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कई नेताओं की राजनीतिक जमीन तैयार होगी या खिसकेगा आधार

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:15 AM IST

अजमेर संसदीय क्षेत्र लोकसभा चुनाव में हुए मतदान के बाद गुरुवार को होने वाली मतगणना में ईवीएम मशीन से आने वाले...
अजमेर संसदीय क्षेत्र लोकसभा चुनाव में हुए मतदान के बाद गुरुवार को होने वाली मतगणना में ईवीएम मशीन से आने वाले नतीजे भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की जमीन खिसकाएंगे या आधार मजबूत करेंगे। कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य भी तय करेंगे।

इस उप चुनाव के नतीजे राज्य के साथ राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने के साथ ही भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दलों में ऊर्जा का संचार करेंगे या निराशा बढ़ाएंगे। संसदीय क्षेत्र में बीस दिन तक चली राजनीतिक जंग का परिणाम गुरुवार को ईवीएम मशीन उगल देगी। यहां सीधा मुकाबला कांग्रेस तथा केंद्र व राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के बीच ही रहा है।

अजमेर उत्तर

शहर अध्यक्ष बदलाव के बाद कांग्रेस के लिए यह पहला चुनाव है। शहर अध्यक्ष विजय जैन के साथ डा. श्रीगोपाल बाहेती चुनाव में सक्रिय रहे हैं। इसलिए चुनाव परिणाम तय करेगा कि आगामी विधान सभा चुनाव में इनका राजनीतिक कद कहां रहेगा। शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं, उनकी आगे की राजनीति जारी रखने के लिहाज से यह चुनाव राजनीतिक सेमी फाइनल साबित होगा। अरुण चतुर्वेदी अौर पार्टी के संगठन उपाध्यक्ष प्रहलाद पंवार भी चुनाव में सक्रिय रहे।

अजमेर दक्षिण

दक्षिण विधान सभा क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है इन चुनाव में कांग्रेस से हेमंत भाटी, ललित भाटी , डा. राजकुमार जयपाल चुनाव में सक्रिय भूमिका में रहे हैं। चुनाव का नतीजा इन्हीं की राजनीति को तय करेगा। भाजपा में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल के साथ किरण माहेश्वरी इस चुनाव में सक्रिय भूमिका में रही हैं। माहेश्वरी को प्रभारी मंत्री प्रभारी बनाया गया और वे पूरे चुनाव के दौरान यहां पड़ाव डाले रही हैं।

इलाकाई नेताओं की जमीनी हकीकत का विधानसभा क्षेत्रवार मिले मतों से होगा खुलासा

नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र

रामनारायण गुर्जर ने विधानसभा उप चुनाव जीत कर विधानसभा क्षेत्र में वापस कांग्रेस को स्थापित किया है। उनके भाई महेंद्र गुर्जर भी पूरी तरह सक्रिय रहे। भाजपा में जबकि सरिता गेना, रामचंद्र चौधरी भी इस सीट पर नजरे जमाए हुए हैं। भाजपा ने यहां का जिम्मा गुर्जरों को प्रभावित करने के मद्देनजर कालू लाल गुर्जर को दिया हुआ था। ऐसे में भाजपा व कांग्रेस के इन नेताओं के भविष्य पर लोगों की निगाहें रहेंगी। भाजपा उम्मीदवार खुद रामस्वरूप लांबा की प्रतिष्ठा भी इस सीट से जुड़ी है, क्योंकि स्व. सांवर लाल जाट इसी क्षेत्र से विधायक रहे थे।

पुष्कर विधानसभा क्षेत्र

विधानसभा क्षेत्र पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत के साथ परिवहन मंत्री युनूस खान सक्रिय रहे हैं। रावत की पूर्व में भारी मतों से जीत हुई थी। दूसरी तरफ कांग्रेस से पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, उनके पति इंसाफ अली भी सक्रिय रहे हैं।

किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र

विधानसभा क्षेत्र जाट बहुल मतदाता वाला माना जाता है। भाजपा के मौजूदा विधायक भागीरथ चौधरी के साथ मार्बल व्यवसायिक नगरी होने के कारण भाजपा ने काली चरण सराफ को यहां चुनाव की कमान सौंप रखी थी। जबकि कांग्रेस की कमान पूर्व विधायक नाथू राम सिनोदिया ने संभाल रखी थी। इनके अलावा पूर्व राज्यसभा सांसद डा. प्रभा ठाकुर भी किशनगढ़ क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। ऐसे में इन नेताओं का राजनीतिक कद उप चुनाव का परिणाम व यहां दोनों पार्टी को मिलने वाले मतों की संख्या तय करेगी।

