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31 मार्च को डॉ. जगराम मीणा सेवानिवृत्त, वर्तमान में 2 उपकुलसचिव, 5 सहायक कुलसचिव कार्यरत

एमडीएस यूनिवर्सिटी में नियंत्रक का चयन होते ही विवादों की स्थिति बन गई है। यूनिवर्सिटी में वर्तमान में 2 उप...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:20 AM IST

एमडीएस यूनिवर्सिटी में नियंत्रक का चयन होते ही विवादों की स्थिति बन गई है। यूनिवर्सिटी में वर्तमान में 2 उप कुलसचिव और 5 सहायक कुलसचिव हैं, बावजूद इसके टीचिंग स्टाफ से परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

एमडीएस यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जगराम मीणा 31 मार्च को ही सेवानिवृत्त हुए। मीणा के पद पर रहने के दौरान से ही नए परीक्षा नियंत्रक की तलाश के लिए मशक्कत चल रही थी। एक अप्रैल को वीसी प्रो. भगीरथ सिंह ने रिमोट सेंसिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता को परीक्षा नियंत्रक बनाने के आदेश जारी कर दिए। दत्ता के पास वर्तमान में कुलानुशासक का भी पदभार है।

एमडीएस में परीक्षा नियंत्रक का चयन विवादों के घेरे में

प्रबंध बोर्ड की बैठक में यह लिया था निर्णय

पिछले साल 30 मई 2017 को आयोजित प्रबंध बोर्ड की 91वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जगराम मीणा 31 मार्च 2018 को अपनी 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होंगे। एक वर्ष के भीतर किसी भी कारण से परीक्षा नियंत्रक का पद रिक्त होने की स्थिति में चयन समिति द्वारा परीक्षा नियंत्रक पद के लिए आरक्षित सूची में अनुशंसित अभ्यर्थी को नियुक्ति प्रदान करने के लिए कुलपति अधिकृत रहेंगे। इस प्रबंध बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष और कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी के अलावा सदस्य के रूप में अलका सिरोही, प्रो. भरतराम कुम्हार, भारती जैन, संभागीय आयुक्त अजमेर, डॉ. कमल मिश्रा, केसी शर्मा और सदस्य सचिव के रूप में कुल सचिव शामिल हुए थे।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी यूनिवर्सिटी के लिए प्रबंध बोर्ड की बैठक अहम होती है। इसमें लिए गए निर्णयों की पालना होनी चाहिए।

रिजर्व पैनल तैयार, लेकिन स्टे लिया

रिजर्व पैनल को नहीं खोलने को लेकर यूनिवर्सिटी के ही एक कर्मचारी गत दिनों ही हाईकोर्ट से स्टे लेकर आ गए। सूत्रों के अनुसार वे खुद परीक्षा नियंत्रक के लिए आयोजित इंटरव्यू में शामिल हुए थे। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब यूनिवर्सिटी में परीक्षा नियंत्रक का पद खाली होना ही था तो नई नियुक्ति के लिए ऐनवक्त तक इंतजार ही क्यों किया गया? दूसरा सवाल है कि परीक्षा नियंत्रक पद के लिए जब लंबी चौड़ी प्रक्रिया पूरी की गई, इंटरव्यू लिए गए तो फिर उनका चयन नहीं करते हुए बिना इंटरव्यू और किसी प्रक्रिया के अचानक किसी टीचिंग स्टाफ से नियुक्ति कैसे दे दी गई?

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अगली बॉम की बैठक में भी नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय

प्रबंध बोर्ड की 5 दिसंबर 2017 को हुई 93वीं बैठक में भी यह निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय या राज्य सरकार के नियमानुसार कार्यवाही की जाए। मात्र परंपरा या प्रैक्टिस के मद्देनजर नहीं रखा जाए। इस बैठक में अध्यक्ष और कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह के अलावा सदस्य अलका सिरोही, प्रो. भरतराम कुम्हार, प्रो. प्रवीण माथुर, प्रो. भारती जैन, प्रो. शिवदयाल सिंह, निर्मल कुमार सेठी के अलावा सदस्य सचिव के रूप में कुलसचिव शामिल हुए थे।

इनका कहना है

30 मई की बैठक के बाद प्रबंध मंडल की और बैठक हो गई थी। दूसरी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि इस मुद्दे पर विचार नहीं किया जाए। इसके अलावा रिजर्व पैनल पर स्टे भी आ गया। नॉन टीचिंग स्टाफ में सिनियोरिटी के अभाव में यह नियुक्ति नहीं दी गई। हालांकि इस संबंध में अभी ऑर्डर नहीं निकले हैं। -प्रो. भगीरथ सिंह, वीसी एमडीएसयू

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Web Title: 31 मार्च को डॉ. जगराम मीणा सेवानिवृत्त, वर्तमान में 2 उपकुलसचिव, 5 सहायक कुलसचिव कार्यरत
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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