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युवा रचनाकारों को मिलेगी अभिव्यक्ति

अजमेर| अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई की बैठक रविवार को गुजराती विद्यालय में हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि परिषद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:15 AM IST

अजमेर| अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई की बैठक रविवार को गुजराती विद्यालय में हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि परिषद युवा रचनाकारों को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करेगी। महामंत्री गोविंद भारद्वाज ने बताया कि परिषद भाषायी साहित्य और युवा रचनाकारों के प्रोत्साहन के लिए रचनाकार सम्मेलन आयोजित करेगी। अध्यक्ष कुलदीप सिंह र|ू ने बताया कि डाॅ. बद्रीप्रसाद पंचोली की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि अन्य राज्यों के साहित्यकारों के साथ स्थानीय लेखकों के संवाद के लिए भी कार्यक्रम होंगे। इस मौके पर आयोजित काव्यगोष्ठी में डाॅ. छाया ने हिन्दी तथा कुलदीप सिंह र|ू ने राजस्थानी भाषा सरस्वती वंदना सुनाई। युवा कवियित्री श्रुति गौतम ने ‘तुम भाषा हो मेरी पर बिल्कुल मां जैसी लगती हो’ के द्वारा हिन्दी का गुणगान किया। डाॅ बृजेश माथुर ने ‘सबके दुख में शामिल होकर करते रिश्तों की तुरपाई’, गोविंद भारद्वाज ने ‘जिंदगी पतंग की एक डोर सी है’, डाॅ ध्वनि मिश्रा ने‘ख्वाब आंखों में सजाए हैं तो जिंदा तुम हो’, उमेश कुमार चैौरसिया ने ‘विचार जिन्दा रखना है तो बुजुर्गों का हाथ थामे रहो’, डाॅ सुनीता जैन ने ‘सुख और दुख मिले इस तरह की गज़ल हो गई ‘, डाॅ विष्णु दत्त शर्मा ने ‘नए साल की शुभकामनाएं कविताएं सुनाई। डाॅ. बद्रीप्रसाद पंचोली ने संस्कृत कविता सुनाई और डाॅ अनिता खुराना ने वेद का राष्ट्रगीत माने जाने वाले मंत्र का स्वरचित कवितानुवाद सुनाकर गोष्ठी को प्रभावी बनाया। डाॅ. जयदेव, डाॅ. राजेश शर्मा इत्यादि ने भी विचार रखे।

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