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जिसे साढ़े पांच लाख वोट मिल जाएंगे वो अजमेर का नया सांसद बन जाएगा

उप चुनाव में जिसे साढ़े पांच लाख वोट मिल जाएंगे वो अजमेर का सांसद चुन लिया जाएगा। हालांकि चुनाव मैदान में खड़े...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:15 AM IST

उप चुनाव में जिसे साढ़े पांच लाख वोट मिल जाएंगे वो अजमेर का सांसद चुन लिया जाएगा। हालांकि चुनाव मैदान में खड़े निर्दलीय और नोटा के वोट कांग्रेस और भाजपा दोनों की हार जीत का गणित भी बुरी तरह प्रभावित करेंगे।

लोक सभा उप चुनाव में इस बार छोटे-मोटे दलों सहित निर्दलीय प्रत्याशियों का आंकड़ा पिछले चुनावों से कहीं ज्यादा रहा लेकिन किसी ने इनकी ओर ज्यादा तवज्जो नहीं दी। शुरू से यह ही माना जाता रहा है कि संसदीय सीट पर हो रहे चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है। लेकिन छोटे-मोटे दल और निर्दलीय के रूप में खड़े 21 प्रत्याशी दोनों दलों की जीत-हार का गणित बिगाड़ सकते हैं। पिछले चुनाव का आंकड़ा यह साबित करता है। पिछले चुनाव में मैदान में डटे निर्दलियों सहित छोटे-मोटे दल के 9 प्रत्याशी ही 36 हजार 154 वोट ले गए थे। वहीं नोटा में 12 हजार 546 वोट पड़े थे। इसमें अगर प्रतिबंधित मत व टेंडर वोट जोड़े जाए तो आंकड़ा करीब 50 हजार वोट का था। इस उप चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के अलावा 21 प्रत्याशी मैदान में डटे हैं। पिछले चुनाव का ट्रेंड ही दोहराया गया तो भी संख्या के लिहाज से करीब एक लाख वोट इन 21 प्रत्याशियों और नोटा में जा सकते हैं। ऐसे में जबकि जीत-हार का अंतर कम रहने के कयास लगाए जा रहे हैं यह एक लाख वोट बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

इस बार समता आंदोलन ने नोटा को लेकर बाकायदा निर्वाचन आयोग से अनुमति लेकर प्रचार प्रसार भी किया था। दोनों प्रमुख दलों की बजाए निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या के लिहाज से व नोटा के प्रचार प्रसार को देखते हुए अगर एक लाख वोटों का बंटवारा हो जाता है तो यह भाजपा व कांग्रेस की जीत हार को काफी हद तक प्रभावित करेगा। वैसे सामान्य रूप से भाजपा व कांग्रेस का जो भी प्रत्याशी साढ़े पांच लाख या इससे अधिक वोट ले जाता है उसकी जीत हासिल होगी।

मतगणना के लिए निर्दलीयों की मदद भी ली कांग्रेस-भाजपा ने

अजमेर|भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने मतगणना में अपने अधिक कार्यकर्ताओं को भेजने के निर्दलीय उम्मीदवारों का सहयोग लिया है। नियमानुसार पार्टी एक टेबल पर एक कार्यकर्ता को लगा सकती है। इधर दोनों ही पार्टियों ने उम्मीदवार अधिक होने की वजह से मतगणना में पोलिंग एजेंटों के रुप में अपने अनुभवी नेता कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई हैं। अजमेर जिले में 1907 से अधिक मतदान केन्द्र हैं। चुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में हैं। यानि मतगणना के दिन एक टेबल पर प्रत्येक उम्मीदवार का एक एजेंट बैठेगा। यानि एक टेबल पर 23 काउंटिंग एजेंट होंगे। मतगणना के लिए 81 टेबल लगेगी।

नोटा में दर्ज हुए थे 12 हजार 546

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