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युवाओं के लिए प्रेरणादायी साबित होगी फिल्म लाइब्रेरी ‘कारवां’

देश में पूणे के बाद दूसरी ऐतिहासिक धरोहर अजमेर की फिल्म एसी लाइब्रेरी “कारवां’ का संचालन जल्द ही अब अकबर के किले...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:15 AM IST
देश में पूणे के बाद दूसरी ऐतिहासिक धरोहर अजमेर की फिल्म एसी लाइब्रेरी “कारवां’ का संचालन जल्द ही अब अकबर के किले होने जा रहा है। हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में यह सौगात हमें मिलेगी। हैरिटेज हिस्ट्री आैर म्यूजियम थीम पर तैयार की गई इस फिल्म लाइब्रेरी का नया स्वरूप अदभुत है। ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखते हुए लाइब्रेरी के स्वरूप को निखारा गया है। लाइब्रेरी दो मिनी थिएटर, छह कियोस्क, प्रोजेक्टर रूम, फिल्मों को सुरक्षित रखने के लिए शेल्फ आैर भव्य एंट्री तैयार हो चुकी है। इसके बाहर के हिस्से में आकर्षक गार्डन विकसित किया जा रहा है। फिनिशिंग का काम जोरों पर है। देशी-विदेशी सैलानियों को लाइब्रेरी के बारे में जानकारी देने के लिए पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर इसे प्रमोट किया जाएगा। मालूम हो कि 1952 से रोडवेज बस स्टेंड के सामने स्थित इस लाइब्रेरी के लिए सीएम वसुंधरा राजे की बजट घोषणा से दो करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे।

लोहे के गोलाकार कवर्स में आज भी सुरक्षित है 2543 पुरानी फिल्में

किकि क : महलों जैसे हैं दरवाजे, दिल को सुकून देने वाला म्यूजिक

फिल्म लाइब्रेरी में आर्ट गैलेरी आैर दो थिएटर बनाए गए हैं। थिएटर में 15 से 20 लोगों की बैठने की व्यवस्था रहेगी। छह कियोस्क बनाए गए हैं, जिसमें ईयरफोन लगाकर वीडियो-वीडियो सुने व देखें जा सकेंगे। जैसे ही लाइब्रेरी में प्रवेश करेंगे, दिल को सुकून देने वाला मद्धिम म्यूजिक सुनने को मिलेगा। लाइब्रेरी का ग्राउंड आैर फस्ट फ्लोर वातानुकूलित है। इसे हैरिटेज लुक दिया गया है। लाइब्रेरी की इंटीरियर डिजाइनिंग भी खास है, बड़े आकार के महापुरुषों के पोस्टर आैर फिल्मों को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई शेल्फ लाइब्रेरी की शान में चार चांद लगाएंगे। लाइब्रेरी का मुख्य द्वार महलों जैसा बनाया गया है। अकबर के किले से सटे एक हिस्से में बनाई गई इस फिल्म लाइब्रेरी का निर्माण भी ठीक उसी तरह से किया गया है, जैसा राजा-महाराजाओं के समय होता था। यानि गुड़, गूगल, मैथी, सुरखी यानी ईंटों का चूरा आैर चूने की कली को मिलाकर तैयार मसाले से किले के इस हिस्से की मरम्मत की गई है।

ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखते हुए लाइब्रेरी के स्वरूप को निखारा गया है।

ऐसा दिखेगा मिनी थिएटर का स्वरूप। थिएटर में 15 से 20 लोगों की बैठने की व्यवस्था रहेगी।

सैलानी देख सकेंगे कई दुर्लभ पुरानी फिल्में

गौरवशाली इतिहास को लोग फिल्मों के माध्यम से जान सकेंगे। देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ शहरवासी अब किले में भारत-पाक युद्ध, लाल किले से लाल बहादुर शास्त्री का आेजस्वी संबोधन, कई ऐतिहासिक पुरानी फिल्में, वृत्तचित्र सहित दुर्लभ फिल्में यहां देख सकेंगे। लाइब्रेरी में वर्तमान 16 एमएम की कुल 4225 फिल्में हैं। इनमें से 1639 खराब हो चुकी हैं, जबकि शेष 2543 ऐसी हैं, जिन्हें प्रोजेक्टर के माध्यम से देखा जा सकेगा। ज्यादातर फिल्में आैर डॉक्यूमेंट्री को डब किया गया है। कुछ डोक्यूमेंट्री ऐसी भी हैं, जिनमें महापुरुषों की ओरिजनल आवाज आज भी सुरक्षित है।

10, 20 आैर 40 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्में

फिल्म लाइब्रेरी में 10 मिनट, 20 मिनट आैर 40 मिनट की डोक्यूमेंट्री आैर फीचर फिल्में मौजूद हैं। 10 मिनट वाली फिल्म 400, 20 वाली 800 आैर 40 मिनट वाली 1600 फीट लंबी हैं। इन्हें लोहे के गोलाकार कवर्स में सुरक्षित रखा गया है।

अजमेर की ऐतिहासिक धरोहर है फिल्म लाइब्रेरी