषेक आज के दिन हुआ है। उन्होंने ही छात्र-छात्राओं और आचार्य दीदी से पाश्चात्य संस्कृति को छोड़ राष्ट्र की दृष्टि से विजयी, विज्ञान की दृष्टि से समायोजित खगोलशास्त्र की दृष्टि से पूर्ण स्वदेशी कालगणना को अपनाने का आग्रह किया गया। शाला प्रधान नर्बदा शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

हमारी भारतीय काल गणना के अनुसार सृष्टि का निर्माण हुआ

डीबीएन अंग्रेजी माध्यम उच्च माध्यमिक विद्यालय में नवसंवत्सर की वैज्ञानिक अवधारणा पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के सुरेंद्र अरोड़ा रहे। उन्होंने बताया कि आज विश्व के वैज्ञानिक इस तथ्य को स्वीकारने लगे हैं कि सृष्टि का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार को सूर्य के प्रथम प्रकाश के साथ हुआ। इसलिए इस दिन प्रथम होरा रवि की थी। इसके बाद चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र, शनि की होरा आई, जिन पर सातों दिनों का नामकरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिक्षा नागर ने किया तथा धन्यवाद शाला प्रधान डॉ. नवनीत ठाकुर ने दिया।

नव संवत्सर पूर्णतः वैज्ञानिक और प्रकृति सम्मत

नवसंवतसर समारोह समिति द्वारा सावित्री राजकीय आदर्श बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता नवसंवतसर समारोह समिति संयोजक निरंजना शर्मा रहे। उन्होंने भारतीय काल गणना की वर्तमान परिपेक्ष्य को बताया। इस बार भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् 2075, 18 मार्च को प्रारंभ हो रहा है। भारतीय सांस्कृति के मनीषियों और प्राचीन भारतीय खगोल शास्त्रियों के चिन्तन मनन के आधार पर की गई काल गणना से यह नव संवत्सर पूर्णतः वैज्ञानिक और प्रकृति सम्मत तो है ही, हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक ऐतिहासिक धरोहर को पुष्ट करने का पुण्य दिवस भी है। प्रधानाध्यापक लीलामणी गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए।

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Web Title: नवसंवत्सर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन
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