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‘पर्व जीवन में नई बहार लाते हैं, आचरण की शुद्धता भी जरूरी’

जीवन में शुद्धता और स्वच्छता प्राप्त करना हमारा परम लक्ष्य होना चाहिए। हमारा मन ही शुद्ध और स्वच्छ ना हो बल्कि वचन...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:15 AM IST
जीवन में शुद्धता और स्वच्छता प्राप्त करना हमारा परम लक्ष्य होना चाहिए। हमारा मन ही शुद्ध और स्वच्छ ना हो बल्कि वचन भी शुद्ध व स्वच्छ होना चाहिए। बातें ही नहीं सौगातें और आदतें भी तन ही नहीं मन भी।

आदिनाथ जिनालय स्थित प्रवचन पंडाल में शनिवार को सुधा सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि सिर्फ देश की सफाई करने और सफेद कुर्ता पहनने से ही शुद्धि और स्वच्छता होती तो यह देश कभी का स्वच्छ हो जाता। देश की स्वच्छता के लिए आचरण की स्वच्छता होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पर्व जीवन में नई बहार लाते है। प्रसन्नता, प्रशस्तता का वातावरण उत्पन्न करते है। आज व्यक्ति बड़ा निराशावादी होता जा रहा है। चेहरे पर कोई खुशी नहीं, गम की रेखाएं छाई रहती है। आज आप जीने की कला से परिचित नहीं है। विनीत कुमार जैन ने बताया कि ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में शनिवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर विश्वशांति महायज्ञ सुधा सागर महाराज के आर्शीर्वाद से सम्पन्न हुआ। जिसमें इन्द्र इन्द्राणी एवं पुजारियों ने विश्व शांति की कामना से आहुतियां दी।

इसके बाद सिद्धच्रक महामंडल विधान कार्यक्रम में रथयात्रा प्रधान कार्यालय स्थित मंडल स्थल से होकर आदिनाथ जिनालय आरके मार्बल तक निकाली गई। जिसमें इन्द्र इन्द्राणियां केसरिया वस्त्रों में हाथों में धर्म ध्वजा लेकर जयकार लगाते चल रहे थे। इस अवसर पर सुधा सागर महाराज के मंगल आशीर्वचन प्राप्त हुए।

रथयात्रा के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान संपन्न