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“रानी पद्मिनी’ पुस्तक में साहित्य के साथ इतिहास, ताकि न पहुंचे ठेस

हिंदी साहित्य जगत के जाने-माने लेखक आैर संत साहित्य के विद्वान ब्रजेंद्र कुमार सिंघल ने कहा कि “रानी पद्मिनी’...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:10 AM IST

हिंदी साहित्य जगत के जाने-माने लेखक आैर संत साहित्य के विद्वान ब्रजेंद्र कुमार सिंघल ने कहा कि “रानी पद्मिनी’ किताब में क्षत्राणियों के इतिहास का महिमामंडन है, साहित्य के साथ इतिहास को जोड़ा गया है ताकि जनजाति भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे।

यह किताब मैंने बहुत सोच समझकर आैर रिसर्च के बाद लिखी है। मंगलवार को सिंघल “कलम’ कार्यक्रम में कला व साहित्य प्रेमियों से रूबरू हुए। नंद भारद्वाज ने सिंघल से उनकी साहित्यक यात्रा, अब तक प्रकाशित पुस्तकें आैर रानी पद्मिनी पर लिखी गई किताब पर विस्तार से चर्चा की। श्रोताओं ने भी सिंघल से सवाल-जबाव कर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।

इतिहास के आधिकारिक विद्वान ब्रजेंद्र कुमार सिंघल ने कहा कि उन्हें अपने घर से ही पढ़ने-लिखने के संस्कार मिले, यही वजह है कि महज ग्यारह साल की उम्र में ही भागवत गीता को कंठस्थ कर लिया।

20 साल की उम्र में पहली किताब प्रकाशित हुई। सिंघल ने बताया कि अब तक उनकी 65 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

गंगापुरसिटी सवाईमाधोपुर के रहने वाले ब्रजेंद्र कुमार रामस्नेही संत कीर्तिरामजी से संस्कृत साहित्य व संत वाणियों का अध्ययन किया, दादूपंथी संत धनीरामजी से वेदांत ग्रंथों व संतवाणियों का अध्ययन किया। प्रभा खेतान फाउंडेशन की आेर से आयोजित यह कलाम सीरीज कार्यक्रम हैदराबाद, बैंगलुरू, रायपुर, पटना, जयपुर आर उदयपुर में आयोजित हो चुकी है।

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Web Title: “रानी पद्मिनी’ पुस्तक में साहित्य के साथ इतिहास, ताकि न पहुंचे ठेस
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