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बस की टक्कर से ऑटो में फंसे रहे बच्चे, इस हाल में ड्राइवर पूछ रहा था ऐसी बात

3 बच्चों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। ऑटो पर 7 बच्चे सवार थे जो बुरी तरह फंस गए।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 02:24 AM IST

उदयपुर. चेतक सर्कल के पहाड़ी बस स्टैंड पर तेज गति से आती राजस्थान लोक परिवहन की बस ने शुक्रवार सुबह एक निजी स्कूल के बच्चों से भरे ऑटो को टक्कर मार दी। ऑटो के परखच्चे उड़ गए। हादसे में ऑटो ड्राइवर का सिर फट गया और 3 बच्चों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। ऑटो पर 7 बच्चे सवार थे जो बुरी तरह फंस गए। टक्कर से ऑटो की छत अलग हो दूर जा गिरी और ऑटो पूरी तरह पिचक गया। लोगों ने ऑटो से बच्चों को मुश्किल से बाहर निकाला और हॉस्पिटल पहुंचाया। ऐसे हुआ हादसा

- पुलिस ने बस ड्राइवर श्यामलाल को गिरफ्तार कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि ऑटो को बचाने ब्रेक लगाए लेकिन हादसा हो गया। ऑटो ड्राइवर की तरह तरफ से खादिम हुसैन ने हाथीपोल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

- घटना सुबह 7 बजे की है जब ऑटो ड्राइवर चेतक सर्कल की तरफ तिराहा क्रॉस करते हुए सेंटपॉल स्कूल में बच्चों को छोड़ने जा रहा था।

- आकाशवाणी की ओर से तेज गति से आती बस तिराहे पर ऑटो से जा भिड़ी। ऑटो के आगे का हिस्सा ड्राइवर के सिर में घुस गया। खून ज्यादा बहने से ड्राइवर की हालत गंभीर है। हॉस्पिटल में ड्राइवर को 13 टांके लगाए गए हैं।

- सूचना के बाद घरवाले पहुंचे और बच्चों को अस्पताल ले गए। क्लास 7 के स्टूडेंट ताहा कांकरोली के मुंह, नाक और आंख के पास चोट लगी। कान से भी खून बहने लगा।

- दूसरे छात्र कमरान अहमद और मोहम्मद फैज छीपा के भी मुंह और सिर पर चोट लगी है, इन्हें भी टांके लगाए गए हैं।

सिर फट गया, फिर भी बड़बड़ाता रहा ऑटोचालक- सभी बच्चे ठीक तो हैं न

- ऑटो ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ की बेटी नाजिदा परवीन ने बताया कि पिता को जब गंभीर हालत में हॉस्पिटल ले जा रहे थे तो वे बार-बार यही पूछ रहे थे कि ऑटो में बैठे सभी बच्चे ठीक तो हैं ना उन्हें कोई चोट तो नहीं लगी।

- वे बार-बार बेहोश हो रहे थे। होश आते ही बच्चों के बारे में ही पूछ रहे थे। ऑटो के आगे का हिस्सा सिर में घुसने से हालत गंभीर है। हॉस्पिटल में ड्राइवर की स्थिति गंभीर है और 13 टांके लगाए गए हैं।

25 साल से बच्चों को स्कूल छोड़ने का काम कर रहा है ऑटो ड्राइवर

- सेंटपॉल स्कूल के प्रिंसिपल फादर जॉर्ज वी. ने बताया कि ड्राइवर 25 साल से ऑटो से बच्चों को सेंटपॉल स्कूल छोड़ने का काम कर रहा है।

- इस घटना में पूरी गलती बस ड्राइवर की है। सूचना मिलते ही मैं तत्काल मौके पर पहुंचा।

बच्चों को यों ठूंसकर ले जाते हैं ड्राइवर भी

- जिले में करीब 600 निजी स्कूल हैं जिनमें आधे से ज्यादा स्कूलों की अपनी बसें हैं। हजारों टेम्पो, ऑटो और वैन बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाते हैं।

- ऑटो और वैन ड्राइवर हर दिन क्षमता से अधिक बच्चों को वाहन में ठूंस-ठूंसकर ले जा रहे हैं जिससे हादसा होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन इस पर न तो स्कूल प्रशासन का ध्यान है और न ही बच्चों के परिजनों का।

- अवैध पार्किंग की जगह वाहन खड़े होते हैं तो कहीं छोटी जगह पर वाहन यू-टर्न ले लेते हैं जिससे हादसा होने का खतरा बढ़ जाता है।

भीड़ वाले इलाकों में भी तेजी से दौड़ती हैं बसें

सिटी की सड़कों पर ऐसे कई खतरनाक मोड़ हैं जहां वाहनों के भिड़ने का खतरा बना रहता है। चेतक, दिल्ली गेट, फतहपुरा, साइफन, उदियापोल, एमजी कॉलेज के बाहर सहित कई चौराहे हैं जहां कभी भी ट्रेफिक पुलिस नहीं रहती। कहीं-कहीं रहती भी है तो सड़क किनारे बैठे रहते हैं। कई चौराहों पर रेड लाइट तो लगी है लेकिन वो जलती ही नहीं हैं। जिससे हादसे होने का खतरा बढ़ जाता है। भारी वाहनों पर भी सख्ती दिखानी होगी।

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