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अजमेर के 32 गांव इधर के ना उधर के, एडीए में शामिल हुए गांवों की पीड़ा

जिले के 32 गांव इधर के रहे ना उधर के। ये गांव अजमेर विकास प्राधिकरण में शामिल हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 30, 2017, 07:40 AM IST
Ajmer, here and there, the pain of the villages joined in ADA

अजमेर . जिले के 32 गांव इधर के रहे ना उधर के। ये गांव अजमेर विकास प्राधिकरण में शामिल हैं। प्राधिकरण विकास विकास कार्य कराने में शहर तक सीमित है, उधर ग्राम पंचायतों ने भी एडीए का क्षेत्र मानकर हाथ पीछे खींच लिए हैं। प्राधिकरण का चार साल पहले गठन हुआ था। तब इन 32 गांवों को शामिल किया गया था। दरअसल 2033 के नए मास्टर प्लान का प्रारूप भी तैयार किया गया था। यह लागू नहीं हो पाया है। अब इन गांवों की हालत यह है कि कहने को तो एडीए का भाग हैं लेकिन इनमें विकास के नाम पर कुछ नहीं हो पा रहा।

- एडीए में शामिल होने की वजह से पंचायती राज व्यवस्था के तहत मिलने वाले लाभ सुविधाओं से भी गांव के लोगों को वंचित कर दिया गया है। एडीए ने भी अब तक इन गांवों में नाम मात्र के विकास कार्य भी नहीं करवाए हैं।
- प्राधिकरण में कुल 118 गांव शामिल किए गए थे। इनमें पुष्कर किशनगढ़ के अलावा अजमेर के पुराने 35 गांवों के साथ ही अजमेर के 32 गांवों को जोड़ा गया था। ग्रामीणों ने विरोध किया था क्योंकि ग्रामीण पंचायती राज की योजनाओं लाभ से इन गांवों को वंचित हो गए थे।

- तब यह कहा गया था कि जल्द ही अजमेर का नया मास्टर प्लान लागू हो जाएगा जिसमें यह 32 गांव भी शामिल होंगे और जिस तरह शहर में एडीए विकास कार्य करवाता है उसी तरह इन गांवों में भी बड़े पैमाने पर विकास कार्य होंगे। लेकिन अब हालात यह है कि पुष्कर किशनगढ़ का मास्टर प्लान बनने से वहां के गांवों में तो विकास के लिए रास्ते खुल गए हैं लेकिन अजमेर का नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने से यहां के 32 गांवों में ना तो एडीए से विकास कार्य हो पा रहे हैं और ना ही अब इन्हें पंचायती राज के तहत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। एडीए के अफसर कार्मिक इन 32 गांवों में से ज्यादातर में तो शायद कभी गए हों विकास कार्य करवाना तो दूर की बात है।

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