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आपातकालीन विभाग की आउटडोर पर्ची के लिए भटकने पर मजूबर मरीज

जवाहर लाल नेहरु अस्पताल में इन दिनों आपातकालीन विभाग के रिनोवेशन का काम चल रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से की गई...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:20 AM IST
जवाहर लाल नेहरु अस्पताल में इन दिनों आपातकालीन विभाग के रिनोवेशन का काम चल रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से की गई वैकल्पिक व्यवस्था मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। मरीज पर्ची के लिए भटक रहे हैं, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा काउंटर भी मरीजों को मिल नहीं रहा है। आउटडोर की वैकल्पिक व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही है। मुख्यद्वार पर रिनोवेशन का काम चल रहा है। अधिकांश मरीज इसी मार्ग से आ रहे हैं। जगह-जगह मलबे के ढेर लगे हुए हैं, तोड़-फोड़ की वजह से चारों ओर धूल उड़ रही है।

पिछले दिनों पूछताछ काउंटर को तोड़ दिया गया। इसे इमरजेंसी मेडिसन यूनिट (ईएमयू) में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की और से न तो इसके लिए साइन बोर्ड लगाए गए और न ही कोई जानकारी दी गई। अस्थाई आउट डोर नर्सिंग अधीक्षक कार्यालय में संचालित हो रहा है, वार्ड को ट्रोमा सेंटर से संचालित किया जा रहा है। आपातकालीन विभाग में आने के लिए मरीजों को अस्पताल के पीछे के रास्ते से आना होगा, लेकिन यहां आने के बाद मरीज पर्ची कहां से ले, इसकी कोई जानकारी यहां पर दी नहीं गई है। ईएमयू वार्ड की दीवार के एक कोने पर ए-फोर साइज के कागज पर कंप्यूटर से प्रिंट कर चस्पा कर दिया गया है। मरीज को यह एक बार में कहीं नजर नहीं आता है। इस वार्ड में प्रवेश करते हुए प्लाइ बोर्ड के पार्टीशन लगे हुए हैं, एकाएक देखने पर यह पता नहीं चलता कि पर्ची यहीं पर ही मिलेगी। इस वार्ड की खिड़कियां भी बंद रहती है।


आपातकालीन विभाग में वही मरीज आते हैं, जो गंभीर हैं। इन मरीजों का तब तक उपचार शुरू नहीं हो पाता, जब तक कि पर्ची नहीं बन जाती। मरीज के परिजन पर्ची के लिए चक्कर ही काटते रहते हैं, लेकिन यहां पर कोई जिम्मेदार कार्मिक नहीं है कि उन्हें यह बता दे कि पर्ची कहां पर मिलेगी। यदि पर्ची मिल भी जाए तो दवा लेने के लिए फिर से चक्कर लगाने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा काउंटर 110 को भी शिफ्ट कर पुराने डाकघर के पास खोला गया है। दवा लेने के लिए भी मरीज के परिजनों की परेशानी बढ़ गई है।