केकड़ी विधानसभा क्षेत्र

केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक शत्रुघ्न गौतम संसदीय सचिव पद पर भी बैठे हैं। इनके साथ में मदन राठौड़ तथा श्रीचंद कृपलानी को प्रभारी के रूप में लगाया गया था। गौतम ने कांग्रेस के सांसद उम्मीदवार रघु शर्मा को ही गत विधानसभा चुनाव में मात दी थी। ऐसे में दोनों ही नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में उप चुनाव में पूरी ताकत दिखाने में किसी प्रकार की कसर नहीं रखी। इस चुनाव में मिलने वाले मतों की संख्या तय करेगी कि गौतम का कद गत चुनाव के बराबर ही है या उसमें कमी आई है। रघु शर्मा के लिए मिलने वाले मतों की संख्या तय करेगी, उन्होंने पहले के मुकाबले वापस प्रतिष्ठा हासिल की है या नही।

मसूदा विधानसभा क्षेत्र

मसूदा विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा भाजपा विधायक सुशील कंवर पलाड़ा ने गत चुनाव में कुल 34 हजार मत हासिल किए थे। उस चुनाव में कांग्रेस से ब्रह्मदेव कुमावत थे तो निर्दलीय के रूप में डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी व वाजिद खान चीता ने भाग्य आजमाया था। उप चुनाव में रामचंद्र चौधरी जहां भाजपा के लांबा के साथ थे तो वाजिद खान कांग्रेस के साथ। पहले गुर्जर प्रत्याशी भी मैदान में था लिहाजा गुर्जर मत विभाजन हुआ। भाजपा ने क्षेत्र के लिहाज से राजेंद्र सिंह राठौड़ को प्रभारी बनाया था लिहाजा इस बार ऐसी कोई स्थिति नहीं है। ऐसे में इन सभी नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

दूदू विधानसभा क्षेत्र

दूदू विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की तरफ से पूर्व मंत्री और हाल ही कांग्रेस में शामिल हुए बाबू लाल नागर उप चुनाव में अपनी पुन: प्रतिष्ठा को स्थापित करने के लिए सक्रिय रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के मौजूदा विधायक डॉ. प्रेमचंद बैरवा और प्रभारी ब्रह्म सिंह गुर्जर सक्रिय रहे। उनके साथ भाजपा ने सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक को लगा रखा था। गुर्जर गत चुनाव वाली स्थिति को कायम रखने के लिए प्रयास कर रहे थे। वहीं नागर आने वाले भविष्य की राजनीति में अपना स्थान बनाने के लिए कोशिश कर रहे थे। ऐसे में इन नेताओं का कद चुनाव में मिलने वाले मतों की संख्या ही तय करेगी।

सचिन पायलट के लिए प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने के बाद यह पहला चुनाव है। कांग्रेस की राजनीति व भविष्य की दिशा यह चुनाव ही तय करेगा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने गुजरात चुनाव के बाद गृह राज्य का उप चुनाव बड़ा महत्वपूर्ण रहने वाला है, जीत में गहलोत व पायलट दोनों का राजनीतिक कद बड़ा हो सकता है और पार्टी के लिए संजीवनी साबित होगा। इसके बाद होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव पर सीधा असर यहां से मिलने वाले परिणाम का भी होगा। कांग्रेस की तरफ से देहात अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राठौड़ की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। भाजपा में स्वयं सीएम वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। सीएम ने दो माह में अजमेर संसदीय क्षेत्र में 17 बार दौरा किया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सीआर चौधरी भी पूरी तरह चुनाव में सक्रिय रहे हैं। भाजपा के कई मंत्री चुनाव के दौरान यहां आए। अजमेर शहर अध्यक्ष अरविंद यादव, देहात भाजपा अध्यक्ष प्रो. बी पी सारस्वत के लिए भी चुनाव राजनीतिक उठा-पटक साबित करने वाला होगा। संगठन की दृष्टि से देखा जाए तो भाजपा ने लोक सभा प्रभारी के रूप में पूर्व आरपीएससी अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा के अलावा विधानसभा क्षेत्रों में मेघराज लोहिया, वीरम देव सिंह, मुकेश दाधीच, लक्ष्मीनारायण दवे, गणेश महावर शामिल हैं, जो वर्तमान में संगठन में बड़े पदों पर बैठे हैं। इन सभी के लिए चुनाव की हार-जीत संगठन में बदलाव का सूचक साबित हो सकता है।

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Web Title: कई नेताओं की राजनीतिक जमीन तैयार होगी या खिसकेगा आधार
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