कोटा के बाद अब अजमेर / जेएलएन अस्पताल में 24 घंटे में 7 नवजातों की मौत, देर रात तक मामले को दबाने में लगा रहा प्रशासन

अजमेर स्थित जवाहर लाल नेहरू अस्पताल। अजमेर स्थित जवाहर लाल नेहरू अस्पताल।
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अजमेर स्थित जवाहर लाल नेहरू अस्पताल।अजमेर स्थित जवाहर लाल नेहरू अस्पताल।

  • शनिवार रात तक 4 और रविवार देर शाम तक 3 नवजातों ने दम तोड़ा
  • जेएलएन के शिशु यूनिट का प्रशासन की टीम ने निरीक्षण कर नवजातों से संबधित रिकॉर्ड तलब किया था

दैनिक भास्कर

Jan 06, 2020, 11:04 AM IST

अजमेर. संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में जिला प्रशासन के निरीक्षण के 24 घंटे के अंदर सात नवजातों ने दम तोड़ दिया। अचानक इतने नवजातों की मौत से अस्पताल प्रशासन सकते में आ गया और रविवार देर रात तक मामले को दबाने में लगा रहा। जेएलएन के शिशु यूनिट में शनिवार रात तक 4 बच्चों ने दम तोड़ दिया, वहीं रविवार देर शाम तक तीन और बच्चों की मौत हो गई। इस मामले में अस्पताल प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार 'भास्कर' से बात करने को तैयार नहीं था। प्रिसिंपल वीबी सिंह, अस्पताल अधीक्षक अनिल जैन, शिशु यूनिट हेड पुखराज गर्ग ने देर रात तक भास्कर के रिपाेर्टर का फोन नहीं उठाया। वहीं, एसएनसीयू इंचार्ज कंवर सिंह ने जयपुर होने की बात कहकर कोई भी जानकारी देने से साफ मना कर दिया।

छुट्‌टी के दिन भी अस्पताल पहुंची टीम 
शनिवार को ही जेएलएन के शिशु यूनिट का प्रशासन की टीम ने निरीक्षण कर नवजातों से संबधित रिकॉर्ड तलब किया था। अस्पताल प्रशासन की टीम ने रविवार को भी शिशु यूनिट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अब तक की जांच में अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि जिन नवजातों की मौत हुई है वे प्री-मैच्योर थे और देरी से अस्पताल लाया गया। नवजातों का वजन भी काफी कम था। बीते 24 घंटों में 7 नवजातों की मौत के बाद रविवार को अवकाश होने के बावजूद अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन, प्रिंसिपल वीबी सिंह, डॉ. पुखराज ने अस्पताल का दौरा कर नर्सिंग स्टाफ से फीडबैक लिया।

7 नवजातों की मौत को लेकर जिला प्रशासन को किसी प्रकार की जानकारी नहीं है। जिस तरह का माहौल चल रहा है, उसमें यह अफवाह भी हो सकती है। सावधानी बरतने की जरूरत है। -विश्व मोहन शर्मा, जिला कलेक्टर, अजमेर

मीडिया को नहीं दे रहे कोई भी जानकारी
नवजातों की मौत के मामले में रविवार देर रात तक अस्पताल प्रशासन कोई भी जानकारी देने से बचता रहा। अस्पताल प्रशासन ने मीडिया से किसी भी तरह की कोई भी जानकारी देने से साफ मना कर दिया। सूत्रों को कहना है कि राज्य सरकार ने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ सहित अस्पताल प्रशासन पर पाबंदी लगा दी है कि नवजातों से संबधित कोई भी जानकारी मीडिया से साझा नहीं की जाए। शनिवार और रविवार को जेएलएन के निरीक्षण करने आई टीम ने भी मीडिया से दूरी बनाए रखी।

एसएनसीयू और आईसीयू से स्टॉफ कम किए
अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि जेएलएन अस्पताल में लंबे समय से नर्सिंग स्टाफ को बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से यहां पर नर्सिंग स्टाफ बढ़ाने की बजाय कम कर दिए गए हैं। इस कारण ड्यूटी कर रहा स्टाॅफ भर्ती बच्चे की पूरी देखभाल नहीं कर पाता है। जबकि यहां पर एसएनसीयू और आईसीयू की सबसे चार यूनिटें हैं। इन चार यूनिटों में पहले 50 का स्टाॅफ कार्यरत था जिसे घटाकर 40 कर दिया गया। इनमें से भी कुछ स्टाॅफ छुट्‌टी पर रहता है और कुछ काे प्रशासनिक कामों में लगा रखा है।

सीलन से संक्रमण का खतरा

कोटा में बच्चों की मौत के बाद गठित जांच टीम ने यह रिपोर्ट दी थी कि नवजातों में संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण शिशु यूनिट में सीलन का होना है। यह बच्चों के लिए खतरनाक और जानलेवा है। वहीं, जेएलएन अस्पताल के शिशु यूनिट और आसपास भी सीलन होने से इन दिनों रंगरोगन कराया जा रहा है।

